नागपुर: नितिन गडकरी बोले- राजनीति बदल गई है, मन करता है छोड़ दूं, अब पॉलिटिक्स सत्ता के लिए होती है, विकास के लिए नहीं

लोकमतसत्याग्रह/नागपुरराजनीति व्यवस्था को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मन की बात कह डाली। गडकरी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि कभी-कभी मन करता है कि राजनीति ही छोड़ दूं। समाज में और भी काम हैं, जो बिना राजनीति के किए जा सकते हैं। महात्मा गांधी के समय की राजनीति और आज की राजनीति में बहुत बदलाव हुआ है। बापू के समय में राजनीति देश, समाज, विकास के लिए होती थी, लेकिन अब राजनीति सिर्फ सत्ता के लिए होती है। हमें समझना होगा कि राजनीति का क्या मतलब है। क्या यह समाज, देश के कल्याण के लिए है या सरकार में रहने के लिए है?

नेताओं को शिक्षा, कला के लिए काम करना चाहिए

23 जुलाई को हुए कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि गांधी के युग की राजनीति का इस्तेमाल देश के विकास के लिए होता था। आज की राजनीति के स्तर को देखें तो चिंता होती है। आज की राजनीति पूरी तरह से सत्ता केंद्रित है। मेरा मानना है कि राजनीति सामाजिक-आर्थिक सुधार का एक सच्चा साधन है। इसलिए नेताओं को समाज में शिक्षा, कला आदि के विकास के लिए काम करना चाहिए।

जार्ज फर्नांडीस से काफी कुछ सीखा

गडकरी ने दिवंगत समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीस की सादगीपूर्ण जीवन शैली को याद किया। कहा कि मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा, क्योंकि उन्होंने कभी भी सत्ता की भूख की परवाह नहीं की। उन्होंने ऐसा प्रेरणादायक जीवन जिया…। जब लोग मेरे लिए बड़े-बड़े गुलदस्ते लाते हैं या मेरे पोस्टर लगाते हैं तो ये सब अच्छा नहीं लगता। मुझे इससे नफरत है।

गिरीश गांधी के सम्मान समारोह में शामिल हुए

गडकरी नागपुर में सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश गांधी को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। पूर्व एमएलसी गिरीश गांधी पहले एनसीपी के साथ थे, लेकिन 2014 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। गडकरी ने कहा कि जब गिरीश भाऊ राजनीति में थे, तो मैं उन्हें हतोत्साहित करता था, क्योंकि मैं भी कभी-कभी राजनीति छोड़ने के बारे में सोचता हूं। ​​​​

गडकरी का ये बयान भी सुर्खियों में रहा था

नितिन गडकरी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने ने कहा था कि आजकल हर किसी की समस्या है, हर कोई दुखी है। जो मुख्यमंत्री बनते हैं, वो इसलिए परेशान रहते हैं कि पता नहीं कब हटा दिया जाए। विधायक इसलिए दुखी हैं, क्योंकि वो मंत्री नहीं बन पाए। मंत्री इसलिए दुखी हैं, क्योंकि उन्हें अच्छा विभाग नहीं मिला। अच्छे विभाग वाले इसलिए दुखी हैं, क्योंकि वो मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। 

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