लोकमतसत्याग्रह/1000 बिस्तर का अस्पताल मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सोमवार को मरीज टॉयलेट के लिए परेशान हो रहे थे। इसकी वजह यह थी कि सी-ब्लॉक की तीसरी मंजिल पर संचालित मेडिसिन,सर्जरी वार्ड सहित कई विभाग ऐसे थे, जहां एक ही टॉयलेट संचालित है। लिहाजा महिला और पुरुषों को एक ही टॉयलेट का उपयोग करना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है, जब 11 मई को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 15 दिन में अस्पताल की सभी कमियों को पूरा करने के निर्देश दिए थे।
उनके निर्देश को 18 दिन हो चुके हैं, लेकिन स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। न तो टॉयलेट ही साफ हो रहे हैं और न ही दीवारों पर पड़ी दरारों को पूरी तरह से भरा गया है। सिर्फ उन हिस्सों की दरारें भर दी गई हैं, जहां से लोग अधिक आते जाते हैं। इतना ही नहीं अधिकांश टॉयलेट गंदे पड़े हुए हैं। इतना ही नहीं सी-ब्लॉक के जिस टॉयलेट में गंदगी देखकर कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह नाराज हुए थे, वहां सोमवार को भी गंदगी थी।
महिला और पुरुषों के लिए नहीं है भर्ती की कोई अलग व्यवस्था
महिला-पुरुषों को अलग-अलग वार्डों में भर्ती करने के लिए 1000 बिस्तर के अस्पताल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सी-ब्लॉक में मेडिसिन और सर्जरी के चार-चार वार्ड संचालित हैं। सभी वार्डों में महिला और पुरुष एक ही साथ भर्ती किए जा रहे हैं। जबकि पहले केआरएच में केवल महिलाएं ही भर्ती की जाती थीं।
जल्द निर्णय लिया जाएगा
“वार्डों में महिलाओं और पुरुषों के टॉयलेट अलग–अलग बने हुए हैं यह मालूम किया जाएगा कि एक ही टॉयलेट का उपयोग क्यों हो रहा है? महिला और पुरुषों को भर्ती करने को लेकर विभागाध्यक्षों से बात कर जल्द निर्णय लिया जाएगा।“
–डॉ. अक्षय निगम, डीन, जीआरएमसी


