लोकमातसत्याग्रह/शहर के जिन घरों की बिजली अधिक है, उन लोगों में सौर ऊर्जा की चाहत बढ़ गई है। इस सिस्टम को लगाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने में बिलकुल नहीं सोच रहे हैं। इस वजह से तीन हजार घरों के ऊपर सौर ऊर्जा की प्लेट लग गई है। सौर ऊर्जा लगने से गर्मियों में मकान गर्म होने से बच रहे हैं और बचत भी हो रही है। शहर ने सूरज से दोस्ती कर ली है। शहर के पास इलाके, जिनके घर दो हजार 1500 स्क्वायर फीट से अधिक जगह में बने है, उनमें इसकी चाहत बढ़ी है। जिनका बिल हजार रुपये में आता था, वह घटकर नीचे आ गया है। लोगों के बीच जो चाहत बढ़ी है, उसे ध्यान में रखते हुए बिजली कंपनी ने भी पास इलाकों के ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाना शुरू कर दी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें।
हर साल बिजली कंपनी के टेरिफ में बढ़ोतरी हो रही है। जो बड़े उपभोक्ता हैं, उनके यहां एसी का अधिक उपयोग होने लगा है, जिससे भारी भरकम बिल हो गया है। उन्होंने औसतन आठ रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल भरना पड़ता है। इस बिल से छुटकारा पाने के लिए लोग सोलर रूफ टाप लगवा रहे हैं। शहर के 2000 लोगों ने सोलर रूफ टाप लगवाया है। सोलर रूफ टाप के वेंडर अर्पित कटारे बताते हैं कि अब लोग खुद से इस ओर आकर्षित हुए हैं। शहर की पाश कालियों में रहने वाले लोगों में इसकी चाहत ज्यादा है, क्योंकि इनके यहां एसी की खपत के कारण बिल अधिक आता है।
इतनी बिजली बनाते हैं सोलर रूफ टाप
1 किलोवाट- 4 से 5 यूनिट प्रतिदिन
5 किलो वाट- 20 से 25 यूनिट प्रतिदिन
10 किलोवाट- 45 से 50 यूनिट प्रतिदिन
इतनी जगह की जरूरत
1 किलोवाट का सोलर रूफ टाप लगाने के लिए 80 फुट जगह की जरूरत होती है।
5 किलोवाट के लिए 500 फुट की जरूरत होती है।
10 किलोवाट के लिए 800 फुट की जरूरत होती है।
एक बार सोलर लगने के बाद 25 साल तक बिजली देता है।
इस फायदे को भी देख रहे लोग
– सोलर रूफ टाप अब ऊंचाई पर लगाया जा रहा है, जिससे छत का उपयोग बंद नहीं होता है। गर्मियों में छत ठंडी रहती है। छांव होने से ठंडी गर्म नहीं हो पाती है।
– यह पर्यावरण के लिए अच्छा है। 12 घंटे तक खुद की बिजली बनाते हैं तो पावर प्लाटों से लोड कम होगा।
– बिजली का बिल शून्य हो जाता है। एक बार ही जेब पर भार आता है, उसके बाद 25 साल तक बिल भरने के झंझट से मुक्ति है।


