लोकमतसत्याग्रह/भोपाल।आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे देश के 15 वें राष्ट्रपति का चुनाव तीन दिन बाद होने जा रहा है। एनडीए की ओर से प्रत्याशी बनाई गईं द्रौपदी मुर्मू इस पद की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। वे देश के सर्वोच्च पद पर पीढ़ी परिवर्तन की परिचायक भी होंगी। अभी तक जो 14 राष्ट्रपति रहे हैं, उन सभी का जन्म आजादी के पहले ही हुआ था। जबकि मुर्मू का जन्म आजादी के बाद यानी 1958 में हुआ है। इस सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले सभी 14 राष्ट्रपति कोई न कोई नवाचार करते रहे हैं तो अपने निर्वाचन से लेकर प्रधानमंत्रियों को शपथ दिलाने के रिकॉर्ड भी राष्ट्रपतियों के नाम है। ऐसे ही रोचक रिकॉर्ड की जानकारी हम आपके लिए लेकर आए हैं।
बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए की ओर से ट्रायबल कार्ड के तौर पर झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रत्याशी बनाया गया है। नामांकन के बाद से बीजेपी द्वारा चलाई जा रही मुहिम के तहत करीब 65 फीसदी वोट मुर्मू को मिलना तय माने जा रहे हैं। उनके सामने हैं विपक्ष के प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवतं सिन्हा। दोनों ही प्रत्याशी अपने लिए वोट जुटाने राज्यों का दौरा कर रहे है। शुक्रवार को मुर्मू भोपाल भी आईं थीं तो एक दिन पहले विपक्ष के प्रत्याशी सिन्हा भी भोपाल में थे। अधिकांश दलों का समर्थन आदिवासी महिला नेत्री मुर्मू को मिलना तय है। ऐसे में चुनाव और उसके परिणाम मात्र औपचारिकता ही माने जाएंगे। मगर हम बता दें कि बीते 72सालों में मात्र एक बार ही राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्विरोध हो सका है। एक बार और ऐसा ही मौका बना था, लेकिन महज 10 फीसदी वोटों के चलते हमारा देश दूसरी बार मौका चूक गया। यह मौका बना था मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम के निर्वाचन के दौरान कलाम के लिए अधिकांश दल साथ आ गए थे और 90 फीसदी वोट उन्हें मिल गए थे।
मूर्मू तोड़ेंगी एक साथ कई रिकॉर्ड
अव्वल तो मुर्मू आजाद भारत में जन्मीं पहली व्यक्ति होंगी जो देश का प्रथम नागरिक बनेंगी। उनका जन्म 20 जून 1958 का है, अभी तक चुने गए सभी 14 राष्ट्रपति और तीनों कार्यवाहक राष्ट्रपति का जन्म देश को आजादी मिलने के पहले का रहा है। मुर्मू इस मामले में भी खास हैं कि उन्होंने अपना राजनीतिक सफर पार्षद के पद से किया था, जो सबसे छोटा पद माना जाता है। सबसे निचले पद से वे सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाली हैं। सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति का रिकॉर्ड भी उनके नाम हो सकता है। जिस दिन वे शपथ लेंगी, उस दिन उनकी उम्र होगी 64 साल 1 माह 8 दिन। वहीं पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के तौर पर भी हमेशा मुर्मू को याद रखा जाएगा। ओडिशा से बनने वाली वे दूसरी राष्ट्रपति होंगी। उनके पहले वीवी गिरी भी ओडिशा के निवासी थे। इस मामले में यूपी के नाम अभी तक दो राष्ट्रपति देने का रिकॉर्ड है तो मध्यप्रदेश, केरल, तेलंगाना, बिहार, आंध्रप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल से एक-एक राष्ट्रपति चुने गए हैं।
| नाम | जन्मतिथि |
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद | 3 दिसंबर 1884 |
| डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन | 5 सितंबर 1888 |
| डॉ. जाकिर हुसैन | 8 फरवरी 1897 |
