लोकमतसत्याग्रह/संयुक्त राष्ट्र महासभा के 70वें सत्र में तय किया गया कि 2015 से 2030 के दौरान दुनिया से भूख, चरम गरीबी, तमाम बीमारियां व बेरोजगारी को खत्म कर दिया जाएगा। कुल मिलाकर 17 ऐसे क्षेत्र तय किए गए, जिनमें मानव विकास को गति देनी थी। इन लक्ष्यों को हासिल करने के 15 वर्ष की मियाद में से आधा वक्त गुजर चुका है, लेकिन दुनिया इन लक्ष्यों को हासिल करने से 85 फीसदी दूर है। यूनाइडेट इन साइंस 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन इन लक्ष्यों को हासिल करने में बाधक बना है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने 18 वैश्विक एजेंसियों के साझे प्रयास से तैयार रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि जलवायु बदलावों के खिलाफ जारी प्रयास अगर मौजूदा गति से ही चलते रहे, तो 2030 से पहले ही दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान की सीमा लांघ जाएगी और इस सदी के अंत तक दुनिया 2.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म होगी। अगर अब भी तीव्र और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो मानवता के अस्तित्व के लिहाज से अनर्थ हो जाएगा।
जलवायु परिवर्तन भविष्य की बात नहीं
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में लिखा कि 2023 ने स्पष्ट रूप से दिखाया है कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की बात नहीं, बल्कि अभी घटित हो रहा है। चरम मौसम दुनियाभर में तबाही मचा रहा है। हम जानते हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है, वैश्विक प्रतिक्रिया बहुत धीमी हो रही है। इस बीच, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लिए 2030 की समयसीमा के आधे रास्ते में दुनिया बुरी तरह से पटरी से उतर गई है।
उत्सर्जन में 45% कटौती जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दुनिया को पेरिस समझौते के मुताबिक तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना है, तो 2030 तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस में 45% तक की कटौती करनी होगी। चिंता की बात यह है कि 2021 की तुलना में 2022- 23 में कार्बन उत्सर्जन में वैश्विक स्तर पर 1 फीसदी की वृद्धि हुई है।


