लोकमतसत्याग्रह/सिविल अस्पताल हजीरा को 30 बिस्तर से बढ़ाकर शासन ने अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित 100 बिस्तर का अस्पताल बना दिया है। यहां 20 बिस्तर का आईसीयू है जिसमें वेंटीलेटर और मॉनीटर जैसे अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरण हैं। शासन ने अस्पताल में संसाधन तो बढ़ा दिए लेकिन डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ नहीं बढ़ाया। यहां 30 बिस्तर के हिसाब से ही अब तक डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ है।
वर्तमान में यहां 50 बिस्तर का उपयोग किया जा रहा है लेकिन ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है। इनमें से 30 बिस्तर मेडिसिन, पीडियाट्रिक, ऑर्थोपेडिक और सर्जरी के मरीजों को भर्ती करने के लिए हैं और 20 बिस्तर इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती कर इलाज देने के लिए हैं। पहले यहां लगभग 600 मरीजों की ओपीडी थी, जो अब बढ़कर लगभग 1300 तक पहुंच गई है। अस्पताल की व्यवस्थाएं ठीक करने के लिए ऊर्जा मंत्री ने उप प्रमुख सचिव (एसीएस) मोहम्मद सुलेमान और प्रमुख सचिव सुदाम खांडे से चर्चा की, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला।
वहीं जिला अस्पताल में भी निर्माण कार्य चल रहा है। लिहाजा यहां से भी मरीज जेएएच रैफर हो रहे हैं। इससे जेएएच में जहां पीडियाट्रिक विभाग में एक बेड पर दो से तीन बच्चे भर्ती हैं। वहीं न्यू जेएएच में तो मरीज बेड फुल होने के कारण जमीन पर भर्ती हो रहे हैं। जेएएच अधीक्षक डॉ. आरकेएस धाकड़ भी कई बार सीएमएचओ को लिख चुके हैं कि जिन मरीजों का इलाज सिविल अस्पताल और जिला अस्पतालों में हो सकता है वे मरीज भी उनके यहां रैफर हो रहे हैं।
सिविल अस्पताल की ओपीडी 1300 तक की
सिविल अस्पताल हजीरा की ओपीडी जिला अस्पताल की ओपीडी को टक्कर दे रही है। जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. आलोक पुरोहित की मानें तो उनकी ओपीडी औसतन 1100 से 1300 मरीज की रहती है। यहां विशेषज्ञ, मेडिकल ऑफिसर और बॉडेंड डॉक्टर मिलाकर 64 डॉक्टर पदस्थ हैं। सिविल अस्पताल हजीरा की ओपीडी भी औसतन 1200 से 1300 की रहती है,जबकि यहां सिर्फ दूसरे अस्पताल से तीन दिन आने वाले डॉक्टर को मिलाकर 18 डॉक्टर ही पदस्थ हैं। सिविल अस्पताल में 2 मेडिसिन
विशेषज्ञ है जो मरीजों को ओपीडी में देखने साथ–साथ डायलिसिस भी करवाते हैं।
बैंच पर इलाज कराने को मजबूर हैं मरीज: जिला अस्पताल मुरार में बेड बढ़ाए जा रहे हैं। वर्तमान में यहां 200 बिस्तर है। मरीजों की संख्या अधिक होने से मरीज बैंच पर इलाज कराने को मजबूर हैं।
एक विशेषज्ञ के ही भरोसे पूरा पीडियाट्रिक विभाग
सिविल अस्पताल हजीरा में 1 अप्रैल से लेकर 10 अगस्त तक 22 हजार मरीज एक पीडियाट्रिशियन ने देखे। इनमें से करीब 145 मरीज अस्पताल में भर्ती भी हुए। इसी तरह मेडिसिन के दो विशेषज्ञ होने के बाद भी 41 हजार मरीज ओपीडी में देखे और 185 मरीज भर्ती हुए। यहां सर्जन के दोनों ही पद खाली हैं। डीआरपी लाइन के अस्पताल से यहां 3 दिन एक सर्जन आता है।
स्टाफ मिले तो मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलें
आईसीयू के लिए 6 डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मिल जाए तो इसकी सुविधा शुरू कर सकते हैं। कम स्टाफ होने के बाद भी प्रदेश में दूसरे नंबर पर बेहतर सुविधा देने वाला अस्पताल बना हुआ है। स्टाफ मिलता है तो मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेगी।
–डॉ. प्रशांत नायक, प्रभारी, सिविल अस्पताल हजीरा
भोपाल जाकर अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया है
सिविल अस्पताल हजीरा में आईसीयू चालू हो सके इसके लिए स्टाफ देने और खाली पद भरने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भोपाल जाकर अवगत कराया है।
डॉ. आरके राजौरिया, सीएमएचओ


