लोकमतसत्याग्रह/ग्वालियर पुलिस चाहती तो पटवारी भर्ती परीक्षा में हुए घोटाले काे रोका जा सकता था। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया था, लेकिन उन्हें छोटा-मोटा अपराधी मानकर छोड़ दिया। ये गिरफ्तारी 4 से 5 अप्रैल को हुई थी।
इन पर आरोप था कि ये लोग 8 से 12 लाख रुपए की रकम लेकर कैंडिडेट्स को पटवारी परीक्षा में सिलेक्शन की गारंटी दे रहे थे। आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। आधार कार्ड में फर्जी थंब इंप्रेशन पहले ही अपडेट कर लेते थे। फिर असली कैंडिडेट की जगह सॉल्वर को एग्जाम में बैठाकर उसे परीक्षा पास कराने की प्लानिंग कर रहे थे।
इन 4 की गिरफ्तारी से पहले हो चुकी थी टॉपर्स की परीक्षा
पटवारी भर्ती परीक्षा टॉपर्स की लिस्ट लंबी है, लेकिन शुरूआती 11 टॉपर्स की बात करें तो इन सभी की परीक्षा 31 मार्च के पहले ही हो चुकी थी। खासतौर पर NRI कॉलेज में परीक्षा देने वाले टॉपर्स की परीक्षा भी 26 मार्च के पहले ही हो चुकी थी। आइए, पहले 11 में से 8 NRI कॉलेज से टॉपर्स की एग्जाम डेट देख लेते हैं।
एएसपी ने कहा– सब पहली बार ट्राई कर रहे थे, गंभीर मामला नहीं
पटवारी भर्ती में फर्जीवाड़े की साजिश रचने वाले 4 लोगों की गिरफ्तारी के बाद दैनिक भास्कर की टीम ग्वालियर पहुंची थी। गिरफ्तारी को लेकर ग्वालियर एडीशनल एसपी राजेश दंडोतिया से बात भी की। उन्होंने बताया कि पटवारी भर्ती में होने वाली धांधली को लेकर एक स्टूडेंट हमारे पास शिकायत लेकर आया था। उसने बताया था कि कुछ लोग पटवारी भर्ती में सिलेक्शन दिलाने का दावा कर रहे हैं। वो स्टूडेंट्स से 8 से 12 लाख रुपए तक वसूल रहे हैं।
स्टूडेंट ने ये भी बताया कि उसने उन लोगों के साथ डील की है। इसके बाद पुलिस ने बिना देरी किए 2 लोगों को गिरफ्तार किया। इनसे पूछताछ के बाद 2 अन्य लोगों की गिरफ्तारियां हुई थीं। कुल चार गिरफ्तारी हुई थीं।
पहले गिरफ्तार दोनों युवक ऑनलाइन शॉप पर नकली थंब इंप्रेशन के साथ आधार कार्ड अपडेट कर रहे थे। हमने दोनों से पूछताछ की तो इन्होंने अपने दो और साथियों के नाम बताए। पुलिस ने उन्हें भी दबोच लिया। इन लोगों ने स्टूडेंट्स को झांसा दिया था कि वो उनके थंब इंप्रेशन का क्लोन बनवाकर परीक्षा में उनकी जगह सॉल्वर को बैठा देंगे।
चारों पहली बार इस प्रकार का कोई अपराध करने जा रहे थे। ये स्टूडेंट्स की जगह खुद एग्जाम देने की फिराक में थे। 4 लड़कों के साथ आधार कार्ड अपडेट करने वाले कियोस्क के मालिक को भी गिरफ्तार कर लिया था।
शिकायत के दो दिन बाद FIR पर भी उठे थे सवाल
ग्वालियर पुलिस पर सवाल उठ रहे थे कि उन्होंने शिकायत के 2 दिन बाद एफआईआर दर्ज की थी। एडिशनल एसपी राजेश दंडोतिया कहते हैं कि एफआईआर में देरी का कोई कारण नहीं था। हमारे ऊपर कोई प्रेशर नहीं था। हम उनसे पूछताछ कर रहे थे, एविडेंस के आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
