दीपावली से पहले लगेगा मीटरों पर पहरा:छेड़खानी करने पर अफसरों को दफ्तर में चल जाएगा पता, पहले फेस में 24.82 प्रतिशत उपभोक्ता होंगे कवर

लोकमतसत्याग्रह/दीपावली से पहले घरेलू कनेक्शनों के बिजली मीटरों पर स्मार्ट मॉनिटरिंग शुरू हो जाएगी। बिजली चोरों से निपटने के लिए कंपनी अक्टूबर से स्मार्ट मीटर लगाना शुरू कर देगी। ये स्मार्ट मीटर लगेंगे तो उपभोक्तओं के घर पर, लेकिन इसकी पूरी ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी बिजली कंपनी के दफ्तरों में।

यानी कि कोई भी उपभोक्ता इन मीटरों में किसी प्रकार की छेड़खानी करेगा तो तत्काल बिजली कंपनी के दफ्तर में उपभोक्ता के कनेक्शन नंबर पर टीम को सिग्नल मिल जाएगा। जिसके बाद उसके यहां कार्रवाई के लिए टीम पहुंचेगी। पहले फेस में शहरी उपभोक्ताओं के यहां यह मीटर बदले जाएंगे और इसके लिए पहले फेस में 70 हजार मीटर रखे गए हैं। ये संख्या ग्वालियर के कुल उपभोक्ता 2 लाख 82 हजार के 24.82 प्रतिशत रहेगी।

हर कोशिश फेल, चोरी-नुकसान 47 प्रतिशत तक: बिजली चोरी रोकने के लिए कंपनी द्वारा की गई हर कोशिश अब तक नाकाम साबित हुई है। केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न सुधार योजनाओं के करोड़ाें खर्च होने के बाद भी चोरी व नुकसान का ग्राफ गिरने की जगह बढ़ता जा रहा है। ग्वालियर की बात करें, तो यहां चोरी और वितरण के दौरान होने वाले दूसरे नुकसान 47% तक पहुंच चुके हैं। जिससे कंपनी को नुकसान हर महीने उठाना पड़ता है।

वर्ष 2000 में मैकेनिकल मीटर लगाए गए, उसके बाद 2010 में इलेक्ट्रॉनिक

  • मैकेनिकल- वर्ष 2000 तक सरकार मैकेनिकल मीटरों का इस्तेमाल करती थी। छोटे साइज के इन मीटरों में पहिया लगा रहता था और यूनिट खपत डिजिट में शो होती थी। इनमें लोग तार बायपास करके बिजली चोरी करते थे।
  • इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिकल- 2000-01 से प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिकल मीटरों का उपयोग शुरू किया गया। जिसमें पुराने मीटर वाला पहिया तो शामिल रहा। लेकिन बाकी सबकुछ इलेक्ट्रॉनिक कर दिया गया। शुरूआत में ये मीटर सफल रहे, लेकिन कुछ वर्षों बाद इसमें भी तार बायपास, मैग्नेट और स्विच जैसे हथकंडे अपनाकर बिजली चोरी शुरू कर दी गई।
  • इलेक्ट्रॉनिक- बिजली चोरी रोकने के लिए नई व्यवस्था का हवाला देकर 2010 में सरकार ने एक बार फिर मीटर बदले और इस बार लोगों के घरों में इलेक्ट्रॉनिक मीटर टांग दिए गए और यही मीटर अब तक लगाए जा रहे हैं। लेकिन इन मीटरों में बिजली चोरी की जुगाड़ बना ली गई। पिछले मीटर की तरह मैग्नेट इसमें भी काम करती है। लोग इनमें एक तार बायपास कराकर ऑन-ऑफ बटन लगवा लेते हैं। जिससे वे अपनी सुविधानुसार मीटर को बंद या चालू करते हैं।
  • स्मार्ट मीटर- अब बिजली कंपनी चोरी रोकने के लिए स्मार्ट मीटरों से उम्मीद कर रही है। प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं के यहां यह मीटर लगाने की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू होगी। इन मीटरों में सिम कार्ड लगा होगा, जिसके जरिए मीटर को दफ्तर में लगे सर्वर से जोड़ दिया जाएगा। फिर जो भी उपभोक्ता अपने मीटर से किसी भी प्रकार की छेड़खानी करेगा। उसकी जानकारी कंपनी दफ्तर में पहुंचेंगी और छेड़खानी समय के साथ रिकॉर्ड में खुद दर्ज हो जाएगी।

अभी यहां लगें हैं एएमआर मीटर
10 किलोवॉट से अधिक भार वाले 2600 उपभोक्ताओं के यहां ऑटोमैटिक मीटर रीडिंग (एएमआर) सिस्टम से रीडिंग ली जा रही है।

छेड़खानी की तो पता चल जाएगा
बिजली कंपनी अक्टूबर से घरेलू उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाना शुरू करेगी। इसके लिए भोपाल में तैयारियां की जा रही हैं। इन मीटरों में सिम कार्ड लगे होंगे। जिससे हर मीटर कंपनी के सर्वर से कनेक्ट रहेगा। उपभोक्ता द्वारा की जाने वाली छेड़खानी हमें पता चल सकेगी।
नितिन मांगलिक, महाप्रबंधक, शहर वृत्त

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