लोकमतसत्याग्रह/जबलपुर के तीन लड़के आईएसआईएस के चक्कर में पड़ गए। उन्हें आतंक की राह पर कश्मीर का नियाज लाया था, लेकिन उनके दिलो-दिमाग में हिंदुओं और हिंदुस्तान के लिए जिसने नफरत भरी, वो कोई इंसान नहीं, कोई धार्मिक किताब नहीं, नफरत फैलाने वाली मंथली मैग्जीन है। इसे पढ़कर दुनिया के कई बंदे आतंक की राह पर चल पड़े। इस मैग्जीन का नाम ‘सावत-अल-हिंद’ यानी ‘वॉइस ऑफ हिंद’ है।
इसमें हिंदुओं और हिंदुस्तान को नुकसान पहुंचाने वाले लेख और तस्वीरें हैं। ये वो मैग्जीन है, जो अफगानिस्तान में तैयार होकर कश्मीर के रास्ते चोरी छिपे भारत आती है। उन मासूमों को बांटी जाती है, जिनका आतंकी बनाए जाने के लिए ब्रेन वॉश किया जाता है। इसमें ये लिखा है कि हिंदुओं की कॉलोनी में जाकर कोरोना फैलाओ। इस्लाम में भरोसा रखने वालों का कोरोना कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
पिछले महीने आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया ) टेरर-फंडिंग मामले में जबलपुर से तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। मध्यप्रदेश एटीएस ( एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक जॉइंट ऑपरेशन के तहत 26 – 27 मई को जबलपुर में छापेमारी कर टेरर फंडिंग के आरोप में तीन युवकों को गिरफ्तार किया था।
पाकिस्तान में छपकर भारत आती है मैग्जीन
जांच में आतंकी संगठन आईएसआईएस के मॉड्यूल का खुलासा हुआ था। मामले में एनआईए ने मुख्य आरोपी आदिल खान (20) और उसके दोस्तों मोहम्मद शाहिद (19) व सैयद मामुर अली (28) को गिरफ्तार किया था। तीनों को आतंक की दुनिया में लाने वाला कश्मीर का आतंकी आमिर उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी है। पिछले साल अक्टूबर 2022 में एनआईए ने देशभर से 6 संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। उनमें आईएसआईएस का ‘आमिर’ उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी भी था। उमर निसार ‘सावत-अल-हिंद’ यानी ‘वॉइस ऑफ हिंद’ नाम से एक मैग्जीन चला रहा था। यह वो मैग्जीन है जो पाकिस्तान में तैयार होकर पाकिस्तान में छपकर कश्मीर के रास्ते भारत में आती है।
मैग्जीन का पहला एडिशन 2020 में उस दौरान आया जब राजधानी दिल्ली में सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) का विरोध चल रहा था। निसार उर्फ कासिम खुरासानी 2016 से जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सक्रिय है और भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए रसद की आपूर्ति, हथियार और विस्फोटक की खरीद और जम्मू-कश्मीर में आईएसआईएस कैडर की भर्ती करता था। गिरफ्तारी के बाद कासिम खुरासानी ने यह कबूला था कि सावत-अल-हिंद मैग्जीन पाकिस्तान में रेगुलर पब्लिश होती थी। वह सोशल मीडिया पर पाकिस्तान स्थित टीमों के संपर्क में था। उसने ग्राउंड पर अपनी एक सेना खड़ी कर दी थी जो सोशल मीडिया के जरिए आईएसआईएस के एजेंडे को फैलाती थी।
सिर तन जुदा जैसे फोटो दिखाकर भड़काने की कोशिश
हम वापस चलते हैं ‘वॉइस ऑफ हिंद’ मैग्जीन की तरफ जो नफरत फैलाने और भारत को तोड़ने का काम करती रही है। साल 2020 में दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए (Citizenship Amendment Act) लागू करने के विरुद्ध धरना प्रदर्शन चरम पर था। विवाद के चलते सांप्रदायिक हिंसा के बीच 24 फरवरी को ‘वॉइस ऑफ हिंद’ का पहला संस्करण भारत में आया था। इसे प्रकाशित करने की जिम्मेदारी अल-किताल मीडिया सेंटर ने ली थी जो आईएसआईएस का ही एक ऑनलाइन ग्रुप है। इस मैग्जीन का लक्ष्य भारतीय मुसलमानों को मोदी सरकार के खिलाफ भड़काना था। इसके कंटेंट से समझ आता है यह भारतीय युवाओं को आईएसआईएस में भर्ती करने का विज्ञापन थी।
