बीमा कंपनी को लोन की राशि भरने के साथ मानसिक क्षतिपूर्ति भी देनी होगी

लोकमतसत्याग्रह/जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमा कंपनी को होम लोन का भुगतान करने और पीड़िता को 25 हजार रुपये बतौर मानसिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी ने पति की मौत के बाद पत्नी को बीमा की राशि देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि पति को टीवी की बीमारी बीमा लेने से पहले थी और उसने बीमा लेते समय यह बात छिपाई थी, हालांकि बीमा कंपनी इस बात को आयोग के समझ साबित नहीं कर पाई।

यह था मामला

अधिवक्ता शिव शर्मा के अनुसार दीनदयाल नगर की रहने वाली राजाबेटी ने शहर की एक निजी बैंक के खिलाफ केस फाइल किया था। 31 दिसंबर 2019 को राजाबेटी के पति गंधर्व सिंह ने मकान बनाने के लिए एक निजी बैंक से आठ लाख रुपये का होमलोन लिया था। इसके साथ ही लोन की राशि की सुरक्षा के लिए उसी कंपनी से 15 साल के लिए आवेदक का बीमा करवाया गया, लेकिन लोन लेने के करीब डेढ़ साल बाद फरवरी 2020 में गंधर्व सिंह की तबियत खराब हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और एक माह बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। मार्च 2021 तक उनका इलाज चला और मई 2021 में गंधर्व सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। जब गंधर्व सिंह की पत्नी राजाबेटी ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो कंपनी ने यह कहकर किनारा कर लिया कि आवेदक को टीबी की बीमारी थी, लेकिन आवेदन करते समय इस बात को छिपाया गया, इसलिए बीमा निरस्त माना जाएगा। जब यह मामला आयोग के समक्ष आया तो बीमा कंपनी ने दावा किया कि आवेदक को बीमा लेने से पहले टीबी की बीमारी थी, जिसकी जानकारी उन्होंने छिपाई, लेकिनकंपनी इस बात को साबित नहीं कर पाई।

हालांकि जितने समय यह केस चला उतने समय तक मकान की किस्तें भी राजाबेटी ने भरी। सुनवाई के बाद आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नियमों के अनुसार बीमा कंपनी को ही लोन की शेष राशि का भुगतान करना होगा। साथ ही लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु से लेकर आज दिनांक तक जितनी भी किस्तें आवेदक पक्ष ने भरी हैं वह उन्हें बीमा कंपनी ही लौटाएगी। इसके अलावा 10 हजार रुपये वाद व्यय और 25 हजार रुपये बतौर मानसिक क्षतिपूर्ति भी देनी होगी।

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