लोकमतसत्याग्रह/लालढांग में बाल साहित्य और सामाजिक सरोकार ‘ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। तीन दिवसीय इस संगोष्ठी का आयोजन बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा के अध्यक्ष श्री उदय किरोला जी द्वारा किया गया। प्रतिवर्ष जून माह में इस संस्थान द्वारा साहित्य संगोष्ठी आयोजित की जाती रही हैं।
इस अवसर पर देश भर में प्रकाशित लगभग 28 बाल पत्रिकाओं की प्रदाशनी लगाई गई।
11 पुस्तकों का लोकार्पण। बाल कवि सम्मेलन में 22 बच्चों ने पढ़ी स्वरचित कविता।
11 राज्यों के 100 साहित्यकारों की सहभागिता।
लालढांग (हरिद्वार )। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास लालढ़ांग तथा अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी व बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा लालढांग में आयोजित राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया ।
संगोष्ठी की शुरुआत ‘ज्ञान का दीया जलाने’ समूह गीत से हुई । ‘उत्तराखंड का बालसाहित्य ‘ विषय पर आयोजित सत्र में मुख्य अतिथि राजकिशोर सक्सेना ,के पी एस अधिकारी ,हरिमोहन,आनंदसिंह बिष्ट , प्रमोद तिवारी आदि ने संबोधित किया । अध्यक्षता के पी एस अधिकारी व संचालन डॉ महेंद्र प्रताप पांडे ‘नंद’ ने किया।
‘बालसाहित्य और सामाजिक सरोकार ‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी से पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास के बच्चों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया । इस अवसर पर आयोजित बाल कवि सम्मेलन में 22 बच्चों ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया। बाल कवि सम्मेलन का संचालन करनपाल व उत्तम ने किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास के अधीक्षक योगेश्वर सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए छात्रावास के बारे में जानकारी दी ।
इस अवसर पर 11 पुस्तकों का लोकार्पण हुआ । बालप्रहरी व बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा देश की 85 दुर्लभ बाल पत्रिकाओं की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास लालढ़ांग के बच्चों द्वारा तैयार हस्तलिखित पुस्तकों व अन्य रचनात्मक गतिविधियों की प्रदर्शनी को सभी ने सराहा।
सायंकालीन सत्र में हरदेव सिंह की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी हुई
इस अवसर पर देश के नामचीन बाल साहित्यकारों ने कविता पाठ किया। उत्तराखंड के अतिरिक्त राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार तथा सिक्किम सहित देश के लगभग सभी राज्यों से आए कवियों ने अपनी प्रतिनिधिधि कविता पढ़कर सभी का मन मोह लिया। जोधपुर से आमंत्रित कवयित्री अर्चना त्यागी ने भी अपनी एक कविता ” एक दिन मंज़िल मिल जायेगी” पढ़कर अनवरत चलते रहने की प्रेरणा दी।


