लोकमतसत्याग्रह/उनाव। भगवान भोले शंकर की भक्ति व आस्था का प्रतीक मानी जाने बाली कावड़ यात्रा की शुरुआत आज सुबह कस्वा उनाव से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित भगवान बालाजी के प्राकट्य स्थल से हुई।गौरधन स्थित पहूज एबं अनगौरी नदी के संगम तट पर पहुँचे कावड़ियों ने बैदिक बिधि विधान से कांवड़ भरी तदुपरांत भगवान बालाजी,पशुपतिनाथ एबं तरगुवा रोड पर बिराजे बड़ा महादेव मंदिर पर जलाभिषेक किया। श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का मुख्य महीना माना जाता है।इस महीने में भक्तगण पवित्र नदियों के जल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक भी कावड़ भरकर करते है।इसी भक्ति परम्परा के साक्षात दर्शन आज कस्वा उनाव में दिखाई दिए।भगवान बालाजी के प्राकट्य स्थल पहूज एबं अनगौरी नदी के संगम पर बड़ी संख्या में पहुँचे लोगो ने काबरे भरी।तदुपरांत भगवान बालाजी,बसस्टैंड स्थित पशुपतिनाथ व बड़ा महादेव मंदिर पर स्थापित शिवलिंगों का जलाभिषेक किया।इस सम्बंध में सूर्य मंदिर के पुजारी लालजी पंडा ने पौराणिक मान्यता के सम्बंध में बताया कि भगवान शिव के परमभक्त परशुराम ने पहली वार सावन के महीने में कावंड़ यात्रा कर शंकर भगवान से भक्ति का बरदान प्राप्त किया था।कावड़ यात्रा में मुख्य रूप से पंकज बाबा,प्रदीप खण्ताल,संजू सहदेले,राजू नामदेव, अनिल शुक्ल,बिक्की पंडा,विवेक नामदेव,भिल्लन दुबे, सागर खरे,रवि चौबे,अशोक सूर्यन सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।


