लोकमतसत्याग्रह/भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के विश्वस्त और कई चुनावों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने वाले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी बनाया है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो निश्चित तौर पर इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी करीब हैं। यह दोनों ही नेता चुनावों की दृष्टि से मध्य प्रदेश के नेताओं और केंद्रीय नेताओं के बीच तालमेल बिठाने का काम करेंगे और साथ ही राज्य में जरूरत के मुताबिक संसाधन मुहैया कराएंगे।
भाजपा आम तौर पर विधानसभा चुनावों की घोषणा होने से एक-दो महीने पहले प्रदेश में चुनाव प्रभारी नियुक्त करती है। इस बार चुनावों से चार महीने पहले नियुक्ति कर विपक्षी पार्टियों को चौंका दिया है। यह नियुक्तियां इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को चुनावी प्रबंधन का लंबा-चौड़ा अनुभव है। 2013 से वह यह काम कर रहे हैं। 2013 में उन्होंने राजस्थान के विधानसभा चुनावों में सह-प्रभारी की भूमिका निभाई और उसके बाद तकरीबन हर बड़े राज्य में प्रभावी तरीके से पार्टी को बड़ी सफलता दिलाई है। 2014 में झारखंड में सह-प्रभारी और उसके बाद गुजरात विधानसभा चुनावों में प्रभारी रहे। 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भी प्रभारी थे और शिवसेना के साथ तालमेल बिठाकर गठबंधन को स्पष्ट बहुमत के पार ले गए थे। यह बात अलग है कि नतीजों के बाद उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद के लिए अड़ गए और गठबंधन टूट गया। फिर बिहार में 2020 में भी भाजपा ने नीतीश के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और गठबंधन ने जीत हासिल की थी। उस समय भी जीत का सेहरा चुनाव प्रभारी के नाते भूपेंद्र यादव के सिर बंधा था।
राजस्थान से आते हैं भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव
भूपेंद्र यादव राजस्थान के अजमेर के रहने वाले हैं। सरकारी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। 54 वर्षीय भूपेंद्र यादव सुप्रीम कोर्ट के वकील भी हैं। 2009 तक अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद में महासचिव रहने के बाद 2010 में उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। राजस्थान से ही 2012 में पहली बार और 2018 में दूसरी बार राज्यसभा गए। 2014 में उन्हें अमित शाह के अध्यक्षीय कार्यकाल में ही पार्टी का महासचिव बनाया गया था। 2018 में वे दोबारा राज्यसभा के लिए राजस्थान से भेजे गए। इस समय उनके पास केंद्रीय वन एवं पर्यावरण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भी हैं। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को चुनाव सह-प्रभारी बनाया गया है। वे भी जन्म से राजस्थानी ही हैं। पार्टी के संगठन कार्यों में उनका अनुभव भले ही कम हो, लेकिन वंदे भारत ट्रेनों को शुरू करने से लेकर रेलवे को नई दिशा देने में उन्होंने महती भूमिका निभाई और अपनी प्रबंधकीय क्षमता को जाहिर किया है। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास मंत्रियों में गिना जाता है।
भाजपा में क्या है चुनाव प्रभारी की भूमिका
चुनाव प्रभारी संगठन के कामकाज में बहुत ज्यादा दखल तो नहीं देते, लेकिन यह केंद्रीय नेतृत्व की आंख, कान और नाक का काम करते हैं। भाजपा में राज्य के संगठन स्तर पर प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही संगठन महामंत्री की भूमिका अहम होती है। इन प्रमुख लोगों को केंद्रीय नेतृत्व से अवगत कराना और आवश्यकता के अनुसार उन तक केंद्र का मार्गदर्शन पहुंचाना चुनाव प्रभारी के जिम्मे होता है। मुख्य रूप से राज्य में चुनावी कामकाज के लिए वित्तीय जरूरतों को पूरा करने की बात हो या जमीनी परिस्थितियों के अनुसार किसी बड़े नेता की सभा करने की जरूरत, यह तय करना चुनाव प्रभारी के जिम्मे होता है। इसके अलावा स्थानीय स्तर की गुटबाजी को दूर करने के प्रयास, टिकट वितरण से उपजा असंतोष दूर करने के लिए किए जाने वाले उपाय, केंद्र की गाइडलाइन को अमल में लाने के लिए किए जा रहे प्रयास, सब कुछ चुनाव प्रभारी की देखरेख में होता है।


