‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत विदेशों में तिरंगा फहराने के बाद आठ भारतीय युद्ध पोतों की वतन वापसी शुरू

लोकमतसत्याग्रह/विदेशों में ‘ आजादी का अमृत महोत्सव’ में तिरंगा फहराने के बाद भारत के जहाजों की वतन वापसी शुरू हो गई है। ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से लौटते समय भारतीय नौसेना के युद्धपोत आई एन एस सुमेधा ने मलेशिया के पोर्ट क्लेंग का दौरा किया। लंबी दूरी की परिचालन तैनाती के हिस्से के रूप में यह जहाज दक्षिण पूर्व एशिया में तैनात किया गया है। भारत के 8 जहाजों ने भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर छह महाद्वीपों तीन महासागरों और छह अलग-अलग बंदरगाहों पर तिरंगा फहराया था इन्हीं में से एक जहाज आईएनएस सुमेधा भारत लौट रहा है।

आईएनएस सुमेधा की पोर्ट क्लेंग की यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना भारतीय नौसेना और रॉयल मलेशियाई नौसेना के बीच समुद्री सहयोग और अंतर संचालन को बढ़ाना है दोनों नौसेनाएं विभिन्न मोर्चों पर सहयोग कर रही हैं और वैश्विक कॉमंस की समुद्री सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मई 2022 मैं कोटा के किनाबालु मैं भारत और मलेशिया ने द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘ लक्ष्मण’ में और उसके बाद विशाखापट्टनम में मिलन- 2022 में भागीदारी की थी।इसके बाद दोनों 9 सेनाओं के बीच द्विपक्षीय जुड़ा बढ़ रहा है।

पोर्ट क्लेंग में पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस सुमेधा के चालक दल सदस्य रॉयल मलेशिया नौसेना के कर्मियों के साथ पेशेवर बातचीत करने के साथ ही क्रॉस डेक यात्राओं, खेल जुड़नार में भी हिस्सा लेंगे। यह जहाज स्कूली बच्चों की यात्रा के लिए भी खुला रहेगा युद्धपोत सुमेधा मलेशियाई जहाजों के साथ एक समुद्री साझेदारी अभ्यास में भी भाग लेगा आईएनएस सुमेधा स्वदेश निर्मित अपतटीय गश्ती पोत है। जिसे कई भूमिकाओं के लिए तैनात किया गया है वह विशाखापट्टनम स्थित भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े का हिस्सा है।भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर ‘ आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाने के लिए मस्कट(ओमान) में आईएनएस चेन्नई और आईएनएस कोच्चि, सिंगापुर में आईएनएस सरयू ,अफ्रीका मोम्बासा (केन्या) में आईएनएस तबर, लंदन में आईएनएस तरंगिनी, दक्षिण अमेरिका के रियो डी जेनेरियो(ब्राजील)  में आईएनएस तरकश, पर्थ (ऑस्ट्रेलिया) में आईएनएस सुमेधा  और उत्तरी अमेरिका के सेन डिएगो (यूएसए) में आईएस सतपुड़ा पहुंचे थे। इन सभी जहाजों ने छह महाद्वीपों तीन महासागरों छह अलग-अलग बंदरगाह पर तिरंगा फैलाकर आजादी का जश्न मनाया था।

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