MP में OBC टीचर्स का अनशन, तबीयत बिगड़ रही, बोले- सरकार बताए, हमारी क्या गलती

भोपाल| यहां लोकशिक्षण संचालनालय के बाहर OBC के चयनित शिक्षक धरना दे रहे हैं। भीषण गर्मी में उनकी तबीयत खराब हो रही है, लेकिन खाना तो दूर की बात, वे पानी तक नहीं पी रहे। 42 डिग्री की तपिश में भी कैंडिडेट्स का हौसला बरकरार है। आंखों में सिर्फ नौकरी का सपना है। उनका कहना है हमने बच्चों और परिवार के हिस्से का वक्त चुराकर सिलेक्शन लिस्ट में नाम बनाया। जब नौकरी की बारी आई, तो सरकार मुंह फेर रही है। वे पूछ रहे हैं कि हम क्या गलती की है, ऐसी जिद क्यों सरकार कर रही है।

चयनित उम्मीदवार कहते हैं कि संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा का 2018 में ऐड निकला। फरवरी 2019 में एग्जाम हुआ। हम तो तब से ही खुद को सिलेक्टेड मान रहे हैं। कोरोना के 2 साल बाद डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन भी हो गया। अब नौकरी मिलने ही वाली थी, तो ओबीसी आरक्षण पर रोक का तर्क दिया जा रहा है। क्या इसके लिए हम जिम्मेदार हैं?

अस्पताल में भर्ती हो रहे, पर पानी नहीं पिएंगे

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बुदनी विधानसभा के रहने वाले धर्मपाल सिंह की तबीयत बिगड़ने पर 26 अप्रैल की रात उन्हें अस्पताल शिफ्ट करना पड़ा। पूछने पर पता चला कि वे अनशन पर हैं। पानी तक नहीं पिया। वीकनेस इतनी है कि वे बात भी नहीं कर पा रहे। उन्होंने बस इतना कहा कि अनशन पर हूं तो पानी कैसे पी सकता हूं।

महिला उम्मीदवार भी सड़क पर

धरना और अनशन करने वाले धर्मपाल अकेले नहीं हैं। बालाघाट, छिंदवाड़ा, उमरिया, कटनी से पहुंचीं चयनित महिला टीचर्स भी हैं, जो अपने पति, बच्चों और परिवार से दूर नौकरी की उम्मीद में खुले में रात काट रही हैं। ज्यादातर के परिवारवालों को ये नहीं मालूम कि उनकी बेटी-बहू यहां रात में कैसे सोती हैं, क्या खाती हैं, कहां टॉयलेट जाती हैं और कहां कपड़े बदलती हैं। कोई बच्चों से झूठ बोलकर आया है तो कोई परिवार से। सबका यही कहना है कि नौकरी की दहलीज पर आकर वे खाली हाथ घर नहीं लौटेंगे।

Leave a comment