लोकमतसत्याग्रह/मध्यप्रदेश सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर नियमों में बदलाव किए हैं। बदलाव की बात करें तो अभी तक पुत्र या भाई को अनुकंपा नियुक्त के लिए योग्य माना जाता था, लेकिन सरकार के बदले हुए नियमों के हिसाब से अब पुत्री, बहन और उभयलिंगी संतान भी इस दायरे में आएगी। पुत्री या बहन चाहे अविवाहित हो या विवाहित, तकाकशुदा हो या विधवा या फिर परित्यक्ता, यह सभी को अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में ले लिया गया है।
यह तो हो गई नियमों में बदलाव की बात, जरा सा ध्यान देते हैं समस्याओं की ओर। अक्सरकर देखा जाता है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदक को सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते है, लेकिन फिर भी निराकरण के नाम पर कुछ भी हाथ नहीं आता है। वहीं अगर निराकरण न हुए तीन साल बीत जाएं तो समाधान यह कह कर नहीं किया जाता कि आवेदक का परिवार तीन साल तक बिना किसी सहायता के जिया है तो उसे अनुकंपा नियुक्ति की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार की समस्या से निपटने के लिए न्यायालय की शरण आप कैसे लें इस बारे में जानकारी साझ़ा करते हुए तो न्यायालय में अनुच्छेद 226 कें अंतर्गत रिट याचिका लगा कर अनुकंपा नियुक्ति की मांग की जा सकती है। इसमें न्यायालय आवेदक को न्याय दिलाने में सहायता करेगा।
अनुकंपा मतलब सहायता
अनुकंपा नियुक्ति का अर्थ किसी शासकीय कर्मचारी की नौकरी में होते हुए मृत्यु हो जाने पर उसके आश्रित परिवार को बतौर सहायता नौकरी देने को कहा जाता है। यह नौकरी आवेदक की योग्यता के आधार पर दी जाती है। अब तक अनुकंपा में बहन और पुत्री को आवेदन करने का अधिकार नहीं था, जो सरकार ने अब 19 जून से दे दिया है।
चक्कर काट-काट कर समय व्यर्थ न करें
यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु सेवा निवृत्त होने से पहले हो जाती है तो ऐसे में उसके परिवार का वह व्यक्ति जो योग्य हो, अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकता है, लेकिन ध्यान रहे आवेदन करने के बाद समय नियत समय तक प्रतीक्षा करें, समय व्यर्थ न करें । कहीं लगे कि आपको परेशान किया जा रहा है तो तुरंत न्यायालय की शरण ले सकते हैं।
शासन की उदासीनता का परिणाम नहीं भोगेगा आवेदक
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट आदेश दिए हैं कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद समय रहते ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कर दिया जाता है, लेकिन उसको तीन साल तक निराकरण नहीं मिलता है तो ऐसे में शासन यह तर्क देकर आवेदन खारिज नहीं कर सकता कि तीन वर्ष तक आश्रित परिवार ने जीवन यापन कर लिया तो वह अनुकंपा के दायरे मे नहीं आता । सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि आवेदन समय रहते किया गया है तो ऐसे में शासन की उदासीनता के चलते इसका खामियाजा आवेदक नहीं भुगतेगा । उसके आवेदन का निराकरण नियमें के आधार पर किया जाएगा।


