भारत में लावारिस पड़े एक लाख सत्ताईस हज़ार छःसौ करोड़ रुपये किस खाते में हैं !

लोकमतसत्याग्रह/क्या आप जानते हैं कि ऐसी संभावना है कि आपके दादा-दादी या परिवार में किसी और के पास कोई बैंक खाता या कोई पॉलिसी हो जिसके बारे में आपको आज तक पता न हो और वह पैसा दशकों से लावारिस पड़ा हो?

जी हाँ, ऐसा हो सकता है!!

क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि भारत में बैंकों, ईपीएफ, पीपीएफ, म्यूचुअल फंड, एलआईसी और कई अन्य संस्थाओं जैसे विभिन्न निवेश उत्पादों में 127637करोड़ रुपये अनक्लेम्ड पड़े हैं!!

पिछले कुछ सालों में कोरोना व् अन्य कारणों से बहुत  सारे लोगों की जान चली गई और कइयों  के परिवारों को उनके द्वारा किए गए निवेश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, उनके पास कोई जीवन बीमा पॉलिसी थी या नहीं। उनमें से बहुतों को अभी भी पता नहीं है और शायद कभी पता भी नहीं चलेगा।

भारत में विभिन्न स्थानों पर कितना पैसा लावारिस पड़ा है, इसका विवरण यहां दिया गया है, एक नजर डालें!

बैंकों में  35000  करोड़ रुपये

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर, 2022   तक लगभग 8.1 करोड़ बैंक खातों में 35000  करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। यह औसतन प्रति बैंक खाता 3,000 रुपये के करीब है। इस लावारिस पैसे में सबसे बड़ी हिस्सेदारी एसबीआई बैंक और उसके बाद अन्य निजी क्षेत्र के बैंकों की है.

ईपीएफ में 58000  करोड़ रुपये

 देशभर के ईपीएफ खातों में बड़ी रकम लावारिस पड़ी  है। इसमें से कुछ पैसा उन लोगों का है, जिन्होंने नौकरी बदलने या छोड़ने के बाद पैसा नहीं निकाला है , और इसका एक बड़ा हिस्सा कई वर्षों तक पड़ा रहता है और जिसपे कोई भी कभी दावा नहीं करता है क्योंकि अधिकतर  परिवारों को इस निवेश के बारे में पता  ही नहीं होता है।

Mutual funds   में 2637  करोड़ रुपये

यह पैसा उन निष्क्रिय खातों  में  पड़ा है जिनकी  कीमत  2637  करोड़ रुपये के करीब है। बहुत सारे निवेशकों ने दशकों पहले भौतिक प्रारूप में Mutual फंड में निवेश किया है जिनके परिवार जनों के पास उनके सर्टिफिकेट्स हैं  , साथ ही कई ऐसे भी हैं जिन्होंने ऑनलाइन  बिना किसी Mutual fund  डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से निवेश किया था तथा किसी कारण असामयिक मृत्यु होने से उनके परिवारों को उनके द्वारा किये गए निवेश के बारे में कुछ जानकारी ही नहीं लग पायी।   हालाँकि यह लावारिस  राशि mutual  फंड में  कुल निवेशित राशि  के 1% से भी बहुत कम है। इसका कारण mutual  फंड्स में नियमित रूप से नॉमिनी अपडेट की चिंता किये जाना ,और आज भी भारत में डायरेक्ट प्लान्स का कम चलन होना है जिससे  अधिकांश मामलों में  Mutual फण्ड  सलाहकारों के माध्यम से किया गए निवेश में पारिवारिक परिचय होने से किसी दुखद घटना के होने पर परिवार को भटकना नहीं पड़ता है।

बीमा कंपनियों के पास 25000  करोड़ रुपये

 आईआरडीए के अनुसार सभी बीमा कंपनियों को मिलाकर मौजूदा आंकड़ा  लगभग 25000  करोड़ रुपये है। इसमें से अधिकांश एलआईसी के पास है और आप जानते हैं कि ऐसी बहुत सी पॉलिसियां ​​हैं जिन पर विभिन्न कारणों से परिपक्वता के बाद कभी दावा नहीं किया जाता है।

IEPF के पास 5000करोड़ रुपये

इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा खातों तक न पहुंच पाये लाभांश (Dividend) का है इसके अलावा डिबेंचर आदि के रूप लावारिस पड़े पैसों को जब  कोई भी लम्बे समय तक वापस करने का दावा नहीं करता है । तो सरकार द्वारा इन राशियों को ७ साल के साल के इंतजार के बाद IEPF नामक संस्था में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जिसका उपयोग निवेशकों की जागरूकता और निवेशकों के हितों की सुरक्षा जैसे कार्यकर्मो में किया जाता है।

इनकम टैक्स रिफंड से 2000 करोड़ रु

ndtv की एक  रिपोर्ट  के अनुसार   लगभग 2,000 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड लावारिस पड़ा हुआ था। यदि कोई व्यक्ति अधिक टीडीएस कटौती के कारण अतिरिक्त कर का भुगतान करता है, तो वह रिटर्न दाखिल करके (पिछले 6 वर्षों के लिए) रिफंड का दावा कर सकता है। हालांकि कई बार निवेशकों को इन रिफंड के बारे में पता ही नहीं होता या आलस्य के कारण वे रिटर्न दाखिल नहीं करते।

यह सारा लावारिस पैसा कहां जाता है?

सवाल यह है कि अगर यह सारा पैसा लावारिस है, तो वास्तव में इससे किसे फायदा होता  होगा? क्या बैंक या बीमा कंपनी यह सारा पैसा अपने पास रख लेती हैं ,और इसे केवल अपने लाभ में उपयोग करती है जब तक कि कोई इसे वापस करने का दावा नहीं करता ?

इसका उत्तर यह है कि सरकार ने कुछ फंड बनाए हैं जहां ये राशि कुछ वर्षों के बाद स्थानांतरित की जाएगी और उस फंड का उपयोग किसी विशेष उद्देश्य के लिए किया जाएगा। निम्नलिखित वे फंड हैं

 वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष (एससीडब्ल्यूएफ)

ईपीएफ, पीपीएफ, बीमा कंपनियों और डाक जमा से सभी लावारिस राशि इस वरिष्ठ नागरिक कल्याण योजना में जाती हैं जो देश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों की बेहतरी के लिए काम में लायी जाती है ।

2. जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष (डीईएएफ)

बैंकों में छूटा हुआ  सारा पैसा जैसे बचत बैंक खाता, सावधि और आवर्ती जमा, डिमांड ड्राफ्ट आदि में जमा होता हैं उसे  DEAF नाम के  इस फंड में स्थानांतरित कर दिया जाता है और इसका उपयोग जमाकर्ता की जागरूकता और सुरक्षा के लिए किया जाता है।

3. निवेशक शिक्षा सुरक्षा निधि प्राधिकरण (आईईपीएफ)

IEPF एक अन्य फंड है जो निवेशक सुरक्षा और वित्तीय जागरूकता के लिए बनाया गया है और इसे सभी निवेशक तक न पहुंचे हुए लाभांश, शेयर, आदि मिलते हैं।

अंत में :-आज ही अपने बैंक , बीमा पालिसी ,व अन्य निवेशों में नॉमिनी अपडेट करें , अपनी वसीयत बनवाएं और अपने ऊपर निर्भर परिवारजनो  के साथ अपने निवेशों की जानकारी साझा करें।

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