पूछताछ के बाद इन आरोपियों के किसी भी बड़े नेक्सस से जुड़े होने की बात सामने नहीं आई। कोई खास एविडेंस नहीं मिला था। इनके पीछे कोई बड़ा नेक्सस होगा, इसकी आगे भी कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि ये लड़के पहली बार ही ऐसा कर रहे थे। हालांकि, वो अभी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
एग्जाम से 5 दिन पहले भी गिरफ्तार किए गए थे 2 फर्जी कैंडीडेट
मीडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 18 जुलाई को ग्वालियर से इस बात का खुलासा हुआ है कि मध्यप्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पटवारी परीक्षा होने से 5 दिन पहले ही गोपनीय जानकारियां जुटाई थीं। इन्हीं जानकारियों के आधार पर एक मामला दर्ज किया गया था। मामले में 2 अभ्यर्थियों के नाम शामिल किए गए थे। ये वो अभ्यर्थी थे जो पटवारी परीक्षा में खुद शामिल होने वाले थे।
ये अभ्यर्थी परीक्षा में फर्जीवाड़े की साजिश रच रहे थे। दोनों पटवारी परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑफसेट प्रिंटिंग के आधार पर कुछ सबूत जुटा रहे थे। मामले की जांच पड़ताल के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने इन्हें ग्वालियर के थाटीपुर इलाके से हिरासत में लिया था। स्टूडेंट्स से पूछताछ में पता चला कि उनके साथ 3 लोग और थे। इनके नाम मनीष शर्मा, वीरभान बंसल, रिंकू रावत, संदीप सिंह और कृष्णवीर जाट हैं।
ग्वालियर क्राइम ब्रांच टीआई अमर सिंह ने बताया कि इन पांचों में 2 स्टूडेंट्स थे, जिनका 10 मार्च को पटवारी का एग्जाम था। हालांकि, वो 10 मार्च को होने वाले एग्जाम में शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि पुलिस हिरासत में थे। ये परीक्षा में गड़बड़ी की साजिश रच रहे थे।
दूसरे स्टूडेंट्स के आधार कार्ड में फर्जी थंब इंप्रेशन अपडेट करा कर सॉल्वर बैठाने के प्रयास में थे। इसके अलावा एक वो आरोपी था, जिसके यहां बैठकर पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा था। इनमें से एक आरोपी वो था जिसके अकाउंट के जरिए पैसे का लेनदेन किया जा रहा था।
पांचवां आरोपी कृष्णवीर जाट है जो सॉल्वर की भूमिका में था। दूसरे स्टूडेंट्स की जगह बैठ कर एग्जाम देने वाला था। कृष्णवीर मथुरा का है। यूपी पुलिस में पहले से कॉन्स्टेबल था।
10 जून को सबको जमानत मिल गई, फिर सवाल खड़े हुए
पटवारी परीक्षाएं समाप्त होने यानी 26 अप्रैल तक आरोपी पुलिस की हिरासत में ही रहे। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। 10 जून को हाईकोर्ट ने इन सभी को जमानत देकर रिहा कर दिया गया था। इसके बाद से लगातार सवाल उठ रहे हैं कि जब पुलिस को धांधली की साजिश की जानकारी पहले से लग गई थी तो प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में पुलिस एक्टिव क्यों नहीं हुई या उसने अलर्ट क्यों जारी नहीं किया।
इन आरोपियों से और गहराई से पूछताछ क्यों नहीं की गई? मामले को हलके में क्यों लिया गया? विपक्षी पार्टियां तो ये आरोप भी लगा रही हैं कि ये आरोपी छोटे प्यादे थे। बड़े आरोपियों ने बचने के लिए इनको फंसाया है। पूरी धांधली में सरकार के बड़े-बड़े मंत्री तक शामिल हैं।
आधार से कैसे संभव है परीक्षा में धांधली?
