लोकमतसत्याग्रह/क्या मणिपुर समेत नार्थ ईस्ट के कुछ हिस्से को देश से अलग करने की साजिश रची जा रही है। क्या मणिपुर की कुकी और नगा समुदाय को म्यांमार के हिस्से में रहने वाले और नॉर्थ ईस्ट के अलग-अलग राज्यों में रह रहे इसी समुदाय के लोग देश से अलग होने के लिए बड़ा समर्थन दे रहे हैं?
विपक्षी दलों के नेताओं का डेलिगेशन जब मणिपुर पहुंचा तो उनको कुछ ऐसे ही चौंकाने वाले और पैरों के नीचे से जमीन खिसकाने वाले हालात दिखे। जिसको लेकर डेलिगेशन के सदस्य हैरान रह गए। इस डेलिगेशन में शामिल सदस्यों ने अमर उजाला डॉट कॉम को अपने मणिपुर दौरे के बारे में कई जानकारियां दी। जो उन्होंने शरणार्थी कैंपों में और समूचे मणिपुर में देखीं।
मणिपुर को अलग देश बनाने की चल रही साजिश !
विपक्षी दलों के नेताओं के डेलिगेशन में शामिल समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य जावेद अली कहते हैं कि दोनों समुदायों के बीच में आपसी सामंजस्य की न सिर्फ कमी है बल्कि इतनी ज्यादा दुश्मनी बढ़ गई है कि दोनों तरफ के लोग एक दूसरे का नाम लेना तो दूर आमने सामने देखना तक पसंद नहीं कर रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि जब वह कुकी के शरणार्थी कैंप में गए तो वहां पर उन लोगों ने कहा कि जिन हथियारों को लूटने की बात कही जा रही थी दरअसल उन हथियारों को सरकार और प्रशासन ने मैतेई समुदाय में सप्लाई करवाए।
सांसद जावेद अली कहते हैं कि यह आरोप कितने सही है यह तो जांच का विषय है लेकिन अगर मणिपुर की एक समुदाय में इस तरीके की बात दिलो-दिमाग में बैठी है तो इसका जवाब सरकार को और जिम्मेदारों को देना ही होगा। इसी तरह मैतेई समुदाय भी कुकी और नागा समुदाय पर बड़े आरोप लगाते हैं। उनका कहना है कि मैतेई शरणार्थी कैंप में समुदाय से जुड़े लोगों ने कहा कि कुकी तो मणिपुर ही नहीं बल्कि देश से अलग होकर अपना एक देश बनाना चाहते हैं।
इस मामले में कुकी समुदाय से जुड़े लोग न सिर्फ नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में रहने वाली अपनी कम्युनिटी बल्कि म्यांमार में रह रहे लोगों के साथ मिलकर देश के खिलाफ बड़ी साजिश रच रहे हैं। वह कहते हैं कि मैतेई समुदाय के इन आरोपों में अगर जरा भी दम है तो यहां के हालात बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। यहां पर मामला अब देश का है। जावेद अली कहते हैं कि ऐसे मामलों में जब तक सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी तब तक स्थिति बदहाल ही रहेगी।
सरकार को मणिपुर का हल जल्द से जल्द निकालना होगा
जावेद कहते हैं कि हालात इतने बदतर हैं कि इस मामले में किसी भी तरह की राजनीति सिर्फ मणिपुर ही नहीं बल्कि उत्तर पूर्वी राज्यों को बड़ी समस्या में डाल सकता है। वह कहते हैं कि उनके डेलिगेशन में शामिल सभी सदस्यों ने अलग-अलग शरणार्थी कैंपों में जाकर कुकी और मैतेई समुदाय के लोगों से विस्तार से बात की। उनका कहना है कि जो हालात वहां पर हैं उसको वहां जाकर ही समझा जा सकता है।
जावेद अली कहते हैं कि मैतेई समुदाय के लोग कुकी से नहीं मिलना चाहते हैं। और कुकी समुदाय मैतेई से कोई वास्ता नहीं रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि बीते तकरीबन तीन महीने से चल रहे मणिपुर के भीतर सरकार के दखल न देने की वजह से दोनों समुदायों में इतनी बड़ी खाई पैदा हो गई है जो सिर्फ और सिर्फ केंद्र सरकार के जिम्मेदार नेताओं, मंत्रियों और प्रधानमंत्री के भरोसे और उनके दखल से ही दूर हो सकती है। डेलिगेशन में शामिल जावेद अली कहते हैं कि इस ग्रुप के सभी सदस्यों ने वहां के हालातों का गंभीरता से जायजा लिया और यही पाया कि इस पूरे मामले में केंद्र सरकार को हर हाल में दखल देना ही होगा।
