लोकमतसत्याग्रह/ग्वालियर नगर निगम ने आगजनी की अवस्था में शहर के हॉस्पिटल, नर्सिंग होम में आग बुझाने के क्या-क्या साधन हैं और कितना ट्रेंड स्टाफ है इसके लिए निरीक्षण किया है। रविवार को 20 अस्पताल ऐसे पाए गए जहां ना तो अग्निशमन व्यवस्था पूर्ण मिली न ही उनका व्यवहार सहयोग वाला नजर आया। जिस पर तत्काल नगर निगम आयुक्त की ओर से इन 20 हॉस्पिटल व नर्सिंग होम्स को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही सात दिन के अंदर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने के हालात में संस्थान को सील कर संचालक पर FIR दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश की राजधानी भोपाल के सतपुडा भवन में आगजनी की घटना के बाद राजधानी से आए आदेश के बाद नगर निगम ग्वालियर लगातार शहर के प्रमुख हॉस्पिटल, नर्सिंग होम्स, कोचिंग सेंटर सहित अन्य ऐसे संस्थान जहां लोगांे का आना जाना है वहां अग्निशमन व्यवस्था का जायजा ले रही है। हर दिन 20 से 25 संस्थानों को चिन्हित कर दमकल दस्ते की टीम यह निरीक्षण करती है। इसी क्रम में रविवार को उपायुक्त नगर निगम दमकल दस्ता डॉ. अतिबल सिंह यादव के नेतृत्व में टीम ने 20 हॉस्पिटल, नर्सिंग होम्स का निरीक्षण किया है। जब टीम यहां निरीक्षण के लिए पहुंची तो एक भी संस्थान में आग बुझाने के उपकरण या व्यवस्था दुरुस्त नहीं मिली है। जिसकी सूचना उपायुक्त ने अफसरों को दी है।
इन 20 हॉस्पिटल, नर्सिंग होम में मिली कमी, जारी हुए नोटिस
उपायुक्त डॉ. अतिबल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर निगम आयुक्त हर्ष सिंह के निर्देशानुसार अग्निशमन व्यवस्था पूर्ण न करने वाली संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उसमें शहर के विभिन्न 20 नर्सिंग होम एवं हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया गया है। जिनमें शांता नर्सिंग होम ,राठी हॉस्पिटल दीवान नर्सिंग होम ,वरदान हॉस्पिटल गौड़ हॉस्पिटल, न्यू सरस्वती हॉस्पिटल, रॉयल हॉस्पिटल, स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल, मूंदड़ा नर्सिंग होम ,चिरायु नर्सिंग होम, जोशी नर्सिंग होम, सराफ हॉस्पिटल, विचेर कुमारी मेमोरियल हॉस्पिटल, अंकुर हॉस्पिटल, आशा हॉस्पिटल, सार्थक हॉस्पिटल, आयुष हॉस्पिटल, प्रताप हॉस्पिटल, दंदरौआ धाम हॉस्पिटल एवं अपूर्वा हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया गया।
सात दिन में व्यवस्था पूरी नहीं तो FIR
नगर निगम ने नोटिस में इन संस्थानों को सात दिन का नोटिस दिया है। सात दिन में यह अग्निशमन व्यवस्था को दुरुस्त नहीं करते हैं और नोटिस का जवाब नहीं देते हैं तो इनको सील करने की कार्रवाई के साथ ही मामला दर्ज कराने पुलिस से संपर्क किया जाएगा, क्योंकि इन संस्थानों में हर दिन हजारों लोग आते हैं और आगजनी की स्थिति में उनकी जान को खतरा है।


