लोकमातसत्याग्रह/भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने गूगल पर आरोप लगाया कि यूजर्स के डिजिटल डाटा पर उसने किसी किले की तरह अपना एकाधिकार हासिल किया हुआ है। उसके तहत काम कर रहे विभिन्न मोबाइल एप्स इस किले के चारों ओर सुरक्षा खाई की तरह इस्तेमाल किए जा रहे हैं। किले और खाई की यह नीति न केवल डाटा पर उसका एकाधिकार बनाए रखती है, बल्कि वह इसके जरिए मोटी कमाई भी कर रहा है। सीसीआई ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) में सुनवाई के दौरान यह बात कही। सीसीआई ने गूगल पर 1,337.76 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसने उसे चुनौती दी हुई है।
सीसीआई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कहा कि गूगल की नीति उसे बाजार में और बड़ा होने व बाकी भागीदारों को कमजोर व निर्भर बनाए रखने के काम आ रही है। बाकी छोटी कंपनियां बड़ी संख्या में यूजर्स और यूजर डाटा हासिल नहीं कर पातीं। गूगल का पूरा जोर अधिक से अधिक डिजिटल डाटा अपने कब्जे में लेने और इससे ज्यादा विज्ञापन राजस्व हासिल करने पर है। उसकी नीति यूजर्स के लिए विकल्प सीमित कर देती है और बाजार से प्रतियोगिता खत्म करती है। सीसीआई ने डाटा के लोकतांत्रिक और बाजार में खुली, निष्पक्ष व मुक्त प्रतियोगिता लाने में उपयोग पर जोर दिया। अपना आदेश लागू होने पर लंबे समय तक बाजार मुक्त व स्वतंत्र प्रतियोगिता से चलने और गूगल की किलेबंदी ध्वस्त होने की बात कही।
डाटा का लोकतांत्रीकरण : यह तर्क भी रखे
प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के सेक्शन चार में एकाधिकार का दुरुपयोग बताते मानक गूगल के रुख को साबित करते हैं। वह किसी खास क्षेत्र में कई एप्स को एकसाथ मुहैया करवाता है, इससे एकाधिकार मजबूत करता है। वहीं बाकी कंपनियों पर अनुचित शर्तें व अतिरिक्त जिम्मेदारियां थोपता है।
मामला ऐसा है
- एंड्रॉइड मोबाइल फोन व अन्य उपकरणों पर अपने एकाधिकार के दुरुपयोग के लिए सीसीआई ने 20 अक्तूबर 2022 को गूगल पर 1,337.76 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। उसे भविष्य में पक्षपाती ढंग से कारोबार न करने को भी कहा। गूगल ने इसके खिलाफ एनसीएलएटी में अपील की।
- 4 जनवरी को एनसीएलएटी की एक बेंच ने गूगल की अपील पर नोटिस जारी कर निर्णय होने तक जुर्माने का 10 प्रतिशत सीसीआई को देने को कहा।
- एंड्रॉइड मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 15 फरवरी से शुरू की गई, 31 मार्च तक निर्णय देने को भी कहा गया।
- एनसीएलएटी ने सीसीआई के आदेश पर रोक से इनकार कर अंतिम सुनवाई 3 अप्रैल को रखी है। गूगल ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जो खारिज हो गई।
26.5 करोड़ डॉलर के टैक्स से बचने की अमेजन की कोशिश
बकाया टैक्स के रूप में अमेजन को 26.5 करोड़ डॉलर चुकाने के यूरोपीय संघ के प्रतिस्पर्धा आयोग के आदेश को दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी ने खारिज करने की मांग की है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को दावा किया यह आदेश ‘माहौल-जनित’ है, इसमें कोई दम नहीं है। अमेजन पर 2017 में यह बकाया टैक्स लगाया गया था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा था कि यूरोपीय संघ में काम करते हुए अमेजन को तीन तिमाहियों में हुआ मुनाफा उसकी स्वामित्व की एक कंपनी को लक्समबर्ग कर-व्यवस्था के तहत हस्तांतरित करने देना गलत था। यह सरकार से गैर-कानूनी मदद मिलने जैसा है। आयोग की कठोरता के बाद लक्समबर्ग ने अपनी कर-व्यवस्था सुधार ली थी।


