लोकमतसत्याग्रह/देश भर में स्मार्ट सिटी का 8वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। ग्वालियर में भी स्मार्ट सिटी दो दिन आयोजन कर रही है। परन्तु इन आठ सालों में स्मार्ट सिटी की नोन स्मार्ट सिटी प्लानिंग शहरवासियों को अधिकांश सपने दिखाती रही है। धरातल पर जो लाया गया, वह परेशानी का सबब ज्यादा बन गया।
1000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट में अभी तक 510 करोड़ के काम हो पाए और एक साल में 490 करोड़ के कामों को पूरा करना है। आठ साल के दौर में शहरवासियों से स्मार्ट पार्किंग और पब्लिक बाइक शेयरिंग की सुविधा छीन ली गई। सूत्र सेवा में खास तौर से सिटी बस सेवा अफसर, बस ऑपरेटर से चलवा नहीं सके। शहर के अंदर स्मार्ट रोड बनाने का सपना दिखाया गया। मॉडल के रूप में वीर सावरकर मार्ग, आमखो और राजपाएगा को तैयार किया गया। अभी-भी यह काम 100 प्रतिशत पूरे नहीं सके। महाराज बाड़ा का पेडस्ट्रीयन जोन प्लानिंग के विपरीत बनाकर जनता को परेशानी में डाल दिया गया। अफसरों ने इमारतों पर फसाड वर्क और लाइटिंग कराकर चेहरा चमका दिया। अब काम नहीं कर पाने की स्थिति में स्मार्ट सिटी अपना पैसा नगर निगम, हॉर्टिकल्चर जैसे विभागों को देकर बजट खत्म करने की तैयारी में है।
ये सेवाएं पूरी होने पर उपयोगी नहीं बनी
- पब्लिक बाइक शेयरिंग– 50 साइकिल स्टैंड और 500 साइकिलें चलना थी। अफसर जिम्मेदार कंपनी की मॉनीटरिंग ठीक से नहीं कर सके। आखिर में प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया। अब साइकिलें स्टैंड पर धूल खा रही हैं।
- सूत्र सेवा– स्मार्ट सिटी ने 16 सिटी बस और 16 इंटर सिटी बसें (सूत्र सेवा)चलाने की जिम्मेदारी नीरज ट्रेवल्स को दी है। अभी तक 32 बसें कंपनी नहीं ला सकीं। सिटी बस चलाने के लिए आयुक्त और सीईओ के प्रयास भी काम नहीं आए।
- स्मार्ट पार्किंग– शहर में 22 स्थानों पर स्मार्ट पार्किंग बना थी। जिम्मेदार कंपनी ने कुछ बनाई। शेष कागजों में रहीं। यहीं नहीं फर्जी तरीके से भी पार्किंग चलती मिलीं। यह प्रोजेक्ट भी बंद हो गया।
- वीएमएस बोर्ड– तीन करोड़ रुपए खर्च कर 10 स्थानों पर वीएमएस बोर्ड लगाए गए थे। सपना दिखाया गया कि लाइव ट्रैफिक अपडेट, वेदर फोरकास्ट, पॉल्यूशन की जानकारी और नई-नई सूचना देनी थी। ये पिछले दो साल से बंद पड़े हुए हैं।
- कंट्रोल कमांड सेंटर– यहां पर आईटी का काम बेहतर हुआ। लेकिन सिविल वर्क अभी तक पूरा नहीं सका। मोतीमहल की इमारत में अभी-भी दरारें, पत्थर निकले हुए, लकड़ी के गेट पर पॉलिश तक नहीं हुई।
- एलईडी प्रोजेक्ट– स्मार्ट अफसरों ने अपनी सीआर बनाने के लिए नगर निगम से प्रोजेक्ट छीन लिया था। 62 हजार से ज्यादा एलईडी प्रोजेक्ट पर 22 करोड़ रुपए खर्च किए गए। लेकिन जनता परेशान होती रही। अब 25 करोड़ रुपए ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस पर खर्च होंगे।


