चुनावी वर्ष में ,मध्यप्रदेश में संघ प्रचारकों को लेकर बड़ा फेरबदल

लोकमतसत्याग्रह/इंदौर विभाग प्रचारक रहे प्रमोद झा को सभी दायित्वों से मुक्त कर घर भेजा , कई प्रचारकों का स्थानांतरण

इंदौर समेत मध्यप्रदेश में कई जगह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बड़े बदलाव किए हैं। ग्वालियर एवं इंदौर में लंबे समय तक प्रचारक रहे प्रमोद झा को आरएसएस ने वापस घर भेज दिया है। प्राप्त सूत्रों के अनुसार प्रमोद झा की लंबे समय से अपनी कार्यशैली को लेकर संघ के अपने वरिष्ठ पदाधिकारिओं से अनबन चल रही थी जिसकी वजह से कुछ समय पहले उन्हें इंदौर विभाग प्रचारक से हटाकर कला के क्षेत्र में काम कर रहे संघ के अनुसांगिक संघठन “संस्कार भारती “के क्षेत्र संगठन मंत्री का दायित्व देकर लूप लाइन में डाल दिया गया था । परन्तु अब औपचारिक रूप से उन्हें संघठन के सभी दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। कुछ समय पहले नर्मदापुरम में संघ की बैठक हुई थी जिसमें यह निर्णय लिया गया। इसके साथ भोजपुर जिला प्रचारक पहलवान सिंह रघुवंशी को भी संघ ने मुक्त कर दिया है।

कई प्रचारकों को नई जगह भेजा गया है
इस पूरे फेरबदल में संघ ने कई प्रचारकों को नई जगह पर भेजा है। कुछ को बड़ी जिम्मेदारी मिली है तो कुछ के दायित्व कम कर दिए गए हैं। मंडला विभाग प्रचारक अमित को” विद्या भारती” महाकौशल में भेजा गया है। सतना के संजय को छत्तीसगढ़ भेजा गया है। रीवा विभाग प्रचारक हरिनारायण जी को बनाया है। छिंदवाड़ा विभाग प्रचारक लखन जी को बनाया गया है। मंडला विभाग प्रचारक पंकज पांडे, नर्मदापुरम सह विभाग प्रचारक नरेंद्र यादव बनाए गए हैं। सागर के विभाग प्रचारक राजेश शर्मा को सेवा प्रमुख का दायित्व दिया गया है।

भोपाल विभाग की जिम्मेदारी अब सुरेंद्र मणि के पास
वर्तमान में भोपाल के श्रवण सैनी को मध्य भारत प्रांत से बाहर भेज दिया है वे अब महाकौशल प्रांत के सतना में विभाग प्रचारक होंगे। वे लंबे समय से विभाग प्रचारक का जिम्मा संभाल रहे थे। उनकी जगह महाकौशल से सुरेंद्र मणि को भोपाल का विभाग प्रचारक बनाया गया है। वहीं मध्यभारत प्रांत में वानप्रस्थी कार्य का दायित्व संभाल रहे ओमप्रकाश सिसोदिया अब क्षेत्र में सह सेवा प्रमुख बनाए गए हैं।

प्रचारक व्यवस्था संघ कार्य का आधार
संघ कार्य के लिए पूर्णकालिक बनकर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओ को प्रचारक कहा जाता है ,अपवादों को छोड़कर ,
सामान्यतया ये कार्यकर्ता अविवाहित रहकर अपना पूरा समय संघ के विस्तार के लिए लगाने के लिए आते हैं , संघ के शुरुवाती वर्षों में ये प्रचारक ही संघ का कार्य गांव- गांव तक लेकर गए , उन पुराने प्रचारकों के त्याग और कठिन परिश्रम का फल आज पुरे देश में संघ रूपी विशाल संघठन के रूप में दिखाई भी पड़ता है ,संघ के सभी अनुसांगिक/विचार परिवार के संघठनो में बड़े पदों पर संघ के प्रचारक ही दिखाई देते हैं , बीजेपी में भी संघठन मंत्री के पदों पर संघ के प्रचारक ही बिठाये जाते हैं ,इस व्यवस्था ने प्रारम्भ से ही संघ परिवार में आतंरिक अनुशासन और एकरूपता लाने में बड़ी भूमिका निभाई है ।
संघ के प्रचारकों के अतिरिक्त संघ विचार परिवार के अलग अलग संघटन जैसे विधार्थी परिषद् ,विश्व हिन्दू परिषद् ,जैसे संघठन भी अपने गृहस्त कार्यकर्ताओं को समय देने का आग्रह करके उनको पूर्णकालिक कार्यकर्ता / संघठन मंत्री का दायित्व देकर संघठन विस्तार के कार्य में लगाते हैं। अधिकतर संघठन मंत्री कुछ समय के उपरांत वापिस अपने सामान्य ग्रहस्त जीवन में लौट जाते हैं ,

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