इन्वेस्टिगेशन में छोटी सी चूक की वजह से अपराधी बरी हो जाता है, इसलिए बारीकी से करें जांच

लोकमतसत्याग्रह/सावधानियों की दी जानकारी एसपी अजाक पंकज पांडे ने डिजिटल साक्ष्य एवं अपराधों के अनुसंधान में की जाने वाली कार्रवाई और उसमें बरती जाने वाली सावधानियों से उपस्थित पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया। इसके द्वारा पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से महिला एवं पाक्सो एक्ट व उसके प्रविधानों के संबंध में बताया।

इन्वेस्टिगेशन किसी भी अपराध में अपराधी को सजा दिलाने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस अधिकारियों को पाक्सो एक्ट जैसे गंभीर प्रकरणों की विवेचना काफी गंभीरता से करनी चाहिए, क्योंकि विवेचक की एक छोटी सी चूक से आरोपित न्यायालय से बरी हो जाता है। इसका प्रमुख कारण इंवेस्टिगेशन कमजोर होना है, इसलिए हर पहलू की बारीकी से जांच करें। एविडेंस ज्यादा से ज्यादा जुटाएं, डिजिटल साक्ष्य इकठ्ठे करें, जिससे आरोपित को अपराध की सजा मिल सके। यह बात विशेष न्यायाधीश(पाक्सो एक्ट) आरती शर्मा ने महिला एवं बच्चों के विरुद्ध घटित अपराधों में अनुसंधान एवं कौशल उन्नयन विषय पर इंडियन इंस्टीट्यूट आफ होटल मैनेजमेंट में आयोजित सेमिनार के दौरान कही। दरअसल महिला एवं बच्चों के विरुद्ध घटित अपराध में विवेचना के दौरान चूक होने की वजह से अपराधी दोषमुक्त हो जाते हैं। ऐसे सनसनीखेज अपराधों में विवेचना का स्तर सुधारने और दोषसिद्धि को बढ़ाने के उद्देश्य से यह सेमिनार ग्वालियर पुलिस द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें विशेष न्यायाधीश आरती शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थीं। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट, अभियोजन और पुलिस विभाग एक ही उद्देश्य से कार्य करते हैं। अपराधों में विवेचना का स्तर उच्च रखना चाहिए, क्योंकि विवेचक द्वारा किए गए अनुसंधान के आधार पर ही कोर्ट आगे की कार्रवाई करता है। पुलिस अधिकारियों को कानून में हो रहे नए संशोधनों की जानकारी रखना चाहिए। प्रत्येक पुलिस अधिकारी को अपने कर्तव्य का निर्वहन ईमानदारी से करना चाहिए, क्योंकि आपके द्वारा किए गए बेहतर अनुसंधान के आधार पर ही आरोपित को कोर्ट से सजा दिलाई जा सकती है। सेमिनार में एसएसपी राजेश सिंह चंदेल, एसपी अजाक पंकज पांडेय, एएसपी ऋषिकेश मीणा, राजेश दंडोतिया, मनोवैज्ञानिक आलोक बैंजामिन सहित अन्य पुलिस और अभियोजन अधिकारी उपस्थित थे।

पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई उच्च कोटि की विवेचना से ही कोर्ट से आरोपित को सजा दिलाई जा सकती है। इसका समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। छोटी-छोटी त्रुटियों पर अंकुश लगाने की जरूरत है। पाक्सो एक्ट में गलती की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए, विवेचक की कार्यप्रणाली सदैव संदिग्धता से परे होनी चाहिए।

राजेश सिंह चंदेल, एसएसपी

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