लोकमतसत्याग्रह/लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचइ) विभाग के रोशनीघर स्थित खंड क्रमांक एक में साढ़े 16 करोड़ रुपए की घपलेबाजी का खुलासा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में धीरे-धीरे कर विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन-भत्तों सहित पीएफ व अन्य रक्षित राशि को निजी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके अलावा फर्जी वेतन भुगतान भी किए गए हैं। ये सभी ट्रांजक्शन कंप्यूटर के माध्यम से हुए थे, जिसे केंद्रीय आडिट टीम ने पकड़ा और राज्य के वित्त विभाग के संज्ञान में लाया गया। वित्त विभाग ने इस मामले में ज्वाइंट डायरेक्टर ट्रेजरी अशोक श्रीवास को पत्र लिखकर इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। इस गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। खंड कार्यालय में पदस्थ अधिकारी गुपचुप कर मामले को दबाने में लगे हुए हैं।
प्राथमिक जानकारी के मुताबिक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर इस राशि को निजी खातों में ट्रांसफर कराया है। इस मामले में पिछले पांच वर्षों के दौरान कार्यालय में पदस्थ रहे कंप्यूटर आपरेटर से लेकर लिपिकीय स्टाफ और कार्यपालन यंत्री तक जांच के दायरे में आ गए हैं, क्योंकि विभागीय स्तर पर मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी राशि को ठिकाने नहीं लगाया जा सकता है। इस मामले में वित्त विभाग ने ज्वाइंट डायरेक्टर ट्रेजरी को मामले की जांच करने के लिए कहा है। शुरूआती विभागीय प्रक्रिया में पता चला है कि इस कार्यालय में आहरण एवं संवितरण अधिकार (डीडीओ पावर) कार्यपालन यंत्री संजय सोलंकी के पास हैं। उनके हस्ताक्षर के बिना विभाग से राशि नहीं निकल सकती है। इसके अलावा कार्यालय में पदस्थ बड़े बाबू हीरालाल ही वेतन-भत्तों के भुगतान से लेकर अन्य कार्य देखते हैं। इन दोनों से ही अब पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा पूर्व में पदस्थ रहे इंजीनियरों से भी जांच के दौरान पूछताछ की जाएगी।
छिंदवाड़ा में भी हो चुकी है गड़बड़ी
इसी तरह की गड़बड़ी का खुलासा पिछले दिनों छिंदवाड़ा में भी हुआ है। इसे भी वित्त विभाग ने पकड़ा है। वहां विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीइओ) कार्यालय में पदस्थ क्लर्क अनिल कुमार कुड़ापे ने 65 लाख रुपये से अधिक राशि का गबन कर इसे अपने और पत्नी के खाते में ट्रांसफर किया था। कंप्यूटर के जरिए रकम खातों में ट्रांसफर की गई थी। जांच में शिक्षा विभाग के बाबू और कोषालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत के बाद लगभग 65 लाख रुपये से अधिक राशि का गबन होना पाया गया है। इस मामले में एक अन्य लिपिक किशोर कुमार जगदाले सहायक ग्रेड 3 के द्वारा भी इसी प्रकार खातों में राशि ट्रांसफर करना पाया गया था।
यह है नियम
मप्र की वित्त संहिता के अनुसार शासकीय पैसा निजी खाते में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता और आहरण भी तभी किया जा सकता है, जब पैसे की आवश्यकता हो। सरकारी पैसा अपने पास नहीं रखा जा सकता। अगर कोई काम हुआ है, तो संबंधित फर्म के खाते में पैसे का भुगतान किया जाना चाहिए। किसी भी योजना का पैसा निजी खातों में नहीं डाल सकते। किसी कर्मचारी के खाते में केवल शासकीय खाते से उसका वेतन ही दिया जाता है। अगर किसी स्कीम का पैसा डाला गया है, तो गलत है।
वित्त विभाग से पत्र आया है
पीएचइ के रोशनीघर स्थित कार्यालय में साढ़े 16 करोड़ रुपए की राशि निजी खातों में ट्रांसफर करने की जांच के लिए वित्त विभाग से पत्र आया है। इस मामले में ज्वाइंट डायरेक्टर ट्रेजरी को जांच के आदेश दिए गए हैं। हम भी गड़बड़ी को पकड़ने के लिए जांच कमेटी बना रहे हैं।
आरएलएस मौर्य, मुख्य अभियंता पीएचइ


