लोकमतसत्याग्रह/शोध के नाम पर अब भारतीय मरीजों का डाटा विदेशी कंपनियों को देना आसान नहीं होगा। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने पहली बार स्वास्थ्य अनुसंधान डाटा प्रबंधन पर 60 पेज का मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत बिना अनुमति भारतीय मरीजों का डाटा विदेशी कंपनियों को बेचना अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
मसौदे के अनुसार, शोध के नाम पर मरीजों की जानकारी एकत्रित करने के बाद उसकी सुरक्षा करना संस्थान या फिर शोधकर्ता की जिम्मेदारी होगी। अगर डाटा किसी तीसरे व्यक्ति या संस्थान के हाथ लगता है तो शोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, शोध खत्म होने के बाद सभी डाटा सार्वजनिक करना जरूरी होगा। प्रत्येक संस्थान के पास एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए, जिसके तहत डाटा को सुरक्षित रखा जा सके। इस स्थान पर इंटरनेट नहीं होना चाहिए।
दो माह में होगा अनिवार्य
आईसीएमआर ने बृहस्पतिवार को मसौदे पर आपत्ति और सुझाव के लिए देश के सरकारी व प्राइवेट अनुसंधान व शोध संस्थानों को पत्र लिखकर कहा है कि सरकार से निर्देश पर आठ सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर मसौदा तैयार किया है। अगले दो माह में इसे सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य कर दिया जाएगा। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल का कहना है कि मरीजों का डाटा स्वास्थ्य अनुसंधान में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाता है। पिछले कुछ समय में यह महसूस किया गया कि इस तरह के डाटा को लेकर सख्त नियमों को लागू करना चाहिए।
15 हजार लोगों का डाटा हुआ चोरी
वैज्ञानिकों ने आरटीआई से जाना कि जीनोम सीक्वेंसिंग के नाम पर कुछ संस्थानों ने 15 हजार मरीजों का डाटा विदेशी फार्मा कंपनियों को सौंप दिया। नई दिल्ली स्थित जीनोमिक्स और इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के वरिष्ठ प्रो. विनोद स्कारिया को सबसे पहले एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में इसकी सूचना मिली जब मंच पर भारतीय रोगियों का जीनोम डाटा पेश किया।
जांच के बाद किया फैसला
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव ने बताया कि मंत्रालय ने मरीजों का डाटा चोरी की जांच के बाद सख्त नियम बनाने का फैसला लिया। इसके लागू होने पर जो भी डाटा गड़बड़ी में पाया जाता है तो उसे आजीवन चिकित्सा शोध से प्रतिबंध किया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
शोधकर्ताओं की जिम्मेदारियां
- डाटा प्रबंधन योजना: शोध से पूर्व मजबूत डाटा प्रबंधन योजना बनानी होगी, जिसमें डाटा की संवेदनशीलता, श्रेणी, मानक और कोडिंग प्रथाओं की स्पष्ट जानकारी देनी होगी।
- प्रस्तुतीकरण: जिस संस्थान में शोध किया जाएगा, उनके यहां डाटा समीक्षा समिति (आईडीआरसी) होनी चाहिए जो डाटा के सुरक्षित होना सुनिश्चित करेगी।
- फंडिंग एजेंसी की मंजूरी: शोध के लिए फंड करने वाली एजेंसी को मरीजों का डाटा रखने का अधिकार नहीं होगा।
- ओपन–सोर्स प्रौद्योगिकियों का प्रयोग: शोध शुरू करने से पहले तकनीक का इस्तेमाल करते हुए उन सॉफ्टवेयर की मदद लेना होगा, जिनके जरिये मरीजों का डाटा न सिर्फ आसानी से एकत्रित हो सकता है, बल्कि उसे सुरक्षा भी प्रदान कर सकता है।


