शहर में कचरा ही कचरा, 225 वाहन नहीं पहुंचे डोर-टू-डोर:सड़कों पर पड़ा है 1200 टन से ज्यादा कचरा, बीमारियों का खतरा

लोकमतसत्याग्रह/स्वच्छता में ग्वालियर की रैंक सुधारने का दावा सिर्फ दावा ही रह जाता है। तीन दिन से कचरा कलेक्शन में लगे आउटसोर्स कर्मचारी धरने पर बैठे हैं। पूरा शहर कचरे के ढेर में बदल गया है। सड़कों पर 1200 टन से ज्यादा कचरा फेला हुआ है। जिससे बीमारियों का खतरा तो बढ़ा ही है पूरा शहर मंे हर तरफ गंदगी नजर आ रही है।

असल में डोर-टू-डोर कलेक्शन करने वाले 225 वाहन शुक्रवार को भी नहीं चले हैं। वर्कशॉप के बाहर खड़े 12 ट्रैक्टर-ट्राली से कुछ जगह थोड़ा-बहुत कचरा उठाने का दावा किया जा रहा है। शहर में गली मोहल्ला, बाजार व सड़कों पर कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं।

दरअसल में सफाई व्यवस्था में आउससोर्स पर लगे कर्मचारियों ने विभाग में ठेका प्रथा को खत्म करने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया है। गुरुवार को जल विहार परिषद व महापौर कार्यालय के बाहर धरना पर बैठे सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को समझाने की कोशिश कर बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। नगर निगम आयुक्त हर्ष सिंह ने यहां तक कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण टीम की कभी भी आ सकती है, इसलिए आप लोग अपनी जिद्द छोड़कर काम पर लौट आओ, लेकिन आंदोलनकारी ठेका प्रथा को खत्म करने की जिद्द पर अड़े रहे। फिर पुलिस ने व्यवस्था संभाली और जनप्रतिनिधि निकल सके। जल विहार में इन हड़ताली कर्मचारियाें ने बड़ी संख्या में पहुंचकर दोपहर से लेकर शाम तक हंगामा किया।
हर दिन 400 टन औसतन कचरा उठता है
लैंडफिल साइट पर रोज औसतन 400 टन से ज्यादा कचरा पहुंचता है। तीन दिन से डोर-टू-डोर गाड़ी कचरा उठाने नहीं जा रही है। इससे करीब 1200 टन कचरा शहर में फैला हुआ है। त्योहार को देखते हुए साफ-सफाई और पुताई के दौरान यह कचरा 150-200 टन रोज अतिरिक्त बढ़ जाएगा। आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप हंगामा चलता रहा।
2016 से आउटसोर्स व्यवस्था हुई थी लागू
निगम में 2016 से आउटसोर्स व्यवस्था लागू हुई है। पहले दैनिक वेतन भोगी के तौर पर कर्मचारी कार्यरत थे। अब सभी निगम में आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों को रखा जा रहा है। इसी का कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनका नियमितकरण हो।
जल्द नहीं उठा कचरा तो सड़क नहीं दिखेगी
शहर में कई ऐसे पॉइंट हैं जहां सड़कों पर कचरे के ऊंचे-ऊंचे ढेर लग गए हैं। शहर के मुरार बारादरी चौराहा बिजलीघर के सामने मुख्य सड़क पर दिन रात कचरा डंप हो रहा है, लेकिन तीन दिन मंे यहां इतना कचर एकत्रित हो गया है कि सड़क की चौड़ाई आधी रह गई है। एक या दो दिन हड़ताल और चलती है तो यहां सड़क नहीं सिर्फ कचरा ही दिखाई देगा।
कचरे में आवारा मवेशी बने जान के दुश्मन
सडकों पर कचरा एकत्रित होते ही गाय, बैल व अन्य आवारा मवेशियों का वहां जमावड़ा लग गया है। ऐसे में वहां से निकलने वालों की जान को भी खतरा है। इसलिए जल्दी कोई निर्णय नहीं लिया गया तो किसी की जान पर भी बन सकती है।

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