शिवपुरी। शिक्षा विभाग इन दिनों बड़ी विसंगति से गुजर रहा है। स्थिति यह है कि जिन स्कूलों में बच्चे नहीं हैं वहां पर पढ़ाने के लिए शिक्षक तैनात हैं। वहीं जिन स्कूलों में बच्चे हैं वहां पर पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। भावी पीढ़ी के भविष्य के साथ यह अजीब सा खिलवाड़ जिले में किया जा रहा है। जिले में 264 स्कूल ऐसे हैं जिनमें शून्य से लेकर 20 तक बच्चे ही दर्ज हैं। यहां शून्य संख्या वाले 24 विद्यालय सामने आए हैं तो 10 से भी कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की संख्या 54 है। इसके बावजूद शिक्षकों की इन शालाओं में तैनाती दर्शाई जा कर प्रतिमाह सरकारी खजाने से वेतन भुगतान किया जा रहा है। दूसरी ओर इसी जिले में 1 सैकड़ा से अधिक स्कूल ऐसे हैं जिन में विद्यार्थी तो हैं लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षकों की कोई व्यवस्था नहीं है। यानी यह तमाम स्कूल छात्र होने के बावजूद शिक्षक विहीनता की स्थिति का सामना कर रहे हैं। नियमानुसार जिन विद्यालयों में 20 से कम बच्चे हैं उन विद्यालयों का समायोजन अन्य विद्यालयों में किया जा कर इन शालाओं को बंद कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन शासन स्तर पर इस तरह की कोई पहल स्थानीय स्तर से नहीं की गई जिसके कारण यह विसंगति रह रहकर सामने आ रही है। दूसरी ओर संसाधनों की दृष्टि से देखें तो कहीं शिक्षकों के अभाव तो कहीं छात्रों की कमी के चलते बंद हो रहे इन स्कूलों की आधारभूत संरचना अर्थात स्कूल भवन और खेल मैदान सहित अन्य संसाधन बिना उपयोग के ही कबाड़ होते जा रहे हैं, और कहीं कहीं तो इन पर स्थानीय समुदाय के लोग काबिज होते चले जा रहे हैं।
निरीक्षण में कहीं मिली आटा चक्की तो कहीं बंधी थीं भैंसे
पिछले दिनों विभागीय निरीक्षण के दौरान एक स्कूल में आटा चक्की लगी मिली थी। कहीं पर भैंसे चरती हुइ दिखाई दे रही थीं। अधिकांश जगह निरीक्षण में यह सामने आया कि शिक्षक समय पर स्कूल ही नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों के एडजस्टमेंट के साथ साथ निर्जन स्कूल भवनों का अन्य सरकारी उपक्रमों के लिए अधिग्रहण कर इनमें शासकीय संस्थान शिफ्ट किए जाएं तो शासन का करोड़ों रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बचाया जा सकता है। ऐसा होने पर इन तमाम स्कूल भवनों का दुरुपयोग भी रोका जा सकता है। कागजों में संचालित हो रहे स्कूलों के संबंध में जिला स्तर से प्रस्ताव शासन स्तर को भेजे जाने के उपरांत वहां से लगने वाली अंतिम मोहर के बाद ही स्कूलों को नियमानुसार बंद किया जा सकता है।

