ग्वालियर की विज्ञानी बेटी बोली- इसरो में समानता का बेहतर अवसर

लोकमतसत्याग्रह/प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चंद्रयान की सफलता में मातृशक्ति के योगदान को रेखांकित करने बाद इस मिशन में शामिल ग्वालियर की विज्ञानी बेटी रुचिरा ने कहा कि इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन) में महिलाओं के लिए समानता का बेहतर अवसर और माहौल है। यही कारण रहा कि चंद्रयान-3 मिशन में महिलाओं की प्रमुख भूमिका रही। रुचिरा बताती हैं कि यहां महिला विज्ञानियों की 40 फीसद भागीदारी है। हर विंग में महिला विज्ञानी मौजूद हैं जो पूरे समर्पण के साथ काम को तय समय में पूरा करती हैं। रुचिरा रडार विंग में बतौर विज्ञानी पदस्थ हैं। उनकी टीम ने ही चंद्रयान-3 को लांच करने से पहले मौसम कैसा रहेगा, इसका डेटा विश्लेषण करके बताया। इसके बाद ही चंद्रयान की प्रक्षेपण की प्रक्रिया आरंभ हुई।

विज्ञानी रुचिरा बताती है कि इस प्रोजक्ट पर अलग अलग टीमें अपना अपना काम कर रही थीं। उनकी टीम ने वेदर कंडीशन पर काम किया। हमें प्रक्षेपण से पहले मौसम के बारे में सटीक जानकारी देनी थी ताकि चंद्रयान-3 का चांद तक के सफर में कोई अड़चन न आए। किसी भी स्पेस प्रोग्राम में रडार विंग भी भूमिका सबसे पहले और अहम होती है।

रुचिरा के अलावा सरस्वती शिशु मंदिर के छात्रों की रही अहम भूमिका

सरस्वती शिशु मंदिर ग्वालियर नदी गेट की प्राचार्य कल्पना सिकरवार कहती हैं कि चंद्रयान- 3 प्रोजेक्ट में विद्या भारती द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर से पढ़ाई करने वाले छात्रों की अहम भूमिका है। इनमें ग्वालियर की रूचिरा चांदोरकर के अलावा अतुल निगोतया ने वर्ष 1995 में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज झांसी रोड से हाईस्कूल पास किया। इसी तरह वैज्ञानिक अंकुर त्रिगुणायक ने वर्ष 1996 में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज उरई (उप्र) से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके अलावा मध्यप्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग विद्यालयों में पढ़े भैया-बहन इस प्रोजेक्ट में शामिल रहे। कल्पना बताती हैं कि शोमा (विवाह से पूर्व रुचिरा का यही नाम था) पढ़ने लिखने में काफी होशियार थी। कुछ समय पहले वह मिलने भी आई थी।

इस तरह से आप भी बन सकते विज्ञानी

रुचिरा बताती हैं कि इसरो में जाने के लिए आपके पास भौतिकी, खगोल विज्ञान, खगोल भौतिकी, सौर भौतिकी, मौसम विज्ञान में मास्टर डिग्री या अंतरिक्ष और वायुमंडलीय विज्ञान से संबंधित अन्य समकक्ष योग्यता, या इलेक्ट्रानिक्स और संबद्ध क्षेत्रों, पर्यावरण विज्ञान में इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री(बीई/बीटेक) होनी चाहिए। कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री कोर्स भी कर सकते हैं। पीएचडी, एमएससी, एमटेक वाले भी साइंटिस्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आपको इसरो का एंट्रेस टेस्ट (गेट) देना पड़ता है।

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