केंद्र ने राज्य सरकार को दिया अल्टीमेटम:केंद्र से मिली राशि में से 75% खर्च नहीं हुई तो अगली किस्त रुकेगी

लोकमतसत्याग्रह/केंद्र की सहायता से चल रही (सीएसएस) योजनाओं में 75 प्रतिशत से कम राशि खर्च होने पर अगली किस्त का भुगतान रोक दिया जाएगा। यानी 100 करोड़ रुपए में से 76 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे, तभी केंद्र से अगली किस्त का भुगतान होगा। प्रदेश में 28 से ज्यादा ऐसी योजनाएं हैं जिनमें केंद्र सरकार अनुदान देती है। इनमें से एक ही योजना के अंतर्गत कई योजनाएं चल रही हैं।

इस प्रकार की सभी योजनाओं की संख्या 200 के करीब हैं। इन योजनाओं के लिए इस साल केंद्र से 44113 करोड़ रुपए की राशि मिलना है। पिछले साल यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च 2023 तक इन योजनाओं के संचालन के लिए 37488 करोड़ रुपए की राशि मिलनी थी, जिसमें से 7107 करोड़ रुपए कम मिले।

दरअसल, 23 मार्च 2022 के पहले तक केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि को राज्य की संचित निधि में जमा कर लिया जाता था, जिससे इन योजनाओं के संचालन में खर्च का सही ब्योरा सामने नहीं आ पाता था। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र की ओर से राज्य सरकार को निर्देश जारी कर कहा गया कि हर एक डिपार्टमेंट का एक एसएनए अकाउंट होगा। इस खाते में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60 अनुपात 40 को रखा जाएगा। इसमें राज्य के हिस्से की 40 प्रतिशत राशि होना तो जरूरी होगा ही, केंद्र से मिलने वाली 60 प्रतिशत राशि का जब तक 75 प्रतिशत खर्च नहीं होती, तब तक अगली किस्त जारी नहीं की जाएगी।

इनमें मिलनी है राशि

  • पीएम आवास योजना में इस साल 3500 करोड़ रुपए ज्यादा मिलना हैं। प्रदेश में अभी 2 लाख 75 हजार मकानों का बनाए जाने के लिए 5 हजार करोड़ रुपए की जरूरत।
  • अफोर्डेबल स्कीम के तहत बनने वाले 1 लाख मकानों में से 50 हजार बन चुके हैं। बाकी के लिए 900 करोड़ की जरूरत।
  • ऑपरेशन कायाकल्प के लिए 800 करोड़ की जरूरत, जिसकी पूर्ति सीएसएस से होगी।
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सड़कों के लिए 1200 करोड़ रुपए की जरूरत।
  • बालिकाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के मानदेय का 350 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा सकेगा।
  • समग्र शिक्षा अभियान में गणवेश वितरण और अन्य कार्यक्रमों के संचालन के लिए राशि।

वित्त विभाग ने लिखा पत्र
इस मामले में भारत सरकार ने निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद वित्त विभाग ने सभी विभागों को पत्र लिखा है। केंद्र के सामने यह बात भी आई है कि इस तरह की योजनाओं के संचालन में राज्यों का लचीलापन सामने आया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इस बारे में विभाग से संज्ञान लेने को कहा है।

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