सुप्रीम फैसले से मालवा में सेक्स वर्कर्स को मिला सेफ पैसेज

लोकमतसत्याग्रह/नीमच।  देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में सेक्स वर्कर को उनके स्वेच्छिक व्यवसाय में सरकारी तंत्र द्वारा हस्तक्षेप न करने के फैसले से मालवा में अचानक खासी हलचल बढ़ गई है। खासतौर से नीमच, मंदसौर और रतलाम में एक समुदाय की महिलाएं देह व्यापार को कुप्रथा के रूप में ढो रही हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के अपने अपने मायने निकाले जा रहे हैं।  गौरतलब है कि नीमच, मंदसौर, रतलाम जिलों से गुजरने वाले अंतरराज्यीय राजमार्ग के किनारे लगभग 50 से अधिक ऐसे गांव, डेरे हैं जहां पर देह व्यापार खुले में होता है। बीते वर्षों में पुलिस ने कई छापामार कार्रवाइयों में इन ठिकानों से सैकड़ों ऐसी बच्चियों को मुक्त कराया है जिनसे देह व्यापार कराया जा रहा था। दरअसल बांछड़ा समाज की महिलाएं व युवतियां इस कुप्रथा को लंबे समय से ढोती आ रही हैं। शाम होते ही हाइवे के किनारे की बस्तियां और डेरे गुलजार हो जाते हैं।  सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अर्थ यह है कि सेक्स वर्क भी एक तरह का कारोबार है और उन्हें भी व्यवसायगत आजादी मिलनी चाहिए। पुलिस, प्रशासन या तंत्र उन्हें बिना वजह परेशान न करे। उन्हें भी सम्मान से जीने का हक है। इस फैसले के बाद इस समुदाय में खासी हलचल है लेकिन इसी समुदाय के जो सुधारवादी युवा हैं वे यह भी चिंता जता रहे हैं कि इस फैसले की आड़ में नाबालिग बच्चियों का शोषण बढ़ सकता है। उल्लेखनीय है कि नाबालिग बच्चियों से मालवा में देह व्यापार कराने पर रोक लगाने के लिए समुदाय के एक युवा आकाश चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका लगा रखी है जो प्रचलन में है। दूसरी ओर जिले के एसपी सूरज कुमार वर्मा ने कहा कि इस फैसले की अभी तक आधाकारिक प्रतिलिपि उनके पास अभी तक नहीं आई है निश्चित रूप से उसका पालन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी नाबालिग अथवा बालिग से जबरन देह व्यापार कराया जाता है तो वह अपराध की श्रेणी में आता है और उसमें नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस मुख्यालय अथवा शासन के स्तर से कोई न कोई गाइड लाइन जारी होने पर अधिकारियों को इस संबंध में ट्रेनिंग देकर कोर्ट के फैसले का पालन कराया जाएगा. वहीं इस कुप्रथा के खिलाफ अभियान चलाने वाले बांछड़ा समुदाय के युवा आकाश चौहान ने बताया कि कोर्ट के इस फैसले के बाद नाबालिगों को इस व्यवसाय में जबरन ढकेलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. वहीं पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है कि कैसे इन मामलों में कैसे कार्यवाही करे.   

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