सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने इस बारे में बताया है। उसने कहा है कि नए नियम के लागू होने के बाद दो अलग पीएफ अकाउंट्स रखने होंगे। पहला अकाउंट टैक्सेबल कंट्रिब्यूशन के लिए होगा। दूसरा अकाउंट नॉन–टैक्सेबल कंट्रिब्यूशन के लिए होगा
इंप्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) से जुड़ा टैक्स का नियम बदल गया है। अब एक वित्त वर्ष में EPF में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के कंट्रिब्यूशन पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर टैक्स लगेगा। यह नियम 1 अप्रैल, 2022 से लागू हो जाएगा। हालांकि, नियम में बदलाव का असर EPF के कुछ ही सब्सक्राइबर पर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि EPF के ज्यादातर सब्सक्राइबर का एक वित्त वर्ष में कुल कंट्रिब्यूशन 2.5 लाख रुपये से बहुत कम है।
EPF का इंट्रेस्ट रेट 43 साल में सबसे कम
इस नियम के दायरे में आने वाले ईपीएफ के सब्सक्राइबर का कुल रिटर्न कम हो जाएगा। अब उन्हें ईपीएफ में जमा रकम के ब्याज पर टैक्स देना होगा। ईपीएफ पर इंट्रेस्ट रेट में सरकार ने कमी की है। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान ईपीएफ में जमा रकम पर सिर्फ 8.1 फीसदी ब्याज मिलेगा। यह 43 साल में ईपीएफ पर मिलने वाला सबसे कम ब्याज है।
PF के दो अकाउंट रखने होंगे
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने इस बारे में बताया है। उसने कहा है कि नए नियम के लागू होने के बाद दो अलग पीएफ अकाउंट्स रखने होंगे। पहला अकाउंट टैक्सेबल कंट्रिब्यूशन के लिए होगा। दूसरा अकाउंट नॉन-टैक्सेबल कंट्रिब्यूशन के लिए होगा। इससे टैक्स के कैलकुलेशन में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी।
एक उदाहरण से समझ सकते हैं कैलकुलेशन का तरीका
हम एक उदाहरण से टैक्स कैलकुलेशन के तरीके को समझ सकते हैं। मान लीजिए अंजु गुप्ता एक आईटी कंपनी की इंप्लॉई हैं। एक वित्त वर्ष में ईपीएफ में उनका कंट्रिब्यूशन 1.5 लाख रुपये है। वह 1.5 लाख रुपये का कंट्रिब्यूशन वीपीएफ में करती हैं। 1 अप्रैल, 2021 को उनके ईपीएफ अकाउंट में जमा रकम 20 लाख रुपये है। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान उन्होंने कुल 3 लाख रुपये कंट्रिब्यूट किया है।
3 लाख रुपये में से 2.5 लाख रुपये को नॉन-टैक्सेबल अकाउंट में डाल दिया जाएगा। बाकी 50,000 रुपये का अमाउंट टैक्सेबल अमाउंट में डाल दिया जाएगा। इस तरह 50 रुपये की रकम पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर टैक्स लगेगा। इस तरह गुप्ता को ईपीएफ पर मिलने वाला कुल रिटर्न घट जाएगा।
प्राइवेट सेक्टर के 6 करोड़ सब्सक्राइबर ईपीएफ के दायरे में आते हैं
EPFO प्राइवेट कंपनियों के इंप्लॉइज के रिटायरमेंट फंड का प्रबंधन करता है। देश में ईपीएफओ के करीब 6 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। कर्मचारी की बैसिक सैलरी का 12 फीसदी हर महीने ईपीएफ में जमा होता है। एक वित्त वर्ष के अंत में सरकार इस फंड पर ब्याज देती है। सरकार समय-समय पर इंट्रेस्ट रेट की समीक्षा करती है।


