लोकमतसत्याग्रह/पीएचई घोटाले की 5 करोड़ रुपए की राशि से आरोपी हीरालाल (इंचार्ज पंप ऑपरेटर) ने बेला की बावड़ी पर होटल का निर्माण किया है। यह खुलासा घोटाले में सामने आए एक खाताधारक से पूछताछ में हुअा। खाता धारक ने बताया कि उसे हीरालाल ने बेला की बावड़ी पर नमनराज होटल एंड रेस्टोरेंट का निर्माण करने के लिए खाते में ट्रांसफर की थी।
इस होटल की बिक्री रोकने के लिए एएसपी ऋषिकेश मीणा ने एसडीएम को पत्र लिखा है। जांच आगे बढ़ने पर घोटाले की राशि 19 करोड़ से बढ़कर 40 करोड़ तक भी पहुंच सकती है। जो घोटाला उजागर हुआ है वह 2018 के बाद का है, जबकि विभागीय सूत्रों के अनुसार घोटाले की यह प्रक्रिया उससे भी काफी पहले से चल रही थी।
2018 के बाद ट्रेजरी से भुगतान का सॉफ्टवेयर बदला गया था और जो घोटाला सामने आया है वह नए सॉफ्टवेयर से हुए भुगतान का ही है। पुराने सॉफ्टवेयर से हुए भुगतान की जांच होने पर घोटाले की रकम व आरोपी अधिकारियों के नाम भी बढ़ जाएंगे। इस घोटाले में ट्रेजरी के अफसरों सहित कई सेवानिवृत्त अफसर भी दायरे में आ सकते हैं। अभी इस मामले में 2018 के बाद नए सॉफ्टवेयर के प्रचलन के दौरान तैनात रहे 7 कार्यपालन यंत्रियों सहित खाते धारकों को ही आरोपी बनाया गया है।
ऐसे हुआ घोटाला
मृत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रमाण पत्र ट्रेजरी में तत्काल पहुंच जाते हैं और उनके वेतन खाते बंद कर दिए जाते हैं। जिन खातों में वेतन का भुगतान हुआ उनमें ऐसे भी कर्मचारी है। इन कर्मचारियों के निधन व सेवानिवृत्त होने पर प्रमाण-पत्र जमा नहीं हुए या फिर जमा हुए प्रमाण-पत्र गायब कर खातों को संचालित रखा गया, यह जांच की जा रही है। आशंका यह है कि इन कर्मचारियों के प्रमाण पत्र गायब कर खाते संचालित रख कर रुपए निकाले गए और दूसरे खातों में शिफ्ट किया गया।
सेवानिवृत्त अफसर से आरोपी हीरालाल ने सीखे थे घोटाले के तरीके
इस घोटाले का मुख्य आरोपी हीरालाल को बनाया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार हीरालाल को घोटाले के तरीके एक सेवानिवृत्त अफसर ने सिखाए हैं। इस अधिकारी का नाम जांच में नहीं आया है। क्लोरीन खरीद व लघु उद्योग निगम के बिना हस्ताक्षर के बिलों का भुगतान, जबकि मद ही नहीं पीएचई में जो घोटाला सामने आया है उसमें क्लोरीन खरीद का 6 करोड़ रुपए से अधिक का बिल भी शामिल बताया गया है। जबकि विभागीय सूत्रों के अनुसार क्लोरीन की खरीद नगर निगम द्वारा की जाती है और भुगतान किए गए बिलों पर हस्ताक्षर भी नहीं है। इस तरह लघु उद्योग निगम की ओर से की गई कई खरीद के भी करोड़ों के बिलों का भुगतान किया गया है, जबकि इनका प्रावधान नहीं था।
फर्जी कर्मचारियों के स्थानांतरण पत्र लगाकर शुरू किए वेतन खाते
कई ऐसे कर्मचारियों के नाम से भी खाते सामने आए हैं जो कि किसी विभाग में कर्मचारी ही नहीं हैं। इन लोगों को दूसरे स्थान से स्थानांतरण बताकर वेतन खाते शुरू किए गए और फिर इनमें वेतन जारी कर दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया। कोर्ट केस एरियर के नाम से कर्मचारियों के नाम और खाते बदलकर भी भुगतान किए गए।
खातेधारक से पूछताछ में खुलासा, जांच के लिए लिखा है पत्र
पीएचई घोटाले में खातेधारक से पूछताछ में उसके खाते में ट्रांसफर की गई धनराशि होटल निर्माण के लिए दिए जाने की बात बताई है। इस होटल की बिक्री रोकने के लिए एसडीएम को पत्र लिखा गया है। –ऋषिकेश मीणा, एएसपी


