भारतीय भाषाओं में निकलने वाले अखबारों की तेज तरक्की:मीडिया समिट में बोले मीडिया दिग्गज, आज भी अखबार पर पाठकों का भरोसा कायम

लोकमतसत्याग्रह/टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया के उभार के साथ ही भारत में अखबारों के भविष्य को लेकर लंबे समय से चिंताएं जताई जा रही हैं, लेकिन हकीकत एकदम इसके उलट है। कोरोना के बाद न्यूजपेपर्स की डिमांड और बढ़ी है। वे न सिर्फ मजबूती के साथ लोगों की आवाज बुलंद कर रहे हैं, उनकी समस्याओं को दुनिया के सामने ला रहे हैं, बल्कि संस्थानों का प्रॉफिट और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। यह बात सामने आई ‘पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ की पहली मीडिया समिट में।

पीएचडीसीसीआई की मीडिया एंड कम्युनिकेशन कमेटी की तरफ से नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, जर्नलिस्ट्स, टेक इनोवेटर्स और पॉलिसी मेकर्स शामिल हुए।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सचिव अपूर्व चंद्र, पीएचडीसीसीआई के प्रेसिडेंट साकेत डालमिया और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. रंजीत मेहता, दैनिक भास्कर ग्रुप के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और PHDCCI की मीडिया एंड कम्युनिकेशन कमेटी के चेयरमैन पवन अग्रवाल, टाइम्स ग्रुप के सीईओ मोहित जैन ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस दौरान एक्सपर्ट्स ने बताया कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा न्यूजपेपर मार्केट है। जहां 1 लाख से ज्यादा अखबार रजिस्टर्ड हैं और रोज 24 करोड़ से अधिक प्रतियां प्रकाशित होती हैं। 22 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाले अखबार आम आदमी की आवाज बुलंद कर रहे हैं।

प्रसार के मामले में हिंदी अखबार अव्वल हैं, उनके बाद दूसरे नंबर पर अंग्रेजी अखबार और तीसरे नंबर पर तेलुगु अखबार सबसे ज्यादा पढ़े जाते हैं। इनके अलावा गुजराती, बंगाली, मलयालम, कन्नड़, मराठी, तमिल, पंजाबी, ओडिया, असमिया और उर्दू अखबार भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित होते हैं।

इस दौरान पीएचडीसीसीआई प्रेसिडेंट साकेत डालमिया ने कहा कि आज मीडिया सिर्फ जानकारी ही नहीं दे रहा है, बल्कि लोगों के जीने के ढंग को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने मीडिया के सामने मौजूद इन चुनौतियों पर बात करने की जरूरत पर जोर दिया।

मीडिया की फ्रीडम ऑफ स्पीच पर जोर
इस दौरान मीडिया की फ्रीडम ऑफ स्पीच का मुद्दा भी उठा। टीवी लाइव इंडिया की मैनेजिंग डायरेक्टर नलिनी सिंह, द वायर के फाउंडर एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन, अमर उजाला के अशोक शर्मा ने मीडिया के अभिव्यक्ति की आजादी और जिम्मेदारी से भरी पत्रकारिता पर जोर दिया।

टेक्नोलॉजी के साथ बदले रीडर
वहीं, पीडीलैब डॉट मी के फाउंडर संदीप अमर और नेटवर्क 18 के सीईओ पुनीत सिंघवी ने कहा कि बदलती टेक्नोलॉजी के साथ रीडर्स का टेस्ट भी बदला और साथ ही कंटेंट की खपत भी बढ़ती गई।

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