16 करोड़ के अनुदान को खर्च करने जेयू के पास बचा सिर्फ एक दिन

लोकमतसत्याग्रह/शासन द्वारा जीवाजी विश्वविद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए मिले 16 करोड़ रुपए के अनुदान को लेप्स होने से बचाने के लिए विश्वविद्यालय के पास सिर्फ एक दिन शेष बचे हैं। लेकिन प्रक्रिया बढ़ने की बात करें तो जीवाजी विश्वविद्यालय अभी तक टेंडर भी नहीं कर पाया है इससे स्पष्ट होता है कि अनुदान की यह राशि उपयोग में आ पाना मुश्किल है। जीवाजी विश्वविद्यालय को इस प्रक्रिया में न सिर्फ टेंडर ओपन करने हैं बल्कि बिट फाइनल करने के बाद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अंतर्गत मंगाई जाने वाली मशीनरी का आर्डर भी देना है जो 1 दिन के भीतर होना संभव नहीं है। संभव है कि अनुदान की राशि लेप्स हो जाए।

बता दें की जीवाजी विश्वविद्यालय के कॉमर्स एंड मैनेजमेंट, बॉटनी एंड माइक्रो बॉयोलॉजी, लाइब्रेरी एंड इनफॉर्मेशन साइंस,हिस्ट्री,फिजिक्स, कैमिस्ट्री, जूलॉजी और प्लेसमेंट सेल को उत्कृष्ट बनाने के लिए 16 करोड़ 5 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की है। विश्व बैंक पोषित मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन परियोजना के अंतर्गत जारी होने वाली इस राशि से विवि में सेंटर फॉर एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसमें आठ विभागों को शामिल किया गया है। प्रशासकीय स्वीकृति में इन सभी विभागों के लिए अलग-अलग बजट का प्रावधान किया गया है। परियोजना के जरिए चिन्हित विभागों में फर्नीचर, इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-लाइब्रेरी, लाइब्रेरी में जर्नल्स, राष्ट्रीय एवं अंतर राष्ट्रीय कॉफ्रेंस और स्टडी टूर आदि गतिविधियां की जाएंगी।

लापरवाही बरती जा रही है जेयू में

जीवाजी विश्वविद्यालय में हर जगह लापरवाही बरती जा रही है। चाहे बीएड कालेज की संबंद्धता की जांच का मामला हो या फिर अन्य मामले। ऐसे में जेयू के प्रबंधन पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में यदि अब अनुदान की राशि लैप्स होती है तो विश्वविद्यालय को झटका लगेगा, साथ ही जेयू के विकास कार्य भी लटक जाएंगे।

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