प्रशासन 100 करोड़ की जमीन बचाने में कामयाब, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के लिए भूमि आवंटित

लोकमातसत्याग्रह/विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें गोसपुरा व जडेरुआ की 47 बीघा जमीन पर दावा किया था। कोर्ट ने जमीन को शासन के हक मानी है। गोसपुरा की जमीन अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के लिए आवंटित है। वर्तमान में इस जमीन की कीमत 100 करोड़ रुपये से ऊपर है।

किया था दावा पेश

अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता कुलदीप दुबे ने बताया कि जयकिशन अन्य ने जेडरूआ व गोसपुरा की जमीन पर दावा किया था। उनकी ओर से तर्क दिया कि उनके पूर्वज बालचंद पवनानी 1950 से इस जमीन पर काबिज हैं। मार्डन एग्रीकल्चर फार्मिग का काम करते थे। जेबी मंगाराम फैक्ट्री में तालाबंदी होने की वजह से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई। खेती छोड़नी पड़ी, लेकिन तभी इस भूमि पर काबिज चले आ रहे हैं, लेकिन शासन ने खसरे के कालम नंबर 12 में शासकीय दर्ज कर दिया है। इसको लेकर लगातार प्रशासन व शासन स्तर पर आपत्तियां की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की। इसके चलते न्यायालय में दावा पेश किया है। प्रशासन की ओर से दावे का विरोध किया गया। यह जमीन शुरू से ही शासकीय है। इन्होंने लीज की शर्तों का उल्लंघन किया था, जिसके चलते जमीन शासकीय दर्ज हुई। वर्तमान में यहां पर बस अड्डा बनाया जा रहा है। इसमें आवास संघ भी प्रतिवादी था। जमीन आवास संघ को भी आवंटित की गई थी।

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