“पप्पू” और “चौकीदार” मेंउलझेरहेपार्षद 27 संशोधनोंपरबहस, 24 हुएस्वीकृत

लोकमातसत्याग्रह/शहर की संसद कहलाने वाली नगर निगम परिषद में बजट के संशोधन प्रस्तावों पर बहस के बीच कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बिजनेसमैन गौतम अडानी तक के नाम गूंजे। भाजपा पार्षद ब्रजेश श्रीवास ने बहस के दौरान पप्पू और आलू से सोना बनाने जैसे शब्दों का प्रयोग किया तो कांग्रेस पार्षदों ने चौकीदार और 20 हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके चलते बैठक को बुधवार दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगति कर दिया गया। इससे पहले बजट में लगाए गए 47 संशोधन प्रस्तावों में से 27 पर चर्चा की गई, जिनमें से 24 को स्वीकृत कर लिया गया। इस दौरान महापौर की मौलिक निधि आठ की बजाय छह करोड़ व सभापति की निधि पांच करोड़ करने के साथ ही पार्षदों की निधि 65-65 लाख करने की स्वीकृति दी गई।

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए महापौर शोभा सिकरवार द्वारा प्रस्तुत 2128 करोड़ के बजट पर निगम परिषद जलविहार में दोपहर 12 बजे से चर्चा शुरू हुई। संशोधन प्रस्तावों में सबसे पहले मौलिक निधियों को लेकर चर्चा की गई। इसमें भाजपा पार्षदों ने आपत्ति जताई कि महापौर ने अपनी मौलिक निधि पांच से बढ़ाकर आठ करोड़ प्रस्तावित की है, जबकि सभापति की निधि छह करोड़ रुपये ही की है। इस पर नेता प्रतिपक्ष हरी पाल ने कहा कि सभापति मनोज तोमर ने पार्षद दल की बैठक में खुद आगे बढ़कर अपनी निधि पांच करोड़ करने का प्रस्ताव रखा था। ऐसे में महापौर की निधि भी कम की जानी चाहिए। इसके चलते एमआइसी सदस्य अवधेश कौरव ने कहा कि महापौर की निधि को छह करोड़ रुपये कर दिया जाए। इस पर परिषद में सहमति बन गई। इसके बाद स्वेच्छानुदान की राशि का प्रविधान शासन द्वारा समाप्त करने का मामला सामने आने पर इस प्रस्ताव को होल्ड कर शासन से मार्गदर्शन लेने का फैसला किया गया। पार्षद निधि में निर्माण कार्य के साथ ही जनसुविधा के लिए विभिन्न सामग्री क्रय करने को भी शामिल करते हुए प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। वार्ड समितियों की राशि को भी 15 से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया।

बहस के दौरान ये बोले पार्षद

– मोहित जाट : अमृत योजना में 812 करोड़ खर्च होने के बाद भी पाइपलाइन फूट रही हैं। अधिकारियों ने चैंबर में बैठकर योजना बनाई और पार्षदों से पूछा भी नहीं कि कहां काम होने हैं।

– अनिल सांखला : केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर और सांसद विवेक शेजवलकर के प्रयासों से पैसा आ रहा है। धरातल पर काम नहीं दिख रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाम नहीं है।

– नागेंद्र राणा : स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी हम मजाक के पात्र बन रहे हैं। ये मुंगेरीलाल के हसीन सपनों जैसा बजट है। इसमें सिर्फ अंकों का गणित खेला गया है।

– देवेंद्र राठौर : महापौर ने कहा था कि जल कर माफ कर देंगे, लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं है। निगम को आय के स्रोत बढ़ाने होंगे। बोट क्लब में आय से अधिक खर्च हो रहा है।

– अपर्णा पाटिल : अमृत दो में 917 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। इसकी डीपीआर तैयार करते समय पार्षदों को भी शामिल किया जाए। तीनों विधानसभा क्षेत्रों को एक नजर से देखा जाए।

– देवेंद्र आर्य : अमृत योजना की पाइपलाइन बदलने के बाद सड़क नहीं बनाई जा रही है। टिपर वाहन कचरा कलेक्शन के लिए नहीं आते हैं। अधिकारी हर बार बहाने बनाते हैं। –

– हरीपाल : अभी तक विपक्ष ने शराफत का परिचय दिया है, लेकिन सफाई, स्ट्रीट लाइट सहित अन्य कार्यों में तमाम अनियमितताएं हैं। इन्हें सुधारने की जरूरत है।

मंत्रियों के दखल के मुद्दे पर हुआ हंगामा

चर्चा के दौरान जैसे ही भाजपा पार्षदों ने महापौर को घेरना शुरू किया, वैसे ही एमआइसी सदस्य अवधेश कौरव ने कहा कि निगम में मंत्रियों का दखल है। मंत्रियों के दखल के कारण ही पार्षदों के काम नहीं हो रहे हैं। मंत्री अब निगम पर दबाव बनाते हैं। यह सुनते ही भाजपा पार्षदों ने भी हंगामा शुरू कर दिया और दोनों दलों के पार्षद आसंदी के सामने तक पहुंच गए। इसके चलते सभापति ने एक घंटे के लिए सदन स्थगित कर दिया।

साधारण चर्चा में बोला विपक्षकेंद्र राज्य के अनुदान का है बजट

सदन की कार्रवाई शुरू होने पर सभापति मनोज तोमर ने सबसे पहले साधारण चर्चा कराई। इस दौरान भाजपा पार्षदों ने 2128 करोड़ रुपये के बजट पर सत्ता पक्ष को घेरा। पार्षदों का कहना था कि यह बजट सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी है और केंद्र व राज्य सरकार के अनुदान को शामिल कर इसे इतना बड़ा बना दिया गया है। पार्षदों ने फिर अमृत योजना के साथ ही स्ट्रीट लाइट व साफ-सफाई की समस्या के मुद्दे उठाए। बजट की कापी के पेज क्रमांक 58-59 के एक जैसे होने पर भाजपा पार्षदों ने जमकर खिंचाई की। इसके साथ ही आरोप लगाए कि महापौर सिर्फ कांग्रेस के पार्षदों का ख्याल रखती हैं।

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