कोविड के बाद आयुर्वेद पर बढ़ा भरोसा विश्वास दिला रहीं जीवनदायिनी मशीनें

लोकमतसत्याग्रह/कोविड के बाद हर वर्ग का आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ा है, इसके सेवन से शहरवासियों को जीवनदान मिला। अगर निरंतर सेवन किया जाए तो इसका दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता, जबकि एेलोपैथी में ऐसा नहीं है। लोगों के बढ़ते भरोसे के चलते ही केंद्र और प्रदेश सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा दे रही है। हाल ही में आयुष मंत्रालय केंद्र सरकार के क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान में दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए दो करोड़ रुपये की आधुनिक मशीनों की उपलब्धता कराई गई। इन मशीनों की मदद से आयुर्वेद दवाओं के साथ औषधीय पेड़,पौधे और खाने-पीने के सामान में पाए जाने वाले पोषक तत्व और हानिकारक तत्वों का पता लगाया जाता है। साथ ही इन तत्वों का मानव शरीर पर क्या प्रभाव या दुष्प्रभाव होता है, इसका भी पता यहां के वैज्ञानिक लगा रहे हैं।

क्षेत्रीय आयुर्वेद संस्थान में लाई गईं मशीनों से वास्तविक स्थति आती है सामने

हाई परफार्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी मशीन

हाई परफार्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी मशीन की मदद से क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान में औषधीय पेड़-पौधों में पाए जाने वाले तत्वों का पता लगाते हैं। इस बात का पता लगाया जाता है कि किस बीमारी के लिए कौन सी औषधीय पौधे में कौन सा तत्व मौजूद है। इसी तरह से बाजार में तैयार होने वाली आयुर्वेद दवाओं की भी जांच की जाती है।

गैस क्रोमैओग्राफी

आयुर्वेद दवाओं को बनाते समय उनमें कोई पेस्टिसाइड मिला है अथवा नहीं, इसका पता इस मशीन की मदद से लगाया जाता है। पेड़-पौधों की छाल या टहनी में पेस्टिसाइड की कितनी मात्रा है, इसका आंकलन भी किया जाता है। इससे यह पता चलता है कौन सा कैमिकल इन में मिला हुआ है।

आटोमेटिक अब्जाप्सन स्पेक्ट्रोमीटर

मशीन की मदद से औषधीय पेड़ पौधों में पाए जाने वाले हानिकारक और लाभदायक धातुओं का पता लगाया जा रहा है। इससे यह पता चलता है कि धातुओं से मानव जीवन किस हद तक प्रभावित होता है।

हाई परफार्मेंश थिन लेयर

हाई परफार्मेंस थिन लेयर आयुर्वेद दवाओं को तैयार करने पर उनमें क्या-क्या मिलाया गया है। इस मशीन की मदद से मिलावट किए गए तत्वों का आसानी से पता लगाया जा सकता है।

फुली आटोमेटिक क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइजर

फुली आटोमेटिक क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइजर इसकी मदद से मानव शरीर के अंदर पाई जाने वाली किडनी की जांच होती है। किडनी फंक्शनल है या नहीं, इसका पता चलता है। साथ ही लिक्विड प्रोफाइल, शुगर आदि की जांच इस मशीन की मदद से की जाती है।

दो करोड़ की लागत से आधुनिक मशीनें अनुसंधान संस्थान को केंद्र सरकार ने उपलब्ध कराई हैं। इनकी मदद से हम औषधीय पेड़पौधों के साथ बाजार में तैयार होने वाली आयुर्वेद दवाओं में मिलाए गए तत्वों का पता लगाते हैं। साथ ही इन तत्वों का मानव शरीर पर क्या प्रभाव या दुष्प्रभाव होता है, इस बात पर शोध करते हैं। इसी तरह से इन मशीन की मदद से तेल मसाले में की जाने वाली मिलावट का भी पता लगा सकते हैं।

डा़ अजय मीना, सहायक निदेशक संस्थान प्रभारी, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, आयुष मंत्रालय केंद्र सरकार

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