लोकमतसत्याग्रह/पिछले 12 साल यानी 2011 से 2022 तक 13.86 लाख लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी है। इनमें से 7 लाख अमेरिका में जा बसे। खास बात यह है कि नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों में करोड़पतियों की संख्या सिर्फ 2.5% है। यानी जिन लोगों ने नागरिकता छोड़ी, उनमें 97.5% नौकरी करने वाले हैं, जो बेहतर अवसरों के लिए विदेश गए हैं।
हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2023 के मुताबिक, भारत छोड़ने वाले करोड़पतियों की संख्या में खास इजाफा नहीं हुआ है। लेकिन, पेशेवरों में विदेश जाने की होड़ पहले के मुकाबले करीब दोगुनी हो गई है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2010 तक नागरिकता छोड़ने वाले 7% की सालाना दर से बढ़ रहे थे। अब यह दर 29% हो गई है।
संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में सर्वाधिक 2 लाख 25 हजार 620 लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी। जबकि साल 2021 में 1.63 लाख लोगों ने नागरिकता छोड़ी थी। 2020 में सबसे कम 85 हजार लोग विदेश में जाकर बसे थे। यह संख्या 2010 के बाद सबसे कम थी, क्योंकि तब कोरोना काल चल रहा था।
अच्छी सैलरी और कारोबारी टैक्स छूट के लिए विदेश में बस रहे
भारत दोहरी नागरिकता नहीं देता, इसलिए किसी दूसरे देश में बसने की इच्छा रखने वाले लोगों को नागरिकता छोड़नी जरूरी है। पेशेवरों के लिए अमेरिका और कारोबारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया-सिंगापुर टॉप डेस्टिनेशन हैं। यहां नया कारोबार स्थापित करने के लिए नागरिकता लेने पर शुरुआती वर्षों में मामूली टैक्स लगता है।


