केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा: सिमी देश के लिए इस्लामिक सत्ता कायम करने की कोशिश कर रहा था इसलिए बैन किया

लोकमतसत्याग्रह/केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल करके कहा है कि बैन की गई स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट इन इंडिया (SIMI) संस्था देश में गुपचुप तरीके से काम कर रही है और इसे फंड भी मिल रहे हैं। केंद्र ने कहा कि इस संस्था का मकसद देश में इस्लामिक सत्ता कायम करना है और किसी भी हालत में इसे ऐसा करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

गृह मंत्रालय ने एफिडेविट में कहा है कि हमारे सामने जो सबूत हैं वे साफतौर पर दिखाते हैं कि 27 सितंबर 2001 को बैन होने के बाद भी सिमी कार्यकर्ता मिल रहे हैं, बैठकें कर रहे हैं, षड्यंत्र रच रहे हैं, गोलाबारूद जमा कर रहे हैं और ऐसे कामों में शामिल हो रहे हैं जो विनाशकारी हैं और देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

देश की शांति और सौहार्द्र खत्म कर सकता है सिमीकेंद्र
केंद्र ने कहा कि वे अपने साथियों और दूसरे देशों में बसे उनके मालिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं। उनके एक्शन देश की शांति और सौहार्द्र को खत्म करने करने की क्षमता रखते हैं। इस संगठन के उद्देश्य हमारे इस देश के कानूनों के खिलाफ हैं। खासतौर से देश में इस्लामिक सत्ता कायम करने के उनके लक्ष्य को हम किसी भी सूरत में जारी नहीं रहने दे सकते हैं।

संस्था पर लगे बैन को हटाने की याचिका के जवाब में केंद्र ने दाखिल किया ऐफिडेविट
केंद्र ने यह एफिडेविट एक याचिका के जवाब में दायर किया है, जिसमें इस संगठन पर लगाए गए बैन को चुनौती दी गई थी। सिमी पर यह बैन UAPA यानी अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) के तहत लगाया गया था। बता दें कि सिमी की स्थापना 25 अप्रैल 1977 को उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिसर्विटी में हुई थी।

केंद्र का दावासिमी के हर सदस्य को दिलाई जाती है इस्लामिक व्यवस्था लागू करने की कसम
केंद्र ने कहा कि सिमी के हर नए सदस्य को एक कसम दिलाई जाती है जिसमें कहा जाता है कि वे मानवता की आजादी और देश में इस्लामिक व्यवस्था लागू करने के लिए काम करेंगे। केंद्र ने यह भी कहा कि इस संगठन का संविधान न सिर्फ इस देश की अक्षुण्णता और अखंडता को खत्म करने की मंशा रखता है बल्कि भारत और उसके संविधान के खिलाफ लोगों में असंतुष्टि की भावना भी भरना चाहता है।

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