दोनों समुदायों की खाद्य सामग्री तक अलग–अलग आती है
डेलिगेशन में शामिल सदस्य जावेद अली कहते हैं कि मणिपुर के हालात इस तरीके के हैं कि अगर आपको चुराचांदपुर सड़क के रास्ते जाना है तो वहां की एक कम्युनिटी इस रास्ते से नहीं जा सकती है। यही नहीं अगर मणिपुर के मैतेई समुदाय को खाद्य सामग्री चाहिए तो उनके लिए इंफाल से फूड सप्लाई हो रही है। जबकि कुकी के लिए उनके शरणार्थी कैंप से 600 किलोमीटर दूर आइजोल से खाद्य सामग्री की सप्लाई होती है। वो कहते हैं कि हालात इतने चिंताजनक हैं कि दोनों समुदाय के बीच में जबरदस्त विभाजन हो चुका है। दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे को देखना तक नहीं पसंद कर रहे हैं। जब तक इस मामले में केंद्र सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी तब तक मणिपुर के हालात सामान्य नहीं हो सकते हैं।
दूसरे समुदाय के लोग छोड़ रहे हैं मणिपुर
वह कहते हैं कि अपने इस मणिपुर दौरे में उनके डेलिगेशन ने पाया कि सिर्फ यहां पर कुकी और मैती ही प्रभावित नहीं है बल्कि दूसरे राज्यों के रहने वाले व्यापारी समुदाय भी प्रभावित हो रहे हैं। राज्यसभा सांसद जावेद अली कहते हैं कि उनको मणिपुर में मारवाड़ी व्यापारी मिले जो कि मणिपुर छोड़कर सूरत में नए व्यापार की उम्मीद तलाश में जा रहे थे। वो कहते हैं कि अगर वक्त रहते केंद्र सरकार के जिम्मेदार नेता और प्रधानमंत्री ने इस मामले में दखल नहीं दिया तो हालात इतने बेकाबू हो जाएंगे कि उसको संभालना बहुत मुश्किल होगा। और इसका असर सिर्फ दो समुदाय में ही नहीं बल्कि वहां रहने वाली और जातियों समेत नॉर्थईस्ट के अन्य राज्यों पर बुरी तरीके से पड़ने वाला है।
न ढंग से इलाज मिल रहा और न मिल रही शिक्षा
मणिपुर में अभी भी इंटरनेट बंद है। अस्पतालों में इलाज नहीं हो रहा है। स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो रही है। अगर कोई बच्चा मणिपुर में फंसा हुआ है और वह अपनी ऑनलाइन पढ़ाई करना चाहता है तो उसका कैरियर चौपट हो चुका है। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद जावेद अली कहते हैं कि ऐसे हालातों में केंद्र सरकार ने चुप्पी साध रखी है। राज्य के लोगों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं बीते तीन महीने से नहीं मिल पा रही हैं। बावजूद इसके सरकार ने इस मामले पर कोई सीरियस कदम तक नहीं उठाए।
केंद्र सरकार का प्रतिनिधिमंडल भी जाए मणिपुर
इस डेलिगेशन में शामिल आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा कहते हैं कि मणिपुर के दोनों समुदाय आपस में मिलकर रहें। वहां के जो हालात हैं उनको देखकर सबसे पहले अगर जरूरत किसी चीज की है तो वह है केंद्र सरकार के मजबूत भरोसे की। जो प्रधानमंत्री के आश्वासन के साथ ही पूरी होगी। मनोज झा कहते हैं विपक्षी दलों के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल तो मणिपुर में जाकर जमीनी हकीकत देख आया है। जो हालात वहां पर हैं वह बगैर मौके पर जाए आप समझ नहीं सकते हैं। वह करते हैं कि सत्ता पक्ष के नेताओं और जिम्मेदार मंत्रियों को भी मणिपुर का दौरा करना चाहिए ताकि दो समुदायों के बीच बढ़ रही खाई को खत्म किया जा सके।