| फखरुद्दीन अली अहमद | 10 अगस्त 1894 |
| नीलम संजीव रेड्डी | 13 मई 1905 |
| ज्ञानी जैल सिंह | 19 मई 1913 |
| आर वेंकटरमण | 5 मई 1916 |
| डॉ. शंकरदयाल शर्मा | 4 दिसंबर 1910 |
| केआर नारायणन | 19 अगस्त 1918 |
| डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम | 27 अक्टूबर 1920 |
| प्रतिभा पाटिल | 19 दिसंबर 1934 |
| प्रणब मुखर्जी | 11 दिसंबर 1935 |
| रामनाथ कोविंद | 1 अक्टूबर 1945 |
आज भी निर्विरोध जीतने वाले इकलौते राष्ट्रपति हैं संजीव रेड्डी
नीलम संजीव रेड्डी आज भी अनोखे राष्ट्रपति हैं, इसकी वजह है उनका निर्विरोध राष्ट्रपति चुना जाना। 11 फरवरी 1977 को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद का अचानक निधन हो गया। तात्कालिक व्यवस्था के तहत उप राष्ट्रपति बीडी जत्ती ने कार्यकारी राष्ट्रपति का कार्यभार संभाल लिया। उस समय लोकसभा चुनाव भी चल रहे थे। इन चुनावों के बाद 4 जुलाई 1977 को राष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकी और 6 अगस्त को मतदान हुआ। 37 उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन भरा, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अवतार सिंह रिखी ने नामांकन पत्रों की जांच की तो रेड्डी के सिवाय अन्य सभी 36 उम्मीदवारों का नामांकन रद्द कर दिया गया। इस तरह, चुनाव मैदान में एकमात्र उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी बचे और मतदान करवाने की जरूरत नहीं पड़ी। 21 जुलाई 1977 को नाम वापसी की मियाद पूरी होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नीलम संजीव रेड्डी को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया। खास बात यह है कि रेड्डी बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने थे। देश में यह पहला मौका था जब भारत का राष्ट्रपति बिना मतदान के ही निर्विरोध निर्वाचित हो गया। रेड्डी जब राष्ट्रपति बने तब उनकी उम्र 64 वर्ष की थी। यानी सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति। हालांकि मुर्मू यह रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
पहला चुनाव हार गए तो ले लिया था संन्यास
नीलम संजीव रेड्डी से जुड़ी एक और रोचक बात यह है कि वे कांग्रेस के उम्मीदवार होने के बाद भी राष्ट्रपति पद का चुनाव हार गए थे और दुखी होकर उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था। असल में यह वाकया ऐसा है कि 1969 में इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति चुनाव में उनका विरोध कर दिया। उन्होंने कांग्रेस के सभी सांसदों से अंतरआत्मा की आवाज पर वोट देने की अपील कर दी। रेड्डी को इंदिरा विरोधी गुट का माना जाता था। इसके चलते सभी ने उनके खिलाफ वोट दे दिया। इस हार से नीलम संजीव रेड्डी इतने दुखी हुए कि उन्होंने सक्रिय राजनीति से ही संन्यास ले लिया। 1975 में आपातकाल लगने के बाद रेड्डी ने संन्यास तोड़ दिया और जनता पार्टी का गठन कर दिया। उन्होंने 1977 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ा। राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने दोबारा संन्यास ले लिया और अंतिम समय तक खेती—बाड़ी में ही अपना जीवन गुजारा। रेड्डी ने देश के किसानों के हित में राष्ट्रपति के तौर पर मात्र 30% सैलरी पूरे पांच साल ली। यानी 70 फीसदी सैलरी छोड़ दी, ताकि उनके वेतन से गरीबों का कुछ कल्याण हो सके।
रमण और शर्मा के नाम सर्वाधिक पीएम की शपथ का रिकॉर्ड
