प्रॉपर्टी टैक्स के तहत करदाता से लिए जाने वाले चेक होते हैं बाउंस ,बहुमंजिला इमारत को टैक्स की रसीद में खुली भूमि बताकर लिया जाता है टैक्स
ग्वालियर खबर/ अंशुल मित्तल| ग्वालियर नगर निगम जोकि सुशासन के, अपने खोखले दावों के चलते अक्सर सुर्खियों में बना रहता है, यहां के जिम्मेदार कर्मचारी भी अपनी लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते विभाग को चूना लगाने से बाज नहीं आते, क्योंकि यहां संपत्ति कर के तहत करदाता से लिए गए पेमेंट चेक बाउंस हो जाते हैं, इस पर जिम्मेदार मौन धारण कर लेते हैं, इतना ही नहीं भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बहुमंजिला कमर्शियल इमारत के स्थान पर टैक्स वसूलने के दौरान उस जगह को खुली भूमि बताकर करदाता को लाभ पहुंचाया जाता है और विभाग को लगाया जाता है चूना|
1 बड़ी राशि के चेक होते हैं बाउंस,
यहां आपको बता दें कि प्रॉपर्टी टैक्स जोकि नगर निगम द्वारा करदाताओं से वसूल किया जाता है, इसमें कुछ कर दाता पेमेंट के तौर पर बैंक खाते का चेक नगर निगम के संबंधित टीसी को देकर, रसीद प्राप्त कर लेते हैं, और कर वसूलने वाला कर्मचारी काटी गई तस्वीरों के आधार पर अपना वसूली टारगेट पूरा करने का दावा करता है, लेकिन जब इन करदाताओं के टैक्स के तौर पर दिए गए चेक बैंक में बाउंस होते हैं तो संबंधित कर्मचारी आंखें बंद किए बैठा रहता है, जबकि नियम यह कहता है कि टैक्स के तौर पर दिया गया चेक बाउंस होना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है जिन पर 7 दिवस के अंदर कानूनी कार्यवाही कराया जाना चाहिए, लेकिन ग्वालियर नगर निगम में वर्ष 2022 में ही तकरीबन 3500000 रुपए की चेक बाउंसिंग हो चुकी है, जिस पर अधिकारी आंखें बंद किए बैठे हुए थे, इस मामले जब हमारे संवाददाता द्वारा नगर निगम कमिश्नर से बातचीत की गई तब आनन-फानन में कार्रवाई करने के आदेश दिए गए,
2 बहुमंजिला व्यवसायिक भवन को खुली भूमि बताकर लिया टेक्स, शासन को लगाया चूना
यहां आपको बता दें कि नगर निगम द्वारा खुली भूमि, रिहायशी इमारत, और व्यवसायिक भवनों से लिए जाने वाले टैक्स की दरें अलग अलग रहती है, जिसमें खुली भूमि पर टैक्स की दरें कम है और व्यवसायिक भवन पर, सबसे ज्यादा, और यह टेक्स इस मापदंड के साथ बढ़ता जाता है कि वह भवन कितने मंजिल का बना है, नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय क्रमांक 14, वार्ड क्रमांक 60 के अंतर्गत ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया जिसमें बहुमंजिला व्यवसायिक इमारत को टैक्स की रसीद में खुली भूमि बताकर करदाता को लाभ पहुंचाया गया और निगम को पहुंचाया गया नुकसान, अब जाहिर है कि जिम्मेदारों द्वारा करदाता पर यह मेहरबानी मुफ्त में तो नहीं की गई होगी, सीधे तौर पर देखा जाए तो इस गड़बड़ झाले के जिम्मेदार क्षेत्र के एपीटीओ महेश पाराशर हैं, इस संबंध में भी जब ग्वालियर के नगर निगम कमिश्नर किशोर कन्याल से जानकारी लेनी चाही तब उन्होंने बड़ी ही नम्रता से कार्रवाई कराए जाने का आश्वासन दिया,
सवाल यह है कि शिकायत करने के बाद ही मामलों पर कार्रवाई क्यों की जाती है, जब जनता के दिए गए टैक्स से इन अधिकारियों और कर्मचारियों को तनख्वाह मिलती है तो जनता के साथ इस तरह का पक्षपात पूर्ण व्यवहार क्यों.. बरहाल जब इस मामले में संबंधित विधानसभा क्षेत्र के उपायुक्त ए पी एस भदौरिया से जानकारी लेनी चाहिए तब उन्होंने ना तो फोन रिसीव किया और ना ही ऑफिस में मिले,
इनका कहना है,
आपके द्वारा संज्ञान में लाए गए दोनों ही मामले गंभीर हैं, टैक्स के तहत चेक बाउंस होना और बने हुए भवन का खुली भूमि बताकर टैक्स लिया जाना, दोनों ही मामले शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले हैं, जिम्मेदारों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी,
किशोर कान्याल, आयुक्त नगर निगम ग्वालियर


