ओलों से डबरा और घाटीगांव में सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान

लोकमतसत्याग्रह/होली के दिन शहर सहित जिले में झमाझम वर्षा हुई। घाटीगांव डबरा में ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। डबरा में गेहूं की फसल बिछ गई, जबकि घाटीगांव में चना, सरसों, गेहूं को नुकसान आया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को 20 से 25 फीसद तक नुकसान है। यदि तेज धूप नहीं निकलती है, तो नुकसान बढ़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में आसमान साफ हो जाएगा और तेज धूप निकलना शुरू होगी, लेकिन 14 फरवरी को नया पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है। हालांकि यह पश्चिमी विक्षोभ मौसम को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाएगा।

राजस्थान में गत दिवस बन गया था चक्रवातीय घेरा

राजस्थान में गत दिवस चक्रवातीय घेरा बन गया था। इस वजह से अरब सागर से नमी आ रही थी। नमी के कारण मौसम बदल गया। घाटीगांव व डबरा ज्यादा प्रभावित रहा। यहां पर वर्षा के साथ ओले भी गिरे। डबरा में गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई। घाटीगांव में सरसों व चना खेतों में कटे पड़े थे। सरसों सूखी हुई थी और ओले गिरने से सरसों की फली टूट गई और सरसों झड़ गई। अब इसके सड़ने की भी संभावना बढ़ गई है, क्योंकि घाटीगांव ज्यादा वर्षा हुई है। डबरा में तेज हवा चली है।

दिन में छाए बादल, तापमान आया सामान्य से नीचे

गुरुवार को दिनभर बादल छाए रहे। बादलों ने धूप को रोक लिया, जिससे अधिकतम तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ, जो सामान्य से 2.2 डिसे कम रहा। इससे दिन में ठंडक रही। देर शाम आसमान साफ हो गया। शुक्रवार से आसमान साफ हो जाएगा। सुबह से तेज धूप निकलेगी, जिससे किसानों को राहत रहेगी।

बादलों के चलते न्यूनतम तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ, जो सामान्य से 2.5 डिसे अधिक रहा। इस कारण रात में ठंडक घट गी।

चार केंद्रों पर वर्षा की स्थिति

केंद्र वर्षा

ग्वालियर 5.2

घाटीगांव 30.2

डबरा 13.4

चीनौर 4.1

भितरवार 0.2

( वर्षा का आंकड़ा मिलीमीटर में है। हवा की गति 62 किमी प्रतिघंटा रही)

अधिकतम तापमान-29.4 डिसे

न्यूनतम तापमान-16.5 डिसे

पारे की चाल

समय तापमान

05:30 17.4

08:30 18.8

11:30 25.6

14:30 28.6

वर्षा के बाद किया निरीक्षण

– वर्षा के बाद डबरा-घाटीगांव का निरीक्षण किया था। किसानों से भी बात की और स्थिति देखी। गेहूं की बाली में दूध की अवस्था थी, वह फसल लेट गई है, जिससे 25 फीसद तक नुकसान की संभावना है। जिन किसानों की खलियान में सरसों व चना रखा हुआ है, उन्हें खलियान में फैलाने के लिए कहा गया है।

डा. राज सिंह कुशवाह, कृषि वैज्ञानिक

Leave a comment