एक और रिकॉर्ड नीलम संजीव रेड्डी के नाम बना था, यह था अपने कार्यकाल में सबसे अधिक प्रधानमंत्रियों को शपथ दिलाने का। उन्होंने राष्ट्रपति के तौर पर तीन प्रधानमंत्रियों को शपथ दिलाई और उनके साथ काम किया। इनमें जनता पार्टी के मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह और कांग्रेस की इंदिरा गांधी शामिल हैं। उनके बाद में आर वेंकट रमण और शंकरदयाल शर्मा के नाम भी यह रिकॉर्ड जुड़ गया। आठवें राष्ट्रपति व्यंकट रमण का कार्यकाल सबसे ज्यादा उठापटक और चुनौतियों वाला रहा। अव्वल तो पहली बार केंद्र में गठजोड़ सरकारों का दौर शुरू हुआ। वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने, लेकिन 1989 में गठित उनकी सरकार महज एक साल ही चल पाई. तब वेंकटरमन ने चंद्रशेखर को नौवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई, लेकिन ये सरकार भी सत्ता में महज आठ महीने तक काबिज रही. तभी देश ने मध्यावधि चुनावों का मुंह देखा। इसके बाद उन्होंने नई सरकार में पीवी नरसिम्हा राव को शपथ दिलाई। उन्होंने पूर्व पीएम राजीव गांधी के साथ भी काम किया था। पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या भी इन्हीं के कार्यकाल के दौरान हुई थी। इनके बाद राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा के नाम भी यही रिकॉर्ड रहा, उन्होंने भी तीन पीएम को शपथ दिलाई। इनमें 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई, महज 16 दिन ही सरकार टिक सकी। नए समीकरण के बीच एचडी देवगौड़ा को राष्ट्रपति शर्मा ने शपथ दिलाई। देवगौड़ा की सरकार का भी महज 324 दिन के बाद पतन हो गया। संयुक्त मोर्चा की ओर से इंद्र कुमार गुजराल को प्रधानमंत्री के रूप में नाम आगे किया। उन्हें भी डॉ.शर्मा ने ही शपथ दिलाई।दूसरे राष्ट्रपति राधाकृष्णन ने भी चार प्रधानमंत्रियों को शपथ दिलाई थी, लेकिन उनमें से दो कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे। लालबहादुर शास्त्री के अलावा इंदिरा गांधी को भी पहली बार पीएम की शपथ राष्ट्रपति राधाकृष्णन ने ही दिलाई थी।
| राष्ट्रपति | कार्यकाल |
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद | 1950 से 1962 |
| डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन | 1962 से 1967 |
| डॉ. जाकिर हुसैन | 1967 से 1969 |
| वी वी गिरि (कार्यवाहक) | 1969 से 1969 |
| मो. हिदायतुल्ला (कार्यवाहक) | 1969 से 1969 |
| वी वी गिरि | 1969 से 1974 |
| फखरुद्दीन अली अहमद | 1974 से 1977 |
| बसप्पा दानप्पा जट्टी (कार्यवाहक) | 1977 से 1977 |
| नीलम संजीव रेड्डी | 1977 से 1982 |
| ज्ञानी जेल सिंह | 1982 से 1987 |
| आर.वेंकटरमण | 1987 से 1992 |
| डॉ. शंकरदयाल शर्मा | 1992 से 1997 |
| केआर नारायणन | 1997 से 2002 |
| डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम | 2002 से 2007 |
| प्रतिभा पाटिल | 2007 से 2012 |
| प्रणब मुखर्जी | 2012 से 2017 |
| रामनाथ कोविंद | 2017 से अब तक |
राष्ट्रपति सुखोई में भर चुके हैं उड़ान
वहीं दो राष्ट्राध्यक्षों के नाम लड़ाकू विमान सुखाई में उड़ान भरने का भी रिकॉर्ड है। इनमें महिला राष्ट्राध्यक्ष के तौर पर प्रतिभा पाटिल ने जी सूट पहनकर 25 नवंबर 2009 को को-पायलट की सीट पर बैठकर करीब आधा घंटे की उड़ान भरी थी। यह दुनिया भर में किसी महिला राष्ट्रध्यक्ष के नाम रिकॉर्ड है। पाटिल के पहले तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे कलाम भी सुखाई विमान में उड़ान भर चुके हैं।


