लोकमतसत्याग्रह/नगर निगम में आउटसोर्स माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मी सहित ड्राइवर हड़ताल पर बोले– लिखित आदेश आने तक हड़ताल रहेगी
नगर निगम में आउटसोर्स माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मी व ड्राइवर विनियमितीकरण की मांग को लेकर बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इससे बुधवार को शहर से लगभग 300 टन कचरा नहीं उठा। ठेका माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारी दोपहर 12 से तीन बजे तक जलविहार स्थित नगर निगम परिषद भवन के मुख्य द्वार पर धरना देकर बैठ गए। सफाई कर्मचारियों की मांग थी कि निगम में ठेका प्रथा खत्म किया जाए। उन्हें निगम के मातहात विनियमित कर्मचारी के तौर पर रखा जाए, क्योंकि ठेकेदार तीन-तीन माह वेतन नहीं देता।
हालांकि परिषद में हंगामे के बीच पक्ष व विपक्ष की सहमति पर निगम से ठेका प्रथा खत्म कर दैनिक वेतन के रूप में रखने का प्रस्ताव स्वीकृत करते हुए राज्य शासन को भेजने की मंजूरी सभापति मनोज तोमर ने दी। अब नगर निगम परिषद इस प्रस्ताव को आयुक्त के पास भेजेगी। यहां से शासन के पास प्रस्ताव जाएगा। यदि शासन से मंजूरी मिली तो आउटसोर्स माध्यम से सफाई, ड्राइवर व अन्य विभागों में कार्यरत लगभग 2500 कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सकता है।
महापौर का किया घेराव, बोले– आदेश मिलने तक नहीं जाने देंगे
नगर निगम परिषद की बैठक खत्म होने के बाद जैसे ही महापौर शोभा सिकरवार अपनी कार पर बैठीं, सफाई कर्मचारियों ने उनके वाहन को घेर लिया। सफाई कर्मियों का कहना था कि जब तक विनियमित करने का जब तक उन्हें लिखित में आदेश नहीं मिल जाता महापौर को वह जाने नहीं देंगे। इस दौरान काफी देर तक पार्षदों ने समझाने का प्रयास किया कि नगर निगम से ठेका प्रथा खत्म करने का परिषद में प्रस्ताव पारित हो चुका है।
अब शासन से मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस पर सफाई कर्मचारियों का कहना था कि पहले ही इस तरह का परिषद में प्रस्ताव पारित हो चुका है, लेकिन शासन से मंजूरी नहीं मिली। इसलिए लिखित आदेश आने के बाद ही वह काम पर लौटेंगे। करीब आधा घंटे इंतजार के बाद पुलिस बलक की मौजूदगी में वह निकल सकी।
2016 से आउटसोर्स व्यवस्था लागू हुई
निगम में 2016 से आउटसोर्स व्यवस्था लागू हुई है। पहले दैनिक वेतन भोगी के तौर पर कर्मचारी कार्यरत थे। अब सभी निगम में आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों को रखा जा रहा है।
नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी
आउटसोर्स कर्मचारियों को दैनिक वेतनभोगी के रूप में रखने का जो प्रस्ताव पारित हो गया है। इसमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
–आरके श्रीवास्तव, प्रभारी, आयुक्त, नगर निगम
इधर…कमीशन मांगने के आरोप पर महिला पार्षदों ने किया हंगामा
वार्ड-25 की पार्षद प्रीति परमार के पति संजय परमार पर ठेकेदार अजय वाजपेयी द्वारा निगमायुक्त हर्ष सिंह के सामने 10 फीसदी कमीशन मांगे के आरोप पर निगम परिषद की बुधवार को हुई बैठक में पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। पार्षद पति पर शीतला कॉलोनी में सड़क निर्माण पर ठेकेदार ने कमीशन मांगने के आरोप लगाए थे।
इस दौरान पक्ष व विपक्ष के पार्षद लामबंद हो गए। महिला पार्षद के साथ पुरुष पार्षदों ने तीन बार सभापति मनोज सिंह तोमर की आसंदी का घेराव किया। इसके चलते सभापति को इस मामले में तीन बार 10-10 मिनट के लिए बैठक को स्थगित करना पड़ा।
पार्षदों का कहना था कि ठेकेदार ने बिना प्रमाण के किस तरह निगमायुक्त के सामने कमीशन मांगने के आरोप पार्षद पति पर लगाए। साथ ही सभापति से मांग करते हुए कहा कि ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई भी की जाए। इस पर सभापति ने कहा कि इस मामले को एजेंडे में लाया जाए। तभी इस पर निर्णय लिया जा सकता है। हंगामे के कारण सभापति ने गुरुवार दोपहर 3 बजे तक के लिए बैठक स्थगित कर दी।
जनता के काम नहीं हुए तो महापौर एवं निगम सभापति के खिलाफ देंगे धरना
परिषद की बैठक में एमआईसी मेंबर सुरेश सिंह सोलंकी ने कहा कि जनता के काम नहीं हुए तो सभी पार्षद मिलकर महापौर व सभापति के खिलाफ धरने पर बैठेंगे। उनका कहना था कि घर की छत 60 साल तक चलती है और निगम की सड़क तीन माह में ही खराब हो जाती है। इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं होती? इस पर सभापति ने कहा कि लोकनिर्माण विभाग का नगर सरकार में मंत्री कौन है?