यह भारतीय मुसलमानों से आईएसआईएस के जिहाद से जुड़ने के लिए खुला आमंत्रण था। इसे अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली और उर्दू में प्रकाशित किया गया। इसमें आईएसआईएस के गुर्गों की विचलित कर देने वाली तस्वीरें थीं, जिसमें बिना सेंसर किए सिर तन से जुदा जैसे फोटो हैं। ये वो लोग हैं, जिन्हें आईएसआईएस ने सबक सिखाने के बाद जान से मार दिया। कई तस्वीरों में गुर्गों ने हाथ में बंदूक पकड़ी है। ‘वॉइस ऑफ हिंद’ मैग्जीन के कुछ संस्करणों में हिंदुओं को सीधी चुनौती दी गई है। केवल भारत ही नहीं, बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका, रूस, अमेरिका को भी खुलेआम मिटाने की धमकी दी गई है।
अफगानिस्तान में तैयार होती थी वॉइस ऑफ हिंद
एनआईए के अनुसार ‘वॉइस ऑफ हिंद’ को कराची और इस्लामाबाद में ‘कॉल सेंटर जैसे सेटअप’ में आईएसआईएस के कथित थिंक टैंक तैयार करते थे। इसे अफगानिस्तान में बांटा जा रहा था। इसके बाद कश्मीर के रास्ते चोरी छिपे भारत में लाया जाता था। आईएसआईएस द्वारा भारत में एक नेटवर्क स्थापित किया गया। इसी नेटवर्क पर इसके वितरण और प्रचार की जिम्मेदारी है।
‘वॉइस ऑफ हिंद’ मैग्जीन के लिए अलग-अलग देशों- मालदीव, बांग्लादेश, भारत से अफगानिस्तान में कंटेंट मंगाया जाता था। मैग्जीन पाकिस्तान में तैयार होती थी। इसकी रिसर्च और लिखने के लिए अंग्रेजी में महारत वाले शाहिद और आदिल जैसे युवा लड़के-लड़कियों को रखा जाता था। ये ऐसे युवा होते थे जिन्हें टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया की अच्छी समझ भी होती है। इसके लिए कंटेंट की जिम्मेदारी कथित आतंकी थिंक टैंकों के पास ही होती थी। वॉइस ऑफ हिंद को अनजान ऑनलाइन संस्थाओं और चैनलों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाता था।
कम्युनिस्ट, क्रिश्चियन और सेक्युलर लोग मुसलमानों की मदद नहीं कर सकते
‘वॉइस ऑफ हिंद’ मैग्जीन के जरिए भारत में स्थापित लोकतंत्र को इस्लाम के खिलाफ बताया गया है। साथ ही इसमें प्रकाशित लेख से देश में हिंदू-मुस्लिम दंगे कराने की कोशिश की गई थी। उस समय भारत में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे थे, लेकिन कुछ अवसरों पर हिंदू- मुस्लिम दंगों की खबरें आने लगी थीं, जिसमें कई लोगों की मौत भी हुई। आईएसआईएस ऐसे दंगों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करता है। वह इसका प्रयोग अपने लिए समर्थन और पहुंच बढ़ाने के लिए करता है।
सीएए के दंगों के मामले में मैग्जीन में लिखा है बुतपरस्त हिंदू, मुसलमानों से जब तक खुश नहीं होंगे जब तक कि वे इस्लाम के दीन को पूरी तरह से छोड़ नहीं देते। सीएएए प्रोटेस्ट में नास्तिक, समाजवादी, कम्युनिस्ट, क्रिश्चियन और सेक्युलर लोग मुसलमानों की मदद नहीं कर सकते। अल्लाह ने गैर मुसलमानों को उनके धर्म की रक्षा करने के लिए नहीं भेजा है। हमें ही अपने भाइयों की रक्षा करनी होगी।
सुरक्षा एजेंसी और पुलिस पर हमला करने के तरीके बताए
अगले अंक में कोविड-19 महामारी के आईएसआईएस समर्थकों को सुरक्षा एजेंसी और पुलिस पर हमला करने के तरीके बताए हैं। मैग्जीन में कहा गया है कि अल्लाह पर विश्वास नहीं करने वाले लोगों को ही कोरोना होगा। ये बीमारी इस्लाम पर भरोसा रखने वालों के लिए खुश खबर है। जिन देशों में इस्लाम को नहीं माना जाता है, अल्लाह ने उन देशों में अराजकता फैलाने के लिए इस बीमारी को भेजा है।
इन देशों में कोरोना से लड़ने के लिए पुलिस और सेना दोनों सड़क पर है। मैग्जीन में अपील की गई है कि हर मुसलमान भाई और बहन, बच्चे भी इस बीमारी को फैलाएं। ये लोग गैर मुस्लिमों की कॉलोनियों में जाएं और वहां कोरोना फैलाएं। अगर आप ऐसा करते हो तो यह इस्लाम को बढ़ाने में मदद होगी। आप इस्लाम की राह पर हैं तो बेफिक्र रहिए कि कोरोना आपका बाल भी बांका नहीं कर सकेगा।
