मोदी सरकार की नीतियों का दिख रहा असर, शहरों में तेजी से घटी बेरोजगारी

लोकमतसत्याग्रह/प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न योजनाओं का असर रोजगार क्षेत्र में भी दिखने लगा है. आंकड़े भी शहरी क्षेत्रों में रोजगार में बढ़ोतरी और बेरोजगारी में कमी के संकेत दे रहे हैं. NSO के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में शहरी बेरोजगारी तेजी से घटी है.

क्या बताते हैं आंकड़े?
NSO के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश के शहरी इलाकों में बेरोजगारी की दर में लगातार कमी आ रही है. अप्रैल-जून 2022 के आंकड़ों के अनुसार, तब बेरोजगारी की दर 7.6 फीसदी थी, जो कि जुलाई-सितंबर 2022 में 7.2 फीसदी हो गई, अक्टूबर-दिसंबर 2022 में 7.2 फीसदी, जनवरी-मार्च में 6.8 फीसदी और अप्रैल-जून 2023 में 6.6 फीसदी रह गई है.

अगर राज्यवार स्थिति का जायजा लिया जाए तो कई राज्य राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. हालाकि कई राज्यों में स्थिति राष्ट्रीय औसत से खराब है. राज्यवार शहरी बेरोजगारी की बात की जाए तो हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जम्मू-कश्मीर और केरल में शहरी बेरोजगारी की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है, जबकि दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा में यह दर राष्ट्रीय औसत से कम है.

मोदी सरकार की नीतियों का हो रहा है असर
बीजेपी के युवा नेता मनोज यादव का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी के दीर्घकालीन और रोजगार परख नीतियों का असर दिख रहा है. मनोज यादव दावा करते हैं कि कोरोना काल के दौरान और इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से उद्योगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर सहायता दी, पीएलआई स्कीम चलाया, इसका फायदा रोजगार के क्षेत्र में दिख रहा है.

मनोज यादव का कहना है कि आने वाले दिनों में यह असर और भी दिखेगा. बेरोजगारी में कमी के कारण औद्योगिक विकास भी होगा. मनोज यादव का दावा है कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय अर्थव्यवस्था को आने वाले कुछ वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में भी मदद मिलेगी.

वैश्विक संकटों के बावजूद बनाए रखी तेज विकास दर
इसके साथ ही साथ कई जानकारों का मानना है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन संकट के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन के प्रभावित होने और कोरोना के कारण आर्थिक गतिविधियों के प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने के बावजूद अपनी कुशल नीति के कारण एक ओर जहां विकास दर में तेजी बनाए रखी है, वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी की दर में भी कमी आ रही है. जबकि दुनिया के कई विकसित देश बेरोजगारी, महंगाई और घटते विकास दर तीनों से जूझ रहे हैं.

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