लोकमतसत्याग्रह/सवारी वाहनों की अव्यवस्था को रोकने और बढ़ते ई-रिक्शों को योजना के तहत लाने के लिए रविवार को जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के बैठक हुई। इस बैठक में आटो-टेंपो और ई-रिक्शा यूनियन के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया था। बैठक में फिलहाल यह तय किया गया है कि जिन मेन 11 रूटों पर टेंपो संचालित हैं वहां ई-रिक्शा नहीं चलेंगे। वह सिर्फ इन रूटों से पास होकर जा सकेंगे।
ई-रिक्शा वालों के लिए दूसरे 55 रूट तय किए गए हैं जहां वे सवारी ले सकेंगे। मुरैना में जिस तरह मुख्य रूटों पर ई-रिक्शा को नहीं चलने दिया जाता है उसी प्रकार का माडल यहां लागू किए जाने पर विचार चल रहा है। यहां यह बता दें कि शहर में 14000 से ज्यादा ई-रिक्शा हो चुके हैं और यह मुख्य रूट सहित सभी व्यस्ततम मार्गों पर दौड़ रहे हैं। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में अभी तक आटो व टेंपो की अव्यवस्था ही आड़े आती थी। अब ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या परेशान कर रही है। ई-रिक्शा परमिट से मुक्त हैं क्योंकि सरकार ने ई-वाहनों को प्रमोट करने के लिए अभी सिर्फ रजिस्ट्रेशन की बाध्यता रखी है। रविवार को पुलिस कंट्रोल रूम में कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह और एसपी राजेश सिंह चंदेल व अधिकारीगणों ने यूनियनों के साथ चर्चा की और सहमति बनाई। जो ई-रिक्शा के 55 रूट तय किए गए हैं उनको लेकर अभी और सुधार किया जाएगा। अब सभी सवारी वाहन होंगे चेक: अब पुलिस व प्रशासन सवारी वाहनों की जांच करेगा। इसमें दूसरे जिले का वाहन तो शहर में नहीं चलाया जा रहा, शराब पीकर वाहन तो नहीं चलाया जा रहा है, तेज आवाज में गाना बजाना, लाइसेंस व इंश्योरेंस इन बिंदुओं पर जांच की जाएगी।