फ्रॉड करने वाले पहले ऐसे लोगों को तलाशते हैं जो बिना पढ़े पैसा दे कर परीक्षा में सिलेक्शन चाहते हैं। इसके बाद वो उनके आधार कार्ड और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ छेड़छाड़ करते हैं। इसके साथ ही फ्रॉड करने वाले किसी ऐसे पढ़े लिखे तेज दिमाग वाले व्यक्ति की तलाश करते हैं जो किसी भी एग्जाम को पास कर ले। उस व्यक्ति को ये काम करने के बदले अच्छी रकम का लालच दिया जाता है।
जिस स्टूडेंट के सिलेक्शन का ठेका लेते हैं। उसके आधार कार्ड में सॉल्वर के थंब इंप्रेशन अपडेट करते हैं। आधार में लगी तस्वीर को को रियर कैंडिडेट और सॉल्वर के साथ मिक्स करके अपडेट करते हैं, ताकि सॉल्वर एग्जाम हॉल में आसानी से एंटर कर सके।
सरकार ने आयोग बनाया, 31 अगस्त तक पूरी करनी होगी जांच
पटवारी परीक्षा में धांधली और इसके विरोध में प्रदेश भर में हो रहे प्रदर्शन के चलते आखिरकार सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी। उन्होंने पटवारी सहित ग्रुप-2 सब ग्रुप-4 की जांच के लिए रिटायर जस्टिस राजेंद्र वर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। कमेटी को 31 अगस्त तक जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। इसमें ये भी बताना है कि परीक्षा में धांधली न हो इसके लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए।
पटवारी परीक्षा और उससे जुड़े विवाद की टाइम लाइन
- 5 जनवरी से पटवारी भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई
- पहले 19 जनवरी फिर बाद में 23 जनवरी तक आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख तय की गई थी।
- 10 लाख से अधिक आवेदन पटवारी सहित तीनों वर्गों के लिए आए थे।
- 15 मार्च से ऑनलाइन परीक्षा शुरू हुई थी।
- पटवारी के 6755 पदों के लिए कुल 9.57 लाख लोग परीक्षा में शामिल हुए।
- 15 मार्च से परीक्षा शुरू हुई थी। 10 लाख से अधिक लोगों ने आवेदन दिए थे।
- महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत पदों का आरक्षण रखा गया था। ये पद न भरने पर अगले वर्ष के लिए कैरी फारवर्ड करने के लिए नियम तय किया गया है।
- भूतपूर्व सैनिकों के लिए 10 प्रतिशत पद आरक्षित था। खाली पद को अगले साल के लिए कैरी फारवर्ड करने का नियम तय किया गया है।
- 30 जून को पटवारी के रिजल्ट जारी हुए। इसमें पास होने वालों के रिजल्ट सोशल मीडिया पर वायरल करते हुए सवाल खड़े किए गए।
- 10 जुलाई को मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने 10 टॉपर्स सहित अन्य श्रेणी का रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड किया।
- 10 टॉपर्स में 7 ग्वालियर के एनआरआई कॉलेज में परीक्षा देने वाले थे।
- इस कॉलेज के 114 लोग पटवारी परीक्षा पास कर गए। ये कॉलेज बीजेपी में शामिल हो चुके विधायक संजू सिंह कुशवाहा का है।
- 12 जुलाई को कांग्रेस नेता ने पटवारी परीक्षा में धांधली का दावा करते हुए सोशल मीडिया पर ट्वीट किया।
- 13 जुलाई को इंदौर में हजारों की संख्या में युवक पटवारी परीक्षा में धांधली के आरोप लगाते हुए जांच की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए।
- 14 जुलाई को पूरे प्रदेश में इस तरह से प्रदर्शन होने लगे। दावा किया जाने लगा कि 15 से 20 लाख लेकर लोगों को पटवारी परीक्षा पास कराया गया है।
- 14 जुलाई को सीएम शिवराज सिंह ने ट्वीट के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया रोकने और जांच कराने की बात कही।
- 17 जुलाई को पटवारी परीक्षा पास करने वाले कैंडिडेट्स भोपाल के नीलम पार्क में इकट्ठे हुए और जल्द नियुक्ति की मांग पर अड़ गए।
- 18 जुलाई को सीएम ने रिटायर जस्टिस राजेंद्र वर्मा की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बना दी।
पटवारी चयन परीक्षा में धांधली की खबरों के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 18 फरवरी को जांच होने तक भर्ती प्रक्रिया रोकने के आदेश दिए थे। दैनिक भास्कर ने यह जानने के लिए पड़ताल की कि धांधली की जांच कहां तक पहुंची तो पता चला कि सरकार की ओर से अब तक जांच का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। कर्मचारी चयन बोर्ड (पहले व्यापमं, फिर प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड) के अफसरों का कहना है कि उन तक ऐसा कोई आदेश नहीं आया, इसलिए जांच का तो सवाल ही नहीं उठता।


