कांग्रेस के प्रदर्शन में महिला कार्यकर्ता का सिर फूटा:पटवारी परीक्षा को लेकर CM हाउस घेरने जा रहे थे; विधायक बोले- सरकार ने लाठीचार्ज कराया

लोकमतसत्याग्रह/पटवारी परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर भोपाल में कांग्रेस बड़ा प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस नेता CM हाउस का घेराव करने के लिए निकले हैं। कार्यकर्ता पहले रोशनपुरा चौराहे पर जुटे। यहां से भारतीय जनता पार्टी और कर्मचारी चयन मंडल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। CM हाउस की सिक्योरिटी पुलिस ने बढ़ा दी है। वॉटर कैनन का यूज कर कार्यकर्ताओं को पीछे हटाया गया है।

पटवारी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में परीक्षा निरस्त करने की मांग को लेकर CM हाउस का घेराव करने जा रहे जिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बाणगंगा चौराहा पर रोक लिया। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड तोड़कर जब आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने वॉटर कैनन चलाकर उन्हें खदेड़ दिया।

भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने कहा, ‘हम CBI जांच की मांग कर रहे हैं। सरकारी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। पुलिस को भेजकर लाठीचार्ज कराया गया है। पुलिस ने लाठीचार्ज और वॉटर कैनन से भगदड़ मचाई। कांग्रेस अध्यक्ष (भोपाल शहर) मोनू सक्सेना को गंभीर चोट आई है। महक राणा को भी काफी चोट लगी है। 25 से 50 कार्यकर्ता घायल हुए हैं।’

शर्मा ने कहा, ‘हम शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे थे। ज्ञापन देना चाहते थे। यह अत्याचार है। लोकतंत्र की हत्या है। कांग्रेस डरने वाली नहीं है। हम लगातार जांच की मांग करते हुए लड़ाई लड़ते रहेंगे।’

विधायक और कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर ही बैठ गए हैं। मोनू सक्सेना ने आज ही भोपाल शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद की शपथ ली है। उनकी आंख के नीचे चोट आई है।

पुलिस का दावा, लाठीचार्ज नहीं किया, बैरिकेड से गिरे

विधायक के आरोप पर एडीशनल DCP राजेश सिंह भदौरिया ने कहा, प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस ने कोई लाठीचार्ज नहीं किया। बैरिकेड गिराने पर सभी घायल हुए हैं। कुछ पुलिसकर्मियों को भी चोट आईं हैं। सभी को इलाज के लिए भेजा गया है।

अभ्यर्थी भी कर चुके प्रदर्शन

पटवारी परीक्षा के अभ्यर्थी भी परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर चुके हैं। इंदौर में बड़ा प्रदर्शन हुआ था। भोपाल में भी अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन करते हुए 7 दिन में जांच कराने की मांग की, नहीं तो राजधानी के जंबूरी मैदान में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इस तरह के प्रदर्शन हुए थे।

कांग्रेस क्यों सरकार पर हमलावर

BJP विधायक के कॉलेज के सेंटर से पटवारी भर्ती में टॉप-10 में 7 उम्मीदवार

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) द्वारा आयोजित ग्रुप-2 (सब ग्रुप-4) व पटवारी भर्ती परीक्षा के रिजल्ट पर विवाद है। भर्ती परीक्षा के टॉप-10 की लिस्ट में से 7 उम्मीदवारों ने ग्वालियर के जिस केंद्र में परीक्षा दी, वह ​भिंड के भाजपा विधायक संजीव कुशवाहा का है। इस सेंटर से 114 लोगों का चयन हुआ है। विधायक के सेंटर से 7 टॉपर होने पर उम्मीदवारों ने परीक्षा रद्द करने की मांग की है।

टॉप-10 में शामिल इन सातों उम्मीदवारों का सेंटर ग्वालियर के NRI कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में था। इन उम्मीदवारों के रोल नंबर की सीरीज भी एक जैसे शुरुआती अंक ‘2488’ से हुई। इन सात में 5 उम्मीदवारों के हस्ताक्षर हिंदी में हैं। हस्ताक्षर में भी सिर्फ नाम लिखा गया है। किसी तरह की बनावट नहीं है। इसके बाद फर्जीवाड़े के आरोप बढ़ गए हैं। इन 7 टॉपर्स ने कुल 200 अंक में से 174.88 से 183.36 तक प्राप्त किए हैं। यह अंक नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया के बाद फाइनल रिजल्ट में मिले हैं।

नॉर्मलाइजेशन के बाद करीब 10 अंक तक घटे और बढ़े हैं। जिन प्रश्नों को ईएसबी ने परीक्षा के बाद कैंसिल कर दिया और उनके नंबर नहीं दिए गए, उनके उत्तर भी इन उम्मीदवारों ने सही दर्ज किए थे। एक टॉपर उम्मीदवार के 11 प्रश्न कैंसिल किए हैं, उनमें से 10 के उत्तर सही लिखे थे।

30 जून को रिजल्ट आया, 10 को टॉप-10 की लिस्ट

15 मार्च से 26 अप्रैल के बीच ग्रुप-2 (सब ग्रुप-4) सहायक संपरीक्षक, सहायक जनसंपर्क अधिकारी, सहायक नगर निवेक्षक, सहायक राजस्व अधिकारी, सहायक अग्नि शमन अधिकारी जैसे पदों की सीधी एवं बैकलॉग भर्ती तथा पटवारी भर्ती परीक्षा का आयोजन प्रदेश के 13 शहरों में ऑनलाइन हुआ था। इसके लिए 12.79 लाख आवेदन आए थे। इनमें से 9.78 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। रिजल्ट 30 जून को आया। टॉप-10 उम्मीदवारों की लिस्ट 10 जुलाई को जारी की गई। इसके बाद रिजल्ट पर विवाद शुरू हो गया।

पटवारियों की नई नियुक्तियों पर रोक

मध्यप्रदेश में पटवारी भर्ती परीक्षा में धांधली के आरोप के बाद सरकार ने इस परीक्षा के आधार पर पटवारियों की नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इस बात की जानकारी दी। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने नियुक्तियां रोकने का फैसला कर ये मान लिया है कि इन परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। 

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