लोकमतसत्याग्रह/स्कूलों में बच्चों को अच्छा खाना देने का दावा करने वाली मध्यान्ह भोजन योजना में अब शहरी क्षेत्र में टेंडर निकाले हैं। वहीं ग्रामीण में पिछले आठ साल से टेंडर नहीं निकाले हैं। एक ही संस्था पर काम है। जिले में 1805 स्कूलों में मध्यान्ह भोजन पहुंचता है तो ऐसे में क्वालिटी का क्या भरोसा किया जा सकता है। डेढ़ साल पहले शहरी क्षेत्र में मध्यान्ह भोजन टेंडर होना बताया गया है।
स्व सहायता समूहों के पीछे नेता और ठेकेदारों का पूरा सिंडिकेट काम करता है, लेकिन यह फ्रंट में नहीं आते हैं। ग्वालियर में जिस तरह आंगनबाड़ी केंद्रों में स्व सहायता समूहों का नेटवर्क होता है उसी तरह स्व सहायता समूहों को मध्यान्ह भोजन का काम दिया जाता है। हर तीन साल के लिए यह कार्य दिया जाता है। ग्वालियर में वर्ष 2015 के बाद से टेंडर नहीं निकले हैं। कोरोना काल से पहले 2019 में एक साल का एक्सटेंशन दिया गया। शहरी क्षेत्र में दो माह पहले ही यह प्रक्रिया की गई है। वरना यहां भी ग्रामीण क्षेत्र की तरह यही हाल था। ग्वालियर शहर में दो सेक्टर हैं, जो नगर निगम क्षेत्र में आते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में पिछले आठ साल से मध्यान्ह भोजन के लिए टेंडर नहीं
शहरी क्षेत्र के लिए हाल ही में टेंडर निकाल दिए गए हैं। शासन के मापदंडो के आधार पर प्रक्रिया की जाएगी। आवेदन के लिए अवधि तय की गई है। ग्वालियर में शहरी क्षेत्र में दो संस्थाएं कार्य देख रही हैं। डेढ़ साल पहले लगभग टेंडर किए गए थे।
एमएस राजपूत, परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत ग्वालियर
निगम ने चलाया पैच रिपेयरिंग अभियान
शहर की खराब सड़कों को सुधारने के लिए नगर निगम द्वारा पैच रिपेयरिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को गुढ़ा-गुढ़ी का नाका, समाधिया कालोनी, जमाहर, रामदास घाटी, गायत्री विहार, बैंक कालोनी, मोतीझील, प्यारे का पुरा, मोतीझील, डीडी नगर, द्वारकाधीश मंदिर, गोरखी मैदान, बहोड़ापुर आश्रम के पास, बेलदार का पुरा, एसएलपी कालेज के पास, लक्कडखाना पुल, शंकरपुर, विक्की फैक्ट्री, गांधीनगर, मेवाती मोहल्ला, काल्पी ब्रिज, नूरगंज सेवानगर, मेवाती मोहल्ला एवं जेसी मिल गेस्ट हाउस के पास मुरम डालकर पैच रिपेयरिंग कराई गई।


