लोकमतसत्याग्रह/वक्फसंपत्ति पर सालों से काबिज शहर के दुकानदार अब वक्फ संपत्ति पर मालिकाना हक पाने के लिए बोर्ड को घेरने की तैयारी में है। जिले भर में कुल 900 परिवार हैं जो वक्फ के किराएदार हैं। इनमें कई आजादी के बाद से हैं। अब ये किराएदार बढ़ा हुआ किराया देने की बजाए वक्फ बोर्ड को ही भंग करने और जमीन पर मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में किराएदारों ने मंगलवार को शहर भर में प्रदर्शन कर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
इससे पहले वक्फ बोर्ड के नए कानून को लेकर मंगलवार को वक्फ लैंड होल्डर्स एसोसिएशन की बैठक प्रधान प्रमोद बंसल की अध्यक्षता में पंजाबी धर्मशाला में हुई। बैठक के बाद एसोसिएशन के प्रधान प्रमोद बंसल कानूनी सलाहकार एडवोकेट रविन्द्र सिक्का की अगुवाई में कई मसलों पर चर्चा हुई। प्रधान प्रमोद बंसल ने कहा कि एक तरफ तो सरकार 2022 तक सभी को आवास देने का आश्वासन दे रही है वहीं दूसरी ओर वक्फ बोर्ड के किराएदारों को उजाड़े जाने का कार्य किया जा रहा है।
नएकानून पर उठाए सवाल
उन्होंनेकहा कि वक्फ बोर्ड के नए नियम किराएदारों के लिए काफी घातक साबित होंगे। वक्फ बोर्ड की जमीन पर बने मकान, दुकान उनके लिए पूजा स्थलों के बराबर है। इन्हें किसी भी हालत में छीनने नहीं दिया जाएगा। बंसल ने कहा कि अब जो कानून बनाया गया है वह तथ्यहीन है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड के लिए बनाए गए काले कानून जिसमें वक्फ बोर्ड के किराएदारों को बेदखल करने का प्रावधान किया गया है को खत्म करने के लिए हर लड़ाई लड़ी जाएगी। एडवोकेट रविन्द्र सिक्का ने कहा कि सरकार ने जिस तरह निकाय की सम्पत्ति को कलेक्टर रेट पर बेचने की घोषणा की है, उसी प्रकार वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी का मालिकाना हक भी दिया जाए। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड का इन जमीनों पर कोई हक नहीं है।
किराएदारों के विराेध पर बोर्ड के प्रशासन का बयान
झज्जरमें वक्फ की जमीन पर मालिकाना हक मानने और इस संबंध में सिलसिलेवार विरोध जताने पर वक्फ बोर्ड के प्रशासक खिजर अहमद का कहना है कि वक्फ संपत्ति अल्लाह की मेहरबानी से मिली है। अल्लाह के नाम की इस संपत्ति पर ही हम सब हैं। ये किसी और के नाम किस तरह हो सकती है। प्रशासन ने कहा कि जहां तक बाद बढ़े हुए किराए की बात है तब हरियाणा वक्फबोर्ड ने ही इसमें संशोधन करने की बीड़ा पहले पहल उठाया, तब जाकर देशभर के वक्फ बोर्ड को भी किराया कम करना पड़ा। वक्फ प्रशासक अहमद ने बताया कि हम अपने ही किराएदारों से कोई विरोध नहीं चाहते, जो हमारे अच्छे किराएदार लीज धारक है,और समय पर किराया जमा करते हैं। वक्फ संपत्तियों का रख-रखाव करते है उन्हें हम समझा रहे हैं। वहीं जो किराएदार बढ़ा हुआ किराया भी देना नहीं चाहते और दूसरों को भी बरगला रहे हैं उनके लिए एक्ट में कार्रवाई करने का भी प्रावधान है।
1960 में बना वक्फ बोर्ड
वर्ष1947 में देश बंटवारे के समय इस्लाम से संंबंधित स्थलों इनमें मस्जिद, इमामगाह,इमामबाड़ा, दरगाह,कब्रगाह थे उनके अधीन आने वाली जमीने पहले कस्टोडियन के पास थी। इसके बाद देश का वक्फ कानून बना और वर्ष 1947 में ये जमीन वक्फ की घोषित कर दी गईं। इन जमीन के रख-रखाव के लिए 1960 में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ। इस के बाद वक्फ एक्ट के तहत केंद्र सरकार समय-समय पर संशोधन करती आई है। हरियाणा में 12 हजार 500 वक्फ संपत्तियां हैं।
येहै वक्फ का नया संसोधन
वक्फका पहला एक्ट वर्ष 1995 में आया। इसके बाद वर्ष 2013 में इसमें संसोधन हुआ कि जो वक्फ प्रापर्टी है। उनका अब प्रति स्कवेयर प्रति वर्ष प्रतिशत किराया लिया जाएगा। इस संशोधन का काफी विरोध देश भर में हुआ। फिर हरियाणा वक्फ बोर्ड ने इस मामले में संशोधन की पहल की। इसके बाद दिसंबर 2015 में इसमें फिर से संशोधन हुआ। इसके तहत आवासीय खेतीहर प्रापर्टी पर 2 और व्यवसायिक प्रापर्टी पर ढाई प्रतिशत बढ़़ा हुआ किराया लिया जाएगा।
देश में वक्फ बोर्ड की नहीं जरूरत
इसपरमालिकाना हक भारत सरकार का है। उन्होंने कहा कि जो लोग बंटवारे के समय यहां अपनी जमीनें छोड़ कर पाकिस्तान चले गए थे उन्हें वहां मुआवजा दे दिया गया है, तो फिर वक्फ बोर्ड की भारत में क्या जरूरत है। एडवोकेट सिक्का ने कहा कि वक्फ बोर्ड के काले कारनामों की सीबीआई जांच होनी चाहिए। बैठक में हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सोहन सिंह गुर्जर, उपप्रधान खरैती लाल अरोड़ा,कोषाध्यक्ष कमल सैनी, प्रवेश दिक्कारा, दिनेश चुघ, दीपक हम्भीरिया, मनोहर भगत, तिलक गुसांई, जग्गी कटारिया, विक्की, रक्के पोपली, विकास शर्मा, संजय,धर्म सैनी, मामन सैनी मौजूद रहे।
झज्जर. लघुसचिवालय में वक्कार्बोड की जमीन को लेकर नारे लगाते मेन बाजार के व्यापारी अन्य लोग। (दाएं) तहसीलदार को वक्कार्बोड के खिलाफ ज्ञापन देते मेन बाजार के व्यापारी अन्य लोग।


