लोकमतसत्याग्रह/विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी एक्टिव हो गए हैं। तीन दिन पहले राजभवन ने तकनीकी शिक्षा विभाग से ऐसे जनजातीय (ट्राइबल) युवाओं की जानकारी मांगी है, जिन्होंने मप्र के शिक्षण संस्थानों में पढ़कर अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता हासिल की है। ये डॉक्टर हो सकते हैं, इंजीनियर, समाजसेवी, खिलाड़ी, कला या इंटरप्रिन्योर (उद्यमी) या कोई और क्षेत्र हो सकता है, जिसमें वे आगे बढ़े हों।
इस टैलेंट को राजभवन इकट्ठा करना चाहता है, जिससे पहले राज्यपाल मिलेंगे। बाद में इनका वॉट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा और ई-मेल से जोड़ा जाएगा। युवाओं की यह सारी जानकारी स्वशासी या अनुदान प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेज और स्वशासी, सरकारी या महिला पॉलिटेक्निक कॉलेजों से मांगी गई है। शर्त यह है कि ये वही छात्र होने चाहिए, जिन्होंने भाजपा सरकार के शासनकाल यानी पिछले 15 वर्षों में नियमित पाठ्यक्रम से पढ़ाई की हो। या फिर स्वरोजगार योजना के तहत पाठ्यक्रमों को पूरा करके ऊंचाई पर पहुंचे हों।
- सफल युवाओं के जरिये जनजातीय वर्ग तक अपनी बात पहुंचा सकेगी सरकार
- शर्त- इन युवाओं ने भाजपा शासनकाल के दौरान पढ़ाई या स्वरोजगार किया हो
पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य भेजेंगे सूची
राजभवन ने यह जानकारी 13 मई तक सरदार वल्लभभाई पटेल पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य को भेजने के लिए कहा है। प्राचार्य ही यह जानकारी राजभवन को भेजेंगे। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने छह साल पहले ही जनजातीय मंत्रालय में ‘टेलेंट पूल’ स्कीम चालू की है। इसमें शामिल युवाओं से सरकार बात करती है। इसी के तहत यह लिस्ट तैयार की जा रही है। बाद में इस टैलेंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अन्य कोई और सीधे बात कर सकेंगे। इन इंफ्लूएंसर के जरिए सरकार अपनी बात को जनजातीय वर्ग तक पहुंचा सकेगी।
अजा–ओबीसी के साथ सामान्य वर्ग पर भी ध्यान
राजभवन ने अनुसूचित जाति (अजा), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों की भी अलग से सूची मांगी है। इनके लिए भी कहा गया है कि वे पिछले 15 वर्षों में नियमित पढ़ाई करके सफल होने वाले हों। तकनीकी शिक्षा विभाग को यह जानकारी भी 23 मई तक भेजनी है। विभाग के अतिरिक्त संचालक व कार्यालय प्रमुख डॉ. मोहन सेन ने सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को कहा है कि तत्काल यह जानकारी राजभवन भेजें।
जनजातीय सेल भी खोली गई है राजभवन में
यह स्पष्ट है कि मंगुभाई पटेल जनजातीय वर्ग में लंबे वक्त से काम कर रहे हैं। मप्र का राज्यपाल बनने के बाद उन्होंने राजभवन में एक जनजातीय सेल भी खोला है। इसकी जिम्मेदारी पूर्व आईएएस दीपक खांडेकर को दी गई है, जो केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय से ही रिटायर हुए थे। अब खांडेकर मप्र में काम कर रहे हैं। हाल ही में ‘पेसा’ नियम में जनजातीय सेल की राय को तवज्जो दी गई थी। अब सफल किस्से मिलने के बाद उन्हें बड़े पैमाने पर सामने लाया जाएगा।


