बंदूक नहीं कलम थामने पर मिला मेडल:प्रधान आरक्षक ने जवानों के लिए कम्प्यूटर सीखना बना दिया आसान, मिला राष्ट्रपति पदक

लोकमतसत्याग्रह/आपने अक्सर सुना होगा कि पुलिस जवान व अफसरों को बदमाशों को मार गिराने, गिरफ्तार करने या फिर कोई बड़ा खुलासा करने पर मेडल मिला होगा, लेकिन ग्वालियर एसपी ऑफिस के IT सेल में पदस्थ प्रधान आरक्षक सुरेन्द्र भटेले को बंदूक थामने पर नहीं बल्कि हाथ में कलम चलाने पर मेडल मिला है। 15 अगस्त को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में CM शिवराज सिंह चौहान ने प्रधान आरक्षक भटेले को राष्ट्रपति पदक से नवाजा है।

साल 2003 में जब पुलिस विभाग में कम्प्यूटर जरुरी कर दिया गया तो पुलिस कर्मियो को बहुत मुश्किल होती थी। उस समय प्रधान आरक्षक ने कम्प्यूटर की अंग्रेजी भाषा को सरल कर कम्प्यूटर सीखने के लिए हिंदी में किताब लिख डाली। इसके बाद कम्प्यूटर का ज्ञान आसान हुआ। अफसर और जवान कम्प्यूटर की नॉलेज में पारंगत हुए। इसके बाद प्रधान आरक्षक सुरेन्द्र भटेले पुलिस विभाग में कम्प्यूटर बाबा के नाम से चर्चित हो गए।

पुलिस विभाग ने साल 2003 में कई ऐसे प्रोजेक्ट लागू किए थे जिसमंे पुलिस जवान व अफसरों को कम्प्यूटर की बेसिक नॉलेज होना बहुत जरुरी था। जवानों को कम्प्यूटर की ट्रेनिंग के लिए निजी तौर पर थानों में टीचर भी आए थे, लेकिन फील्ड में रहने वाले पुलिसकर्मी कम्प्यूटर और उसको सीखने और अंग्रेजी के शब्दों व किताबों से दूर भागते थे। उस समय ग्वालियर एसपी ऑफिस में आरक्षक (वर्तमान में प्रधान आरक्षक) सुरेन्द्र भटेले ने कम्प्यूटर की बेसिक नॉलेज पर हिंदी में किताब लिखी और उससे पुलिस में वह कम्प्यूटर ज्ञान के प्रणेता बन गए। इनकी किताब को कम्प्यूटर में रूचि रखने वाले अफसरों के साथ ही जवानों ने पढ़ा था। दस अगस्त 1989 में पुलिस विभाग में आरक्षक से पुलिस सेवा में आने वाले सुरेन्द्र भटेले अब IT CELL में प्रधान आरक्षक हैं। उन्होंने MA, LLB, PGDCA किया है। अपनी ड्यूटी के साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मियों को कम्प्यूटर की नॉलेज देने के लिए तीन पुस्तकें बेसिक कम्प्यूटर कोर्स, कम्प्यूटर एण्ड साइबर क्राइम अवयरनेस, कम्यूटर प्रॉब्लम लिखी हैं। पुस्तक लिखने की प्रेरणा उन्हें तत्कालीन ग्वालियर एसपी अन्वेष मंगलम (सेवानिवृत्त स्पेशल डीजी) से मिली थी

पुलिस महकमे में बन गए कम्प्यूटर बाबा

कम्प्यूटर की बेसिक जानकारी को आसान शब्दों में पुस्तक के माध्यम से सहेजने के कारण पुलिस विभाग में आज उन्हें कम्प्यूटर बाबा के नाम से जाना जाता है। अधिकारी हो या जवान सभी उन्हें कम्प्यूटर बाबा के नाम से पुकारते हैं। क्योंकि उनकी लिखी किताब “बेसिक कम्प्यूटर कोर्स’ की बाजार तक से डिमांड आने लगी थी। इसके बाद उनकी भी रूचि बढ़ी और उनकी कलम कभी रुकी ही नहीं।

खुद पढ़ने और जूनियरों को पढ़ाने में आज भी है रूचि

आरक्षक से प्रधान आरक्षक हुए सुरेन्द्र कुमार भटेले को खुद पढ़ने का शौक है और अपने अधीनस्थ सिपाहियों को पढ़ाने में आज भी मजा आता है। इनके ऑफिस में आने वाले जवान जो पढ़ने में रूचि रखते हैं, उनका वह लगातार मार्गदर्शन करते हैं और पढ़ने का समय देते हैं। सुरेन्द्र भटेले के हेल्पफुल नेचर के चलते आज उनके अधीन काम करने वाले कई सिपाही पढ़ाई कर सब इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी तक बनकर बैठे हैं।

25 साल की नौकरी में कभी नहीं लगा लापरवाही का दाग

पुलिस विभाग में 25 साल की सर्विस में अपने कार्य में हर समय वह सजग रहे हैं। आज तक कोई लापरवाही नहीं की है, जिसके कारण आज तक उन्हें एक भी छोटी-बड़ी सजा नहीं मिली है, जो भी कार्य अफसरों ने उन्हें दिया उसे समय से पहले ही पूरा करने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि जो अफसर ग्वालियर आते हैं प्रधान आरक्षक सुरेन्द्र कुमार भटेले के कायल हो जाते हैं।

पुलिस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के लिए किताब एप्रुव हुई

अपराधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सरल हिन्दी भाषा में “कम्प्यूटर एण्ड सायबर क्राइम अवेयरनेस” तैयार की गई है जिसका प्रकाशन पुलिस मुख्यालय द्वारा किया गया। इस पुस्तक को प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षणार्थियों के लिये उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा भटेले पुलिस विभाग में अपनी ड्यूटी करते हुए कम्प्यूटर पर तीन पुस्तक लिख चुके हैं।

सीनियर अफसरों ने विश्वास दिखाया तो हौसला बढ़ता गया

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प्रधान आरक्षक सुरेन्द्र भटेले ने भोपाल से दैनिक भास्कर को बताया कि किताब लिखने के लिए प्रोत्साहित उस समय के एसपी अन्वेश मंगलम ने किया था। पर उसके बाद किताब लिखने से सफलता मिली और अधिकारी विश्वास दिखाने लगे तो हौसला बढ़ता चला गया। इसके बाद दूसरी और तीसरी किताब लिखी। मन में यही रहा कि जो मैंने सीखा है उसे अन्य पुलिस कर्मियों तक पहुंचा दूं, जिससे वो इससे आगे जा सकें। राष्ट्रपति पदक मिलने पर काफी खुशी हो रही है। इससे मुझे इस दिशा में काम करने के लिए और प्रोत्साहन मिलेगा।

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