इतना ही नहीं इस मैग्जीन में मृत कश्मीरी आईएस आतंकवादी अबू हमजा अल-कश्मीरी का एक पुराना संदेश भी शामिल किया गया है। हमजा को 2018 में भारतीय सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।
इस संदेश में हमजा के हवाले से कहा गया है कि डेमोक्रेसी और राष्ट्रवाद झूठे हैं। तुम्हें अल्लाह की राह पर जिहाद करने के लिए आमंत्रित करता हूं। जो भी इस्लाम को मानने से मना कर दे उसे कत्ल कर दो। नौजवान आप विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी, पथराव से दूर रहें और पेट्रोल बम और चाकू जैसे वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल कर काफिरों को नुकसान पहुंचाओ। कश्मीर की बहनों को सलाह देना चाहेंगे कि वे विरोध प्रदर्शनों और जुलूसों से दूर रहें। अपने आपको घरों तक सीमित रखें और हिजाब को बनाए रखें। ‘इसके अलावा मैग्जीन में हिजाब विवाद और गोरखपुर मंदिर हमले पर लेख प्रकाशित किए हैं।
सोशल मीडिया विंग की मैग्जीन में तारीफ
आईएसआईएस ने अपने सोशल मीडिया विंग के बारे में संक्षिप्त में लिखा है कि आप लोग आईएसआईएस का प्रचार बढ़ाने में सराहनीय काम कर रहे हैं। तुम्हारा हर शब्द काफिरों के सीने में तीर की तरह है। हमारी 5 से अधिक वेबसाइट, 7 से ज्यादा किताबें, 8 से ज्यादा वीडियो, 15 से अधिक ऑडियो, 35 से अधिक इन्फोग्राफिक और 1500 से ज्यादा अन्य सामग्री इंटरनेट पर अपलोड हो चुकी है।
कौन है उमर निसार?
संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) से मिली जानकारी के अनुसार उमर नासिर इस्लामिक स्टेट हिंद प्रांत (ISHP) का अमीर या वालिया था। आईएसआईएस ने आईएसएचपी की घोषणा 2019 में की थी। इसे स्थापित करने का मुख्य लक्ष्य कश्मीर से केरला तक युवाओं को आईएसआईएस के लिए भर्ती करना था। एनआईए के मुताबिक उमर निसार आईएसआईएस के गुर्गों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में उनके संचालकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी था। उसकी गिरफ्तारी से पता चला कैसे आईएसआईएस भारत में मुस्लिम युवाओं को भारत के खिलाफ लड़ाई की योजना बना रहा था।
आईएसआईएस इंटरनेट के जरिए भारत में फैला रहा हैं जड़ें
इजराइल के हाइफा विश्वविद्यालय के गेब्रियल वीमन द्वारा किए गए एक अध्ययन में भी आतंक फैलाने के जरियों का पता चला है। इसके मुताबिक आतंकवादी समूह अपने संदेश फैलाने, भर्ती करने और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। इंटरनेट पर लगभग 90% संगठित आतंकवाद सोशल मीडिया के माध्यम से होता है। आतंकवादी संगठन जैसे आईएसआईएस सोशल मीडिया का इस्तेमाल इसलिए भी करता है, क्योंकि यह सस्ता है और इसके जरिए कई लोगों तक पहुंचा जा सकता है। सोशल मीडिया पर कोई फिल्टर या सेंसरशिप का कानून भी नहीं है, इसलिए बिना रुकावट किसी भी तरह का कंटेंट फैलाया जा सकता है।
टेलीग्राम और डार्क नेट करते हैं यूज, ताकि पकड़े न जाएं
हमने इस मामले में साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एक्सपर्ट रितेश भाटिया से बात की। रितेश कहते हैं कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने वाले अपराधी संपर्क के लिए टेलीग्राम और डार्क नेट का इस्तेमाल करते हैं। डार्क नेट का आईपी एड्रेस ट्रैक करना मुश्किल होता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए एक अलग ब्राउजर ‘टोर’ अनियन राऊटर लगता है। डार्कनेट की सामग्री एंक्रिप्टेड होती है। उसका आईपी ट्रैक करना बहुत कठिन है।
आप पाकिस्तान में भी बैठे हैं तो यह आपकी लोकेशन भारत या जर्मनी में दिखाएगा। इसको ट्रेस करना बहुत ही मुश्किल है। टेलीग्राम का इस्तेमाल भी बढ़ा है। टेलीग्राम के लिए आपको केवल एक नंबर की आवश्यकता है। उसके लिए किसी ई- मेल आईडी की जरूरत नहीं है। इसके लिए बहुत सारे डिस्पोजेबल नंबर ऑनलाइन आसानी से मिल जाते हैं और फिर चैटिंग कर सकते हैं। टेलीग्राम की प्राइवेसी सेटिंग भी अलग होती है।


