गलत को गलत कहने की हिम्मत हर किसी में हो, प्रख्यात समाजमेवी दया बाई बोली पात्र लोगों को मिले योजनाओं का लाभ

लोकमतसत्याग्रह/देवासदेश में आज भी कई जगह गरीबी और बदहाली है। कई घर ऐसी मां के जिम्मे हैं, जिनके दो दो तीन तीन बच्चे हैं जो गरीबी और तंगहाली में बच्चों की सेवा में लगी है। शासन की अच्छी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचना चाहिए।  शासन विकास के नाम पर चाहे जो भी  करता है उसे आंख बंद करके नहीं स्वीकारना चाहिए, क्योंकि जहां हालात बदतर हैं वहां विकास के नाम पर या किसी गलती के चलते ऐसा हुआ है। किसी भी गलत कार्य पर मक्खनबाजी करने की बजाय ना कहने की हिम्मत रखना चाहिए। यह कहना है ख्यात समाजसेवी दया बाई का। जो देवास से गुजरते हुए कुछ समय के लिए यहां रुकी।

कई अवार्ड से सम्मानित

भारत शासन से कई अवार्ड प्राप्त कर चुकी दया बाई ने कहा कि सुना है देवास में बहुत सारे नोट छपते हैं लेकिन हम ऐसे लोगों के लिए काम करते हैं जिन्हें नोट देखने को नहीं मिलते। 81 वर्षीय दया बाई कहती हैं कोई कह रहा था सब्जी थोड़ी देर में काली हो जाती है, दवाई के नाम पर जहर का छिड़काव किया जाता है। कोई गलत को गलत नहीं कहता, इसलिए ऐसा होता है। गलत को गलत बोलने की हिम्मत हर किसी को रखना चाहिए। 

मदर टेरेसा कहा जाता है

छिंदवाड़ा जिले में गोंड आदिवासी समाज के लिए मदर टेरेसा के रूप में जानी जाने वाली दया बाई केरल के उच्च वर्गीय जमीदार परिवार की बेटी हैं। उनकी समाज सेवा और समर्पण को देखते हुए उस पर कई फिल्म और डॉक्युमेंट्रीज बन चुकी हैं। 16 वर्ष की उम्र से ही समाजसेवा का जिम्मा संभालने वाली दया बाई छिंदवाड़ा जिले के हर्रई ब्लॉक के तिसा गांव में रह रही हैं। आदिवासी बच्चों को शिक्षित करने के लिए उन्होंने स्कूल खोला और हजारों बच्चों को तालीम दी। क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा का भी जिम्मा उन्होंने ही उठाया। छिंदवाड़ा जिले में हुए एक गैंगरेप कि पीड़िता को न्याय दिलाने में उन्होंने खूब संघर्ष किया और सुर्खियों में आई। 

मूल रूप से केरल की हैं

मूलतः केरल के कोट्टायम जिले की रहने वाली दया बाई गोंड जनजाति के रीति रिवाज और रहन-सहन के शोध और अध्ययन के लिए वर्ष 1980 में छिंदवाड़ा जिले में पहुंची थी और फिर समाज सेवा में ऐसी लगन लगी की वहीं की होकर रह गई। पिता के निधन के बाद उन्हें जो संपत्ति मिली उससे उन्होंने 12 एकड़ जमीन खरीदी और उसमें से 8 एकड़ जमीन सार्वजनिक उपयोग में दान कर चुकी हैं। देवास पहुंचने पर आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज श्रीवास्तव ने उनका स्वागत किया और शिक्षा के अधिकार को लेकर कई बिंदुओं पर उनसे चर्चा की